बाराबंकी में आधार वेरिफिकेशन सिस्टम पर सवाल।
किसान की 13 बीघा जमीन का फर्जी आधार और फोटो के सहारे बैनामा कराने का आरोप।
पीड़ित की शिकायत पर SDM ने जांच के आदेश दिए। जानिए पूरा मामला।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 30 जून 2026
उत्तर प्रदेश सरकार ने फर्जी बैनामों, प्रतिरूपण (Impersonation) और भूमि संबंधी धोखाधड़ी पर रोक लगाने के लिए 1 अप्रैल 2026 से आधार आधारित प्रमाणीकरण (Aadhaar Authentication) व्यवस्था लागू की है। इस नई व्यवस्था में खरीदार, विक्रेता और गवाहों का आधार सत्यापन तथा बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण अनिवार्य किया गया है, ताकि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर होने वाले भूमि घोटालों पर अंकुश लगाया जा सके। लेकिन राजधानी लखनऊ से सटे बाराबंकी जिले में सामने आए एक मामले ने इस पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आरोप है कि जालसाजों ने किसी अन्य व्यक्ति को किसान बनाकर, फर्जी आधार कार्ड और फोटो के सहारे करीब 13 बीघा कृषि भूमि का फर्जी बैनामा करा दिया। हैरानी की बात यह है कि पीड़ित किसान को इसकी भनक तक नहीं लगी। करीब एक महीने बाद जब वह अपनी खतौनी निकलवाने तहसील पहुंचा, तब पूरे मामले का खुलासा हुआ। अब पीड़ित किसान ने एसडीएम, डीएम और पुलिस अधीक्षक से शिकायत कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
डेरेराजा गांव के किसान की 13 बीघा जमीन का फर्जी बैनामा
मामला सिरौली गौसपुर तहसील क्षेत्र के डेरेराजा गांव का है। गांव निवासी किसान बंशीलाल यादव ने प्रशासन को दिए शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि उनकी लगभग 13 बीघा कृषि भूमि का फर्जी तरीके से विक्रय पत्र तैयार कर 7 मई 2026 को उप निबंधक कार्यालय सिरौली गौसपुर में पंजीकृत करा दिया गया।
पीड़ित का कहना है कि उन्होंने अपनी जमीन किसी को नहीं बेची और न ही किसी प्रकार के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए। इसके बावजूद उनकी जानकारी के बिना ही जमीन का बैनामा हो गया।
दूसरे व्यक्ति को किसान बनाकर लगाया गया फर्जी फोटो और आधार
शिकायत के अनुसार, कृष्णावती पत्नी रामहरख, निवासी ग्राम चंदवारा, तहसील नवाबगंज के नाम यह फर्जी बैनामा कराया गया।
आरोप है कि इस पूरे खेल में जालसाजों ने बंशीलाल यादव के स्थान पर किसी अन्य व्यक्ति को प्रस्तुत किया। उसके नाम पर फर्जी आधार कार्ड, फोटो और अन्य कूटरचित दस्तावेज तैयार किए गए। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर उप निबंधक कार्यालय में विक्रय पत्र का पंजीकरण करा लिया गया।

इन लोगों पर लगाया फर्जीवाड़े में शामिल होने का आरोप
पीड़ित किसान ने शिकायत में आरोप लगाया है कि इस पूरे प्रकरण में कई लोगों की भूमिका रही।
शिकायत के मुताबिक, कृष्णावती के साथ गवाह के रूप में प्रमोद कुमार मिश्रा निवासी चंदवारा, सुशील कुमार निवासी रानी कटरा मजरा अगानपुर, विनोद कुमार वर्मा निवासी खेदरापुर थाना सफदरगंज तथा सुनील कुमार निवासी जंगलापुर मजरा सैदनपुर थाना सफदरगंज शामिल रहे।
किसान का आरोप है कि इन लोगों ने आपसी मिलीभगत से अधिवक्ता के माध्यम से कूटरचित विक्रय पत्र तैयार कराया और फर्जी व्यक्ति को प्रस्तुत कर रजिस्ट्री करवा दी।
खतौनी निकलवाने पर हुआ करोड़ों के खेल का खुलासा
पीड़ित किसान बंशीलाल यादव ने बताया कि उन्हें इस पूरे फर्जीवाड़े की जानकारी तब हुई जब किसी आवश्यक कार्य के चलते वह तहसील पहुंचे और अपनी जमीन की खतौनी निकलवाई।
खतौनी में अपनी भूमि किसी दूसरे व्यक्ति के नाम दर्ज देखकर उनके होश उड़ गए। इसके बाद उन्होंने पूरे मामले की जानकारी जुटाई तो पता चला कि उनकी जानकारी और सहमति के बिना ही उनकी जमीन का बैनामा कराया जा चुका है।
आधार प्रमाणीकरण व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
प्रदेश सरकार ने फर्जी बैनामों पर रोक लगाने के लिए आधार आधारित प्रमाणीकरण प्रणाली लागू की थी। इस व्यवस्था के तहत खरीदार, विक्रेता और गवाहों का आधार सत्यापन और बायोमेट्रिक मिलान अनिवार्य किया गया है।
ऐसे में बाराबंकी का यह मामला कई गंभीर सवाल खड़े करता है—
- यदि आधार और बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य था तो फर्जी व्यक्ति की पहचान कैसे स्वीकार कर ली गई?
- क्या उप निबंधक कार्यालय में आधार प्रमाणीकरण प्रक्रिया का सही तरीके से पालन नहीं हुआ?
- कहीं सिस्टम की तकनीकी खामी या अधिकारियों की लापरवाही का फायदा तो नहीं उठाया गया?
- क्या पूरे प्रकरण में रजिस्ट्री कार्यालय के अंदर बैठे किसी कर्मचारी या दलाल की मिलीभगत रही?
इन सवालों के जवाब अब जांच के बाद ही सामने आ सकेंगे।
एसडीएम ने दिए जांच के आदेश
पीड़ित किसान ने पूरे मामले की शिकायत उप जिलाधिकारी (एसडीएम), जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक से करते हुए दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत मिलने के बाद एसडीएम सिरौली गौसपुर ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं। राजस्व विभाग और संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की गई है।
अधिकारियों के चक्कर काटने को मजबूर किसान
करीब 13 बीघा कृषि भूमि के फर्जी बैनामे के बाद पीड़ित किसान न्याय की आस में अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर काट रहा है। किसान का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो उसकी पूरी जमीन पर अवैध कब्जे का खतरा पैदा हो जाएगा।
वहीं, इस घटना के बाद जिले में ऑनलाइन रजिस्ट्री प्रणाली, आधार सत्यापन व्यवस्था और उप निबंधक कार्यालय की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।
क्या है आधार आधारित बैनामा व्यवस्था?
उत्तर प्रदेश सरकार ने 1 अप्रैल 2026 से संपत्ति पंजीकरण प्रक्रिया में आधार आधारित प्रमाणीकरण लागू किया है। इसके तहत—
- खरीदार, विक्रेता और गवाहों का आधार सत्यापन अनिवार्य है।
- बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के बाद ही रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी होती है।
- उद्देश्य फर्जी बैनामों, प्रतिरूपण और भूमि घोटालों पर रोक लगाना है।
बाराबंकी का यह मामला बताता है कि व्यवस्था लागू होने के बावजूद यदि सत्यापन प्रक्रिया में लापरवाही हो या मिलीभगत हो, तो जमीन घोटाले अब भी संभव हैं।
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद











