बाराबंकी के मोहम्मदपुर खाला थाना क्षेत्र में 16 वर्षीय किशोरी के कथित अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म का मामला सामने आया है।
परिजनों का आरोप है कि नामजद आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज किया।
पीड़ित परिवार ने निष्पक्ष जांच और मेडिकल परीक्षण की मांग की है।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 13 जुलाई 2026
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाने का दावा करती है, लेकिन राजधानी लखनऊ से सटे बाराबंकी जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मोहम्मदपुर खाला थाना क्षेत्र में एक 16 वर्षीय किशोरी के कथित अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म के मामले में परिजनों ने पुलिस पर नामजद आरोपियों को बचाने का आरोप लगाया है।
परिजनों का कहना है कि उन्होंने दो नामजद आरोपियों के खिलाफ अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म की तहरीर दी थी, लेकिन पुलिस ने गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज करने के बजाय तहरीर बदलकर अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ बहला-फुसलाकर ले जाने की धाराओं में केस दर्ज कर दिया। मामले को लेकर पीड़ित परिवार ने उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है।
शौच के लिए गई युवती को जबरन बाइक पर बैठाकर ले जाने का आरोप
पीड़िता के भाई के अनुसार, 10 जुलाई 2026 को दोपहर करीब 2 बजे उसकी 16 वर्षीय बहन गांव के बाहर खेतों की ओर शौच के लिए गई थी। इसी दौरान गांव के ही रहने वाले दो सगे भाई तालिब और अन्नू कथित रूप से वहां पहुंचे और युवती को जबरन अपाचे मोटरसाइकिल पर बैठाकर अपने साथ ले गए।
परिजनों का आरोप है कि घटना पूरी तरह सुनियोजित थी और युवती को उसकी इच्छा के विरुद्ध अपने साथ ले जाया गया।
नशीला पदार्थ खिलाकर सामूहिक दुष्कर्म का आरोप
परिवार का आरोप है कि दोनों आरोपियों ने युवती को नशीला पदार्थ खिलाया और उसके बाद उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया।
पीड़ित परिवार का यह भी कहना है कि देर रात करीब 11 बजे आरोपियों की मां और बहन युवती को घर के पास छोड़कर चली गईं। घर पहुंचने के बाद युवती ने परिजनों को पूरी घटना बताई, जिसके बाद परिवार न्याय की उम्मीद लेकर थाने पहुंचा।
नामजद आरोपियों की जगह अज्ञात के खिलाफ दर्ज हुआ मुकदमा
पीड़िता के भाई का आरोप है कि 11 जुलाई 2026 को वह मोहम्मदपुर खाला थाने पहुंचा और तालिब व अन्नू के खिलाफ अपहरण तथा दुष्कर्म की धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की मांग की।
लेकिन पुलिस ने उसकी शिकायत के बावजूद नामजद आरोपियों पर कार्रवाई करने के बजाय तहरीर बदलकर अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 137(2) (बहला-फुसलाकर भगा ले जाने) के तहत मामला दर्ज कर लिया।
परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने न तो अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म की धाराएं लगाईं और न ही तत्काल पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया।
परिजनों ने उच्च अधिकारियों से लगाई न्याय की गुहार
पीड़िता के भाई ने पूरे मामले की शिकायत उच्च अधिकारियों से करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने मांग की है कि—
- नामजद आरोपियों तालिब और अन्नू के खिलाफ अपहरण एवं सामूहिक दुष्कर्म की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाए।
- पीड़िता का तत्काल मेडिकल परीक्षण कराया जाए।
- पूरे मामले की जांच किसी वरिष्ठ अधिकारी से कराई जाए।
- दोषियों को जल्द गिरफ्तार कर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
पुलिस की कार्रवाई पर उठ रहे गंभीर सवाल
परिजनों का कहना है कि जब युवती ने कथित रूप से पूरी घटना बताई और आरोपियों के नाम भी बताए, तब भी पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर मामले को कमजोर करने का प्रयास किया।
इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में भी पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि महिलाओं से जुड़े गंभीर मामलों में यदि नामजद आरोपियों पर भी तत्काल कार्रवाई नहीं होगी, तो सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद / योगेश












