बाराबंकी में 14 वर्षीय हर्षवर्धन तिवारी की सड़क हादसे में मौत के बाद आंदोलनकारी अधिवक्ता रितेश कुमार मिश्र ने डीएम को जनहित ज्ञापन सौंपा।
शहर में भारी वाहनों पर रोक, स्कूलों के पास पुलिस तैनाती और डिवाइडर निर्माण की मांग उठाई गई।

बाराबंकी , उत्तर प्रदेश | 11 जुलाई 2026
बाराबंकी में लगातार बढ़ रही सड़क दुर्घटनाओं और हाल ही में स्कूली छात्र हर्षवर्धन तिवारी की दर्दनाक मौत के बाद जनआक्रोश सामने आने लगा है। स्वर्गीय अवध बिहारी मिश्र सेवा ट्रस्ट के ट्रस्टी एवं आंदोलनकारी अधिवक्ता रितेश कुमार मिश्र ने सड़क सुरक्षा को लेकर जिलाधिकारी बाराबंकी के नाम एक जनहित ज्ञापन सौंपते हुए शहर में भारी वाहनों की आवाजाही पर सख्त नियंत्रण, स्कूलों के आसपास पुलिस व्यवस्था और दुर्घटना संभावित स्थलों पर डिवाइडर निर्माण जैसी कई महत्वपूर्ण मांगें उठाई हैं।
ज्ञापन जिलाधिकारी को संबोधित था, जिसे उनके प्रतिनिधि एवं उपजिलाधिकारी विवेक शील यादव को सौंपा गया। अधिवक्ता का कहना है कि यदि प्रशासन समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाता तो भविष्य में भी ऐसे दर्दनाक हादसे होते रहेंगे।

हर्षवर्धन की दर्दनाक मौत के बाद उठी सड़क सुरक्षा की मांग
आंदोलनकारी अधिवक्ता रितेश कुमार मिश्र ने बताया कि 7 जुलाई 2026 को माल गोदाम के पास ट्रक की चपेट में आने से 14 वर्षीय हर्षवर्धन तिवारी की मौत ने पूरे जनपद को झकझोर दिया। हर्षवर्धन बंकी नई बस्ती स्थित ओम नगर निवासी चंद्रिका प्रसाद तिवारी का इकलौता पुत्र था और वह साइकिल से किंग जॉर्ज स्कूल जा रहा था। रास्ते में तेज रफ्तार ट्रक ने उसे कुचल दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
उन्होंने कहा कि यह केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम है। यदि शहर में भारी वाहनों की आवाजाही नियंत्रित होती और स्कूल समय में सुरक्षा व्यवस्था होती, तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था।

शहर में भारी वाहनों के कारण बढ़ रहा हादसों का खतरा
ज्ञापन में कहा गया है कि पिछले कुछ समय से बाराबंकी में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन की ओर से प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
रितेश कुमार मिश्र ने आरोप लगाया कि रेलवे स्टेशन के निकट स्थित फर्टिलाइजर रैक प्वाइंट, हाईवे पर ‘नो एंट्री’ खुलने से पहले भारी वाहनों का जमावड़ा, तथा देवा रोड स्थित फैक्ट्रियों के आसपास ट्रकों की अनियंत्रित आवाजाही शहर की यातायात व्यवस्था को पूरी तरह प्रभावित कर रही है। इससे आम नागरिकों, विशेषकर स्कूली बच्चों की जान जोखिम में पड़ रही है।
जनहित में रखीं ये प्रमुख मांगें
जनहित ज्ञापन में सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन से निम्नलिखित मांगें की गईं—
- शहर की आबादी वाले क्षेत्रों में सुबह 6 बजे से 10 बजे तक भारी वाहनों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।
- दुर्घटना संभावित एवं व्यस्त मार्गों पर डिवाइडर का शीघ्र निर्माण कराया जाए।
- सुबह 6 बजे से 9 बजे तक स्कूल जाने वाले बच्चों की सुरक्षा के लिए प्रमुख चौराहों एवं स्कूलों के आसपास पुलिस बल की तैनाती सुनिश्चित की जाए।
- हाईवे पर ‘नो एंट्री’ शुरू होने से पहले सड़कों पर लगने वाले भारी वाहनों के जमावड़े को तत्काल समाप्त कराया जाए।
- शहर में यातायात प्रबंधन को प्रभावी बनाकर सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाया जाए।
“अब और मासूमों की जान नहीं जानी चाहिए”
रितेश कुमार मिश्र ने कहा कि हर्षवर्धन की मौत की भरपाई कभी नहीं की जा सकती, लेकिन यदि प्रशासन इस घटना से सबक लेकर ठोस कदम उठाता है तो भविष्य में कई परिवारों को ऐसी त्रासदी से बचाया जा सकता है। उन्होंने जिला प्रशासन से सड़क सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की अपील की।
ज्ञापन सौंपने के दौरान ये लोग रहे मौजूद
ज्ञापन सौंपने के दौरान आंदोलनकारी अधिवक्ता रितेश कुमार मिश्र के साथ रितेश कुमार, पवन मिश्र, रजनीश शुक्ला, दिवाकर सिंह, ज्ञान शुक्ला, बलराम यादव, शकील, खुर्शीद खां, राहुल सैनी, अनिल शुक्ला, श्रवण पाल, विष्णु शुक्ला, सूरज कनौजिया, रईस कादरी, शाकिब, नमिता जैन सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद











