Barabanki News: जिला अस्पताल और सतरिख पुलिस की संवेदनशील पहल से 14 दिनों से लापता कासगंज निवासी महिला अपने परिवार से मिल गई।
होमगार्ड पवन कुमार की सूझबूझ, जिला अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ की देखभाल से महिला सुरक्षित परिजनों को सौंप दी गई।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 13 जुलाई 2026
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संवेदनशीलता की एक प्रेरणादायक मिसाल देखने को मिली। जिला अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में कई दिनों से उपचाराधीन एक गुमशुदा महिला आखिरकार अपने परिवार से मिल गई। महिला की पहचान फूल बानो उर्फ किस्मतूल, पत्नी मोहम्मद साबिर, निवासी ग्राम गंगागढ़, पोस्ट गंगागढ़, तहसील सोरों, जनपद कासगंज के रूप में हुई।
सोमवार दोपहर करीब 12 बजे महिला के परिजन जिला अस्पताल पहुंचे। महिला को सुरक्षित देखकर उनके परिजनों की आंखें भर आईं। आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद महिला को सकुशल उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया।

होमगार्ड पवन कुमार की तत्परता से बची महिला की जान
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मानसिक रूप से अस्वस्थ महिला किसी तरह भटकते हुए बाराबंकी जिले के सतरिख थाना क्षेत्र पहुंच गई थी। सूचना मिलने पर सतरिख थाने में तैनात होमगार्ड पवन कुमार ने मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए बिना देर किए एंबुलेंस की व्यवस्था कर महिला को जिला अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया।
अस्पताल पहुंचने के बाद चिकित्सकों ने तत्काल उपचार शुरू किया और महिला की हालत में लगातार सुधार होता गया।
डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने परिवार की तरह की देखभाल
ट्रॉमा सेंटर में लगातार चलता रहा इलाज
जिला अस्पताल के डॉ. संदीप सहित चिकित्सकों की टीम ने महिला का लगातार उपचार किया। वहीं नर्सिंग स्टाफ ने भी पूरी जिम्मेदारी और समर्पण के साथ उनकी देखभाल की।
महिला की हालत सामान्य होने तक अस्पताल प्रशासन ने उन्हें हर आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई।
आधार कार्ड बना परिवार तक पहुंचने का जरिया
होमगार्ड पवन कुमार ने लगातार किया प्रयास
महिला के परिजनों तक पहुंचने में सबसे अहम भूमिका होमगार्ड पवन कुमार की रही। उन्होंने महिला के पास उपलब्ध आधार कार्ड में दर्ज पते के आधार पर परिवार से संपर्क स्थापित किया।
सूचना मिलते ही कासगंज से महिला के परिजन बाराबंकी पहुंचे और जिला अस्पताल में अपनी मां को सुरक्षित देखकर भावुक हो गए।
14 दिनों से लापता थीं महिला, लगातार तलाश कर रहा था परिवार
महिला के पुत्र मोहम्मद आमिर ने बताया कि उनकी मां पिछले करीब 14 दिनों से लापता थीं। मानसिक स्थिति ठीक न होने के कारण वह घर से निकल गई थीं और परिवार लगातार उनकी तलाश कर रहा था, लेकिन कोई सुराग नहीं मिल रहा था।
उन्होंने कहा कि बाराबंकी पुलिस, जिला अस्पताल के डॉक्टरों और पूरे स्टाफ की तत्परता की वजह से उनकी मां सुरक्षित मिल सकीं।
“यदि पुलिस और अस्पताल के कर्मचारी इतनी संवेदनशीलता नहीं दिखाते तो शायद हमारी मां का पता लगाना बहुत मुश्किल हो जाता। हम सभी का दिल से धन्यवाद करते हैं।”
सीएमएस बोले- हर लावारिस मरीज का परिवार की तरह होता है इलाज
जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) डॉ. जे.पी. मौर्य ने बताया कि अस्पताल में यदि कोई गुमशुदा या लावारिस अवस्था में मरीज लाया जाता है, तो उसका इलाज पूरी जिम्मेदारी और मानवीय संवेदनशीलता के साथ किया जाता है।
उन्होंने कहा कि मरीज की पहचान होने पर उसके परिजनों से संपर्क कर सुरक्षित उनके सुपुर्द किया जाता है। यही अस्पताल प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी भी है।

इन लोगों की भूमिका रही सराहनीय
महिला को परिवार से मिलाने में जिला अस्पताल पुलिस चौकी प्रभारी पप्पू यादव, दीवान हरविंदर सिंह, सतरिख थाने के होमगार्ड पवन कुमार, ट्रॉमा सेंटर के चिकित्सकों और पूरे अस्पताल स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
महिला के परिजनों ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी संवेदनशीलता ने एक बिखरे परिवार को फिर से जोड़ दिया।
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद / उस्मान अली










