बाराबंकी में बिना रजिस्ट्रेशन नंबर के दौड़ रहे ऑटो और ई-रिक्शा महिला सुरक्षा और रोड सेफ्टी के लिए बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं।
पूर्व घटनाओं के बावजूद ट्रैफिक पुलिस पर कार्रवाई न करने और लापरवाही के आरोप लग रहे हैं।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 27 मई 2026
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में बिना रजिस्ट्रेशन नंबर के सड़कों पर दौड़ रहे ऑटो और ई-रिक्शा अब आम जनता, खासकर महिलाओं और युवतियों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं। जिले में लगातार सामने आ रही घटनाओं के बावजूद ट्रैफिक पुलिस और जिम्मेदार विभाग ऐसे वाहनों पर प्रभावी कार्रवाई करने में विफल नजर आ रहे हैं।
स्थिति यह है कि शहर से लेकर कस्बों तक दर्जनों ऑटो और ई-रिक्शा बिना नंबर प्लेट के बेखौफ सड़कों पर फर्राटा भरते दिखाई देते हैं। पुलिस चौकी, थाना और ट्रैफिक पिकेट के सामने से गुजरने के बावजूद इन पर कार्रवाई नहीं होती, जिससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।
शहाबपुर घटना के बाद भी नहीं जागा प्रशासन
कुछ दिन पहले मसौली थाना क्षेत्र के शहाबपुर इलाके में एक महिला के साथ ऑटो चालक द्वारा कथित अभद्रता का मामला सामने आया था। बताया गया कि महिला देर रात अस्पताल से लौट रही थी, तभी ऑटो चालक ने उसके साथ गलत व्यवहार किया।
पीड़िता ने पुलिस से शिकायत की, लेकिन ऑटो पर रजिस्ट्रेशन नंबर न होने के कारण पुलिस आज तक आरोपी चालक को ट्रेस नहीं कर सकी। इस घटना ने महिला सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी थी।

चलते ई-रिक्शा में युवती से रेप की कोशिश का मामला भी आया था सामने
इससे पहले नगर कोतवाली क्षेत्र में भी एक सनसनीखेज मामला सामने आया था, जहां ई-रिक्शा चालक और उसके साथियों पर चलती गाड़ी में युवती से रेप का प्रयास करने का आरोप लगा था।
जान बचाने और अपनी आबरू बचाने के लिए युवती को चलते ई-रिक्शा से छलांग लगानी पड़ी थी। बाद में पुलिस ने रास्ते में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालकर ई-रिक्शा के रजिस्ट्रेशन नंबर के जरिए आरोपियों को ट्रेस कर गिरफ्तार किया था।
इस घटना के बाद जिले में बिना नंबर वाले वाहनों पर सख्ती की मांग तेज हुई थी, लेकिन हालात अब भी जस के तस बने हुए हैं।

“वसूली के कारण कार्रवाई नहीं” — स्थानीय लोगों का आरोप
स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि ट्रैफिक पुलिस की लापरवाही और कथित वसूली व्यवस्था के कारण बिना नंबर प्लेट वाले ऑटो और ई-रिक्शा पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है।
लोगों का कहना है कि रोजाना बड़ी संख्या में ऐसे वाहन पुलिस पिकेट और ट्रैफिक चेकिंग प्वाइंट के सामने से गुजरते हैं, लेकिन पुलिसकर्मी उन्हें रोकना तक जरूरी नहीं समझते।
ऐसे में यदि किसी महिला उत्पीड़न, दुर्घटना या आपराधिक घटना में इन वाहनों का इस्तेमाल होता है तो पुलिस के लिए आरोपियों तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो जाता है।

शासन के आदेशों का भी नहीं हो रहा पालन
रोड सेफ्टी के लिए काम करने वाले फतेहाबाद निवासी सोशल एक्टिविस्ट अजय सिंह वर्मा ने बताया कि उन्होंने कई बार इस संबंध में शिकायतें कीं, लेकिन जिम्मेदार विभागों की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
उन्होंने बताया कि शासन की ओर से आदेश जारी किया गया था कि सभी ई-रिक्शा और ऑटो पर वाहन स्वामी का नाम, मोबाइल नंबर, रजिस्ट्रेशन नंबर, महिला हेल्पलाइन 1090 और आपातकालीन सेवा 112 का नंबर पेंट से लिखना अनिवार्य होगा।
लेकिन आदेश जारी होने के दो साल बाद भी इसका पालन नहीं कराया जा सका है।
जिले में 8000 वाहनों में सिर्फ 600 पर ही अंकित हुई जानकारी
जानकारी के अनुसार जिले में करीब 8000 ई-रिक्शा और ऑटो संचालित हो रहे हैं, लेकिन इनमें से मात्र 600 वाहनों पर ही आवश्यक सूचनाओं का अंकन किया गया है।
यानी हजारों वाहन अब भी बिना पहचान और बिना सुरक्षा मानकों के सड़कों पर दौड़ रहे हैं, जो आम लोगों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकते हैं।
महिला सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
लगातार सामने आ रही घटनाओं और बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों की बढ़ती संख्या ने बाराबंकी में महिला सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने सख्त कदम नहीं उठाए तो भविष्य में और गंभीर घटनाएं सामने आ सकती हैं।
लोगों ने मांग की है कि बिना रजिस्ट्रेशन नंबर वाले सभी ऑटो और ई-रिक्शा के खिलाफ विशेष अभियान चलाकर कार्रवाई की जाए और शासन के सुरक्षा संबंधी आदेशों का कड़ाई से पालन कराया जाए।
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद
















