बाराबंकी के हर्रई गांव में सामान्य मिट्टी खनन परमिट की आड़ में बड़े पैमाने पर अवैध खनन का मामला सामने आया हैं।
बाराबंकी एक्सप्रेस की पड़ताल में कई गाटों पर खनन की पुष्टि हुई। वीडियो और तस्वीरें भेजे जाने के बावजूद खनन माफिया पर मेहरबान दिखे अधिकारी।
कार्रवाई में ढिलाई के सवाल पर तहसीलदार ने दिया विवादित बयान।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 16 जून 2026
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई और जीरो टॉलरेंस नीति की बात करते हैं। इसके बावजूद राजधानी लखनऊ से सटे बाराबंकी जिले में अवैध मिट्टी खनन को लेकर ऐसे सवाल उठ रहे हैं, जो न केवल राजस्व विभाग और खनन विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाते हैं, बल्कि सरकारी राजस्व को संभावित नुकसान और प्रशासनिक जवाबदेही पर भी बहस छेड़ते हैं।
ताजा मामला नवाबगंज तहसील क्षेत्र के हर्रई गांव का है, जहां सामान्य मिट्टी खनन की अनुमति की आड़ में निर्धारित क्षेत्र से बाहर सरकारी और निजी भूमि पर बड़े पैमाने पर अवैध खनन किया गया हैं। ग्रामीणों का दावा है कि शिकायतों के बावजूद लंबे समय तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।


हर्रई गांव में परमिट की आड़ में अवैध खनन
खनन माफियाओं द्वारा हर्रई गांव के निवासी खुशीराम व शिवनाथ की भूमि (गाटा संख्या 207) पर “अभिषेक शर्मा” नाम के व्यक्ति के नाम सामान्य मिट्टी खनन का परमिट जारी कराया गया था। उसी परमिट की आड़ में लगभग आसपास की सरकारी व निजी जमीनों पर बड़े पैमाने पर धड़ल्ले से अवैध मिट्टी खनन किया जा रहा था। स्थानीय ग्रामीणों ने कई बार जिम्मेदार अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। शिकायत के बाद ग्रामीणों ने इसकी सूचना बाराबंकी एक्सप्रेस को दी।
बाराबंकी एक्सप्रेस के संवाददाता ने 17 मई 2026 को स्थानीय लेखपाल राकेश कुमार यादव को इसकी सूचना दी। लेखपाल ने रविवार होने का बहाना बनाते हुए सोमवार मौके पर जाकर देखने की बात कही। लेकिन सोमवार 18 मई 2026 को दोबारा बात की गई तो जनगणना के बस्ते बांटने के काम का बहाना कर दिया। शाम को पुनः जानकारी मांगी गई तो किसी जगह नपाई में व्यस्त होने की बात कही।

लेखपाल की लगातार टालमटोल से शंका
लेखपाल की लगातार टालमटोल से शंका होने पर बाराबंकी एक्सप्रेस की टीम ग्राम हर्रई पहुंची। मौके पर गाटा संख्या 207 के अलावा सरकारी जंगल/बंजर के तौर पर दर्ज गाटा संख्या 108 (रकबा 0.340 हेक्टेयर) व अगल-बगल के कई अन्य नंबरों—गाटा संख्या 226, 227, 231, 234, 222 व 254—पर बड़े पैमाने पर JCB और पोकलैंड मशीनों से अवैध खनन होता पाया गया।
संवाददाता ने इसकी सूचना नवाबगंज तहसील के तहसीलदार भूपेन्द्र विक्रम सिंह को उनके सीयूजी नंबर 9454416153 पर दी और व्हाट्सएप पर मौके पर हो रहे अवैध खनन की वीडियो भी भेजी। तहसीलदार ने कार्रवाई का आश्वासन दिया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

टीम पहुंची लेकिन कार्रवाई के नाम पर हुआ खेल
अगले दिन 19 मई 2026 को संवाददाता ने दोबारा तहसीलदार के सीयूजी नंबर पर अवैध खनन की तस्वीरें भेजीं। इसके बाद खनन अधिकारी शैलेन्द्र मौर्या, नायब तहसीलदार देवा अभिषेक दीक्षित और लेखपाल राकेश कुमार यादव मौके पर पहुंचे। लेकिन सख्त कार्रवाई के बदले खनन माफिया को राहत दिलाने का खेल शुरू हो गया।
सरकारी भूमि गाटा संख्या 108 पर अवैध मिट्टी खनन के चलते मजबूरी में देवा थाने में अभिषेक शर्मा के खिलाफ सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम 1984 के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया। लेकिन मौके पर अवैध मिट्टी खनन कर रही JCB और पोकलैंड मशीनों को हाथ भी नहीं लगाया गया और सिर्फ 4 डंपरों को ही सीज कर खानापूर्ति कर दी गई।

राजस्व रिपोर्ट में किन गाटाओं को शामिल किया, किन को गायब किया?
राजस्व विभाग की स्थलीय जांच रिपोर्ट में उल्लेख किया गया कि:
- बेहटा चक जयरामदास स्थित गाटा संख्या 594 के अंश भाग में लगभग 0.2000 हेक्टेयर क्षेत्रफल में बिना अनुमति खनन किया गया।
- ग्राम हर्रई स्थित गाटा संख्या 108 (बंजर/जंगल भूमि) पर लगभग 0.170 हेक्टेयर क्षेत्रफल में अवैध खनन पाया गया।
- प्रकरण में लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम की धारा 3(2) के अंतर्गत प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई जा रही है।
लेकिन ग्राम हर्रई की गाटा संख्या 226, 227, 231, 234, 222 व 244 पर बड़े पैमाने पर हुए अवैध मिट्टी खनन को रिपोर्ट से गायब कर दिया गया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इन सभी गाटों का वास्तविक सर्वे और मापन कराया जाए तो अवैध खनन की मात्रा कहीं अधिक निकल सकती है। इससे संभावित जुर्माने और राजस्व वसूली पर भी असर पड़ सकता है।
पहले बहानेबाजी फिर तहसीलदार का विवादित बयान
इसकी जानकारी होने पर जब संवाददाता ने दिनांक 25 मई 2026 को तहसीलदार भूपेन्द्र विक्रम सिंह को व्हाट्सएप पर ग्राम हर्रई की गाटा संख्या 207 व अन्य गाटाओं का नक्शा भेजकर राजस्व टीम द्वारा गलत रिपोर्ट तैयार किए जाने की बात बताई, तो तहसीलदार ने बताया कि वो खुद मौके पर जाकर मामले की जांच करेंगे। लेकिन इसके बाद वो अपनी व्यस्तता का बहाना बनाते रहें।


लगभग एक महीने का समय गुजर जाने के बाद जब दिनांक 16 जून 2026 को संवाददाता द्वारा उनके सीयूजी नंबर पर कॉल कर जानकारी चाही गई, तो तहसीलदार ने बताया कि मामले में मुकदमा दर्ज करवा दिया गया और जुर्माना लगाया गया है। अब इसके अलावा आप क्या कार्रवाई चाहते हैं।
लेकिन जब संवाददाता ने सवाल किया कि एक बड़े भू-भाग पर हुए अवैध मिट्टी खनन को रिपोर्ट में शामिल न कर सरकार को राजस्व का नुकसान और खनन माफिया को राहत प्रदान की गई है, तो तहसीलदार बिदक गए और यह कहते हुए फोन काट दिया—“आपकी व्यक्तिगत दुश्मनी के चलते हम किसी को फांसी नहीं चढ़ा सकते।”
खनन अधिकारी और तहसीलदार की टालमटोल
अहम बात यह भी है कि जिला खनन अधिकारी शैलेन्द्र मौर्या से लेकर तहसीलदार भूपेन्द्र विक्रम सिंह यह बताने में टालमटोल करते रहे कि अभिषेक शर्मा को ग्राम हर्रई की गाटा संख्या 207 पर कितने घनमीटर मिट्टी खनन की अनुमति प्रदान की गई थी? और उसके द्वारा गाटा संख्या 207 में कितने घनमीटर मिट्टी का खनन किया गया?
भूमाफिया से साठगांठ का संदेह
स्थानीय लोगों और जानकारों का कहना है कि मौजूदा समय में सरकार ने सामान्य मिट्टी खनन पर रॉयल्टी समाप्त कर दी है, लेकिन अवैध खनन के मामले में प्रति हेक्टेयर 5 लाख तक जुर्माने का प्रावधान है। लोगो का आरोप है कि खनन माफिया को भारी भरकम जुर्माने से बचाने के लिए अधिकारियों द्वारा आसपास के बड़े भू-भाग पर हुए अवैध खनन को स्थलीय रिपोर्ट में नहीं दर्शाया गया।
चर्चा इस बात की भी हो रही है कि खनन माफिया पर तहसील प्रशासन की यह मेहरबानी मुफ़्त में नहीं है, बल्कि इसके बदले मोटी रकम चुकाई जाती है। इसी के चलते पहले तो अधिकारी शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं करते और यदि करना भी पड़े तो कम से कम जुर्माना लगाकर मामला रफादफा कर दिया जाता हैं।


कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल
सूत्रों का यह भी दावा है कि हर्रई के अलावा तहसील क्षेत्र के कई स्थानों पर अवैध रूप से मिट्टी खनन की शिकायतें आये दिन सामने आती है। इसके बावजूद यदि प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है, तो जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है। लगातार हो रही शिकायतों के बावजूद सख्त कार्रवाई के बदले जिम्मेदार अधिकारियों की खानापूर्ति लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।
क्षेत्रवासियों की मांग: निष्पक्ष जांच, कठोर कार्रवाई और विशेष अभियान
क्षेत्रवासियों ने शासन और प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, अवैध खनन एवं परिवहन में संलिप्त लोगों की भूमिका की जांच करने तथा दोषी पाए जाने पर कठोर कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही सरकार को होने वाले संभावित राजस्व नुकसान को रोकने के लिए विशेष अभियान चलाने की भी मांग उठाई है।

विभागीय साठगांठ और राजस्व नुकसान
यह मामला केवल अवैध मिट्टी खनन और परिवहन तक सीमित नहीं है, बल्कि विभागीय साठगांठ, निगरानी तंत्र की विफलता और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने का भी गंभीर मामला साबित हो रहा है। अब पूरे प्रकरण में शासन-प्रशासन की कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद












