Barabanki News: नवाबगंज तहसील में 30 दिन में बनने वाला उत्तराधिकार प्रमाण पत्र 6 महीने बाद भी जारी नहीं हुआ।
पीड़ित पंकज गुप्ता ने कानूनगो पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री जनता दर्शन में शिकायत करने की बात कही।
राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 13 जुलाई 2026
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार भले ही भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति का दावा करती हो, लेकिन राजधानी लखनऊ से सटे बाराबंकी जिले की नवाबगंज तहसील की कार्यशैली इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि तहसील में बिना “चढ़ावा” के छोटे-से-छोटा काम भी समय पर नहीं होता। वहीं राजस्व विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों पर खनन माफियाओं से सांठगांठ, सरकारी भूमि के मामलों में अनियमितता और आम जनता के कार्यों को महीनों तक लंबित रखने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए जा रहे हैं।
इसी बीच नवाबगंज तहसील का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली और तय समय-सीमा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 30 दिनों में बनने वाला उत्तराधिकार प्रमाण पत्र छह महीने बाद भी जारी नहीं हो सका, जबकि पीड़ित दो-दो बार आवेदन कर चुका है।
6 महीने से तहसील के चक्कर काट रहा है पीड़ित
ताजा मामला फतहाबाद मजरा बड़ेल, तहसील नवाबगंज निवासी पंकज गुप्ता का है।
पंकज गुप्ता पुत्र सीतासरन ने अपने दिवंगत पिता के उत्तराधिकार प्रमाण पत्र के लिए 23 जनवरी 2026 को विधिवत आवेदन किया था। आरोप है कि यह आवेदन संबंधित कानूनगो कार्यालय तक पहुंचने के बाद ही “गुम” हो गया।
काफी समय तक कोई कार्रवाई न होने पर पंकज गुप्ता ने हार नहीं मानी और 16 मई 2026 को दोबारा उत्तराधिकार के लिए आवेदन प्रस्तुत किया। लेकिन यह आवेदन भी कानूनगो लक्ष्मीकांत मिश्रा के पास लंबित बताया जा रहा है।
सरकारी समय सीमा सिर्फ दीवारों तक सीमित?
बाराबंकी कलेक्ट्रेट परिसर की दीवारों पर राजस्व विभाग की विभिन्न सेवाओं के साथ उनके निस्तारण की समय-सीमा स्पष्ट रूप से लिखी गई है। इनमें उत्तराधिकार प्रमाण पत्र जारी करने की निर्धारित अवधि 30 दिन बताई गई है।
लेकिन पंकज गुप्ता का कहना है कि छह महीने बीत जाने के बाद भी उनका उत्तराधिकार प्रमाण पत्र जारी नहीं हुआ, जिससे उन्हें लगातार आर्थिक और प्रशासनिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
उनका आरोप है कि सरकारी दावों और जमीनी हकीकत में जमीन-आसमान का अंतर है।
आवेदन गुम होने का आरोप, दूसरे आवेदन पर भी नहीं हुई कार्रवाई
कानूनगो कार्यालय में लंबित है मामला
पीड़ित का आरोप है कि पहला आवेदन कानूनगो कार्यालय में ही गायब हो गया। इसके बाद दूसरा आवेदन भी महीनों से लंबित पड़ा है।
पंकज गुप्ता का कहना है कि कई बार तहसील के चक्कर लगाने और अधिकारियों से गुहार लगाने के बावजूद उन्हें केवल आश्वासन ही मिला, लेकिन आज तक प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया।
मुख्यमंत्री जनता दर्शन में शिकायत करने की तैयारी
व्यवस्था से निराश पंकज गुप्ता ने अब सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जनता दर्शन कार्यक्रम में पहुंचकर पूरे मामले की शिकायत करने का फैसला किया है।
उनका कहना है कि जब सरकार ने उत्तराधिकार जैसी आवश्यक सेवा के लिए 30 दिन की समय-सीमा तय की है, तो आखिर छह महीने बाद भी प्रमाण पत्र जारी न होना किसकी जिम्मेदारी है?
पीड़ित का कहना है कि यदि समयबद्ध सेवाएं केवल कागजों और दीवारों तक सीमित रहेंगी, तो आम नागरिकों का शासन-प्रशासन से विश्वास उठ जाएगा।
उठ रहे हैं कई बड़े सवाल
इस पूरे मामले ने नवाबगंज तहसील की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं—
- क्या राजस्व विभाग की समयबद्ध सेवाएं केवल औपचारिकता बनकर रह गई हैं?
- पहला आवेदन आखिर कैसे गायब हो गया?
- दूसरे आवेदन पर भी छह महीने तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
- जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही कौन तय करेगा?
- क्या ऐसे मामलों में लापरवाही करने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई होगी?
अब देखना यह होगा कि पीड़ित की शिकायत के बाद जिला प्रशासन और राजस्व विभाग इस मामले में क्या कदम उठाते हैं।
रिपोर्ट – कामरान अल्वी











