बाराबंकी एक्सप्रेस की खबर का बड़ा असर: अवैध वसूली और पक्षपात के आरोपों पर SP अर्पित विजयवर्गीय ने जांच के आदेश दिए।
CO रामसनेहीघाट को सौंपी गई जांच, पीड़ित ने लगाए गंभीर आरोप।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 14 अप्रैल 2026
बाराबंकी एक्सप्रेस की खबर का एक बार फिर बड़ा असर देखने को मिला है।
हलका दरोगा (विवेचक) और हेड कांस्टेबल पर लगे अवैध वसूली, पक्षपातपूर्ण कार्रवाई और प्रताड़ना के गंभीर आरोपों को संज्ञान में लेते हुए बाराबंकी के तेज तर्रार पुलिस अधीक्षक अर्पित विजयवर्गीय (Arpit Vijayvargiya) ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं।
इस पूरे प्रकरण की जांच क्षेत्राधिकारी रामसनेही घाट जटाशंकर मिश्र (Jatashankar Mishra) को सौंपी गई है।
सीओ ने पुष्टि करते हुए बताया कि संबंधित पक्षों को बयान के लिए बुलाया गया है और जल्द ही जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी।
क्या है पूरा विवाद?
असंद्रा थाना क्षेत्र के बांसूपुर मजरे रतौली गांव में करीब 20 दिन पहले आपसी रंजिश के चलते दो पक्षों में मामूली कहासुनी हुई थी, जो अब बड़े विवाद में बदल चुकी है।
22 मार्च की कहासुनी बनी विवाद की जड़
पीड़ित संदीप सिंह के अनुसार, 22 मार्च को उनके भतीजे अर्पित सिंह और गांव के सोनू सिंह के बीच पुरानी रंजिश को लेकर कहासुनी हुई थी।
आरोप है कि पुलिस ने एक पक्षीय कार्रवाई करते हुए केवल सोनू सिंह की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया, जबकि अर्पित की शिकायत को नजरअंदाज कर दिया गया।

अगले दिन जानलेवा हमला, कई लोग गंभीर घायल
पीड़ित के अनुसार, पुलिस की कथित एकतरफा कार्रवाई के बाद विपक्षियों के हौसले बढ़ गए।
मुंडन कार्यक्रम में हुआ हमला
23 मार्च की रात मुंडन संस्कार के दौरान अर्पित सिंह, शिवम और अशोक सिंह पर जानलेवा हमला कर दिया गया, जिसमें तीनों गंभीर रूप से घायल हो गए।
बाद में पुलिस ने अर्पित की तहरीर पर 8 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया, लेकिन दूसरी ओर से भी पीड़ित पक्ष पर केस दर्ज कर दिया गया।

फर्जी मेडिकल का आरोप, मामले में नया मोड़
मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब कथित घायल विनय सिंह ने खुद ही मारपीट से इनकार कर दिया।
उन्होंने एसपी बाराबंकी को शपथ पत्र देकर बताया कि:
- चोट साइकिल से गिरने के कारण लगी थी
- पुलिस ने फर्जी मेडिकल बनाकर केस तैयार किया
इस खुलासे के बाद असंद्रा पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।


16 हजार की वसूली, फिर भी जेल भेजने का आरोप
पीड़ित संदीप सिंह ने सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कहा कि विवेचक और हेड कांस्टेबल ने 16 हजार रुपये लेने के बावजूद उनके परिजनों अर्पित सिंह, शिवम सिंह और रामकरन को जेल भेज दिया।

खुलेआम घूम रहे आरोपी
पीड़ित का दावा है कि:
- जानलेवा हमले के 8 नामजद आरोपियों में से 5 अभी भी फरार हैं
- उनकी गिरफ्तारी नहीं की जा रही
परिवार पर संकट, घर छोड़ने की नौबत
पीड़ित परिवार का कहना है कि पुलिस की कार्रवाई से उनका जीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है।
- डर के साए में जी रहा परिवार
- खेती-किसानी प्रभावित
- लगातार प्रताड़ना
- घर छोड़ने की नौबत
पीड़ित ने मुख्यमंत्री पोर्टल के साथ-साथ पुलिस अधीक्षक से भी न्याय की गुहार लगाई है।

पुलिस का पक्ष—आरोप पूरी तरह निराधार
विवेचक ओमित कौशल ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि:
- मामले में तीन पक्षों से कुल 31 लोगों पर मुकदमा दर्ज है
- 16 हजार की वसूली का आरोप गलत है
- जांच निष्पक्ष तरीके से की जा रही है
पहले भी विवादों में रही असंद्रा पुलिस
स्थानीय लोगों के अनुसार, असंद्रा थाना पहले भी कई विवादों में घिर चुका है:
- 2025 के सामूहिक दुष्कर्म मामले में लापरवाही के आरोप
- ब्लैकमेलिंग से परेशान विवाहिता की मौत के मामले में सवाल
- हाल ही में एक साधू बाबा से ₹14,000 लूट और धमकी के आरोप
- अवैध खनन और लकड़ी कटान में साठगांठ की चर्चाएं

बड़ा सवाल—क्या होगी निष्पक्ष जांच?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि:
- क्या इस मामले में निष्पक्ष जांच होगी?
- क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी या मामला दबा दिया जाएगा?
फिलहाल पूरे मामले पर लोगों की नजरें टिकी हुई हैं और जांच रिपोर्ट का इंतजार है।
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद












