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Barabanki News: “शादी से पहले चेक कर लेना था कि पति नपुंसक है या नहीं” — महिला थानेदार की शर्मनाक टिप्पणी पर बवाल, पीड़िता ने एसपी से की शिकायत

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Barabanki News: बाराबंकी महिला थाना प्रभारी पर पीड़िता ने गंभीर आरोप लगाए।

विवाहिता का दावा है कि थानेदार ने कहा, “शादी से पहले चेक कर लेना था कि पति नपुंसक है।”

पीड़िता ने एसपी बाराबंकी से जांच और कार्रवाई की मांग की।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 01 अगस्त 2026

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले से महिला थाना पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़ा करने वाला मामला सामने आया है। अपने शिकायती प्रकरण की पैरवी करने महिला थाने पहुंची एक विवाहिता ने महिला थाना प्रभारी पर बेहद आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणी करने का आरोप लगाया है। पीड़िता का कहना है कि महिला थानेदार ने उसके वैवाहिक विवाद को गंभीरता से सुनने के बजाय कहा, “शादी से पहले चेक कर लेना था कि तुम्हारा पति नपुंसक है या नहीं।” इस कथित टिप्पणी से आहत महिला ने पुलिस अधीक्षक बाराबंकी अर्पित विजयवर्गीय को लिखित शिकायत देकर मामले की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है।

महिला थाने में शिकायत की पैरवी करने पहुंची थी पीड़िता

देवा थाना क्षेत्र की रहने वाली पीड़िता ने एसपी बाराबंकी को दिए शिकायती पत्र में बताया कि उसने 09 जुलाई 2026 को पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी। एसपी कार्यालय से यह प्रकरण सुलह-समझौते के लिए महिला थाना बाराबंकी भेज दिया गया।

पीड़िता के अनुसार, 01 अगस्त 2026 को वह अपने अधिवक्ता के साथ महिला थाने पहुंची, जहां दोनों पक्षों के बीच वार्ता कराई जा रही थी। इसी दौरान महिला थाना प्रभारी कुमारी रत्ना ने कथित रूप से कहा—

“तुम्हारा पति यदि नपुंसक था तो शादी से पहले चेक कर लेना था। चेक करके शादी करनी थी कि पति नपुंसक है या नहीं।”

पीड़िता का आरोप है कि यह टिप्पणी न केवल उसकी गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली थी, बल्कि एक जिम्मेदार पुलिस अधिकारी के पद की मर्यादा के भी विपरीत थी।

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“पति को कुर्सी पर बैठाया, मुझे खड़ा रखा” — पीड़िता का आरोप

पीड़िता ने अपनी शिकायत में यह भी आरोप लगाया कि महिला थाना प्रभारी ने पूरे समय उसके पति को सम्मानपूर्वक कुर्सी पर बैठाए रखा, जबकि उसे लगातार खड़ा रखा गया।

महिला का कहना है कि इस व्यवहार से उसे मानसिक पीड़ा और अपमान का सामना करना पड़ा। उसने आरोप लगाया कि महिला थाना प्रभारी पूरे मामले में निष्पक्ष रवैया अपनाने के बजाय उसके पति का पक्ष लेती नजर आईं।

पति के नपुंसक होने का लगाया आरोप

पीड़िता ने बताया कि उसकी शादी 10 मई 2026 को लखनऊ निवासी मेराज के साथ मुस्लिम रीति-रिवाज के अनुसार हुई थी। शादी के बाद वह लगभग आठ दिन तक ससुराल में रही, लेकिन इस दौरान पति ने उससे कोई वैवाहिक संबंध नहीं बनाए।

पीड़िता का आरोप है कि जब उसने इस बारे में पति से पूछा तो उसने स्वयं को नपुंसक बताया और कहा कि वह शारीरिक संबंध बनाने में सक्षम नहीं है। महिला का कहना है कि उसने पति को इलाज कराने की सलाह दी, लेकिन उसने शर्म का हवाला देकर इलाज कराने से इनकार कर दिया।

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परिवार पर धोखाधड़ी और दहेज हड़पने का आरोप

पीड़िता का आरोप है कि उसके पति और ससुराल पक्ष के अन्य सदस्य पहले से ही इस बात से परिचित थे कि युवक नपुंसक है, लेकिन यह तथ्य छिपाकर शादी कराई गई।

शिकायत में महिला ने आरोप लगाया है कि—

  • शादी में लगभग 7 लाख रुपये खर्च हुए।
  • उसके परिवार से 2 लाख रुपये नकद और जेवरात लिए गए।
  • ससुराल पक्ष ने धोखाधड़ी कर शादी की।
  • विरोध करने पर उसके और उसके भाई के साथ मारपीट की गई तथा जान से मारने की धमकी दी गई।

महिला ने यह भी कहा कि उसके भाई ने रिश्तेदारों से कर्ज लेकर शादी कराई थी और अब परिवार आर्थिक संकट से गुजर रहा है।

एसपी से कार्रवाई की मांग

पीड़िता ने पुलिस अधीक्षक बाराबंकी से मांग की है कि—

  • महिला थाना प्रभारी के कथित व्यवहार और टिप्पणी की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
  • उसके मूल प्रकरण में एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए।
  • उसे न्याय दिलाया जाए ताकि भविष्य में किसी अन्य महिला के साथ ऐसा व्यवहार न हो।
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फिलहाल इस मामले में पुलिस विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

मामले ने उठाए कई सवाल

यह मामला सामने आने के बाद कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं—

  • क्या महिला थाना में शिकायत लेकर पहुंचने वाली महिलाओं के साथ संवेदनशील व्यवहार किया जा रहा है?
  • यदि आरोप सही हैं, तो क्या एक जिम्मेदार पुलिस अधिकारी को इस तरह की टिप्पणी करना शोभा देता है?
  • क्या पीड़िता की शिकायत पर निष्पक्ष कार्रवाई होगी?

अब सभी की नजर पुलिस अधीक्षक कार्यालय की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।

रिपोर्ट – मंसूफ अहमद / अली चांद 

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Author: Kamran Alvi

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