विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सुभासपा प्रमुख ओमप्रकाश राजभर ने फेसबुक पोस्ट के जरिए अखिलेश यादव पर गंभीर आरोप लगाए।
कार्यकर्ताओं से कथित वसूली, फोटो और मुलाकात के लिए रेट तय होने तथा 900 गुना संपत्ति बढ़ने का आरोप लगाकर यूपी की राजनीति में हलचल मचा दी।

लखनऊ, उत्तर प्रदेश | 10 जुलाई 2026
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 की आहट के साथ ही सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है। इसी बीच योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर सोशल मीडिया के जरिए बेहद गंभीर आरोप लगाकर प्रदेश की राजनीति में नया भूचाल ला दिया है।
राजभर ने अपने आधिकारिक फेसबुक अकाउंट पर एक लंबी पोस्ट लिखते हुए दावा किया कि समाजवादी पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं ने उनसे मुलाकात कर अखिलेश यादव से मिलने के लिए कथित तौर पर पैसे वसूले जाने की शिकायत की है। इतना ही नहीं, उन्होंने अखिलेश यादव की संपत्ति में 900 गुना बढ़ोतरी का भी जिक्र करते हुए कई तीखे सवाल खड़े किए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और समाचार लिखे जाने तक समाजवादी पार्टी की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।
‘मित्र अखिलेश यादव जी…’ से शुरू हुई पोस्ट, फिर लगाए गंभीर आरोप
ओमप्रकाश राजभर ने अपनी फेसबुक पोस्ट की शुरुआत “मित्र अखिलेश यादव जी” संबोधन से की। उन्होंने लिखा कि समाजवादी पार्टी के कुछ कार्यकर्ता किसी निजी कार्य से उनके पास आए थे। बातचीत के दौरान वे अखिलेश यादव की तारीफ करते हुए कहने लगे कि यदि उनकी सरकार बन गई तो “मौज आ जाएगी”, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने अपनी एक पीड़ा भी साझा की।
राजभर के मुताबिक, कार्यकर्ताओं ने उनसे कहा कि वे सीधे अखिलेश यादव से अपनी शिकायत नहीं कर सकते, इसलिए उन्होंने यह बात उन्हें बताई ताकि वह मित्र होने के नाते अखिलेश यादव तक यह संदेश पहुंचा सकें।

‘फोटो खिंचवाने का ₹5 हजार, हाथ मिलाने का ₹10 हजार’ – राजभर का दावा
ओमप्रकाश राजभर ने अपनी पोस्ट में दावा किया कि समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने उनसे आरोप लगाया कि अखिलेश यादव से मिलने के लिए उनके आसपास मौजूद लोग कथित तौर पर पैसे वसूलते हैं।
राजभर ने पोस्ट में लिखा कि कार्यकर्ताओं के अनुसार—
- अखिलेश यादव के साथ फोटो खिंचवाने के लिए ₹5,000 लिए जाते हैं।
- हाथ मिलवाने के लिए ₹8,000 से ₹10,000 तक की मांग की जाती है।
- जबकि मुलाकात करवाने का “अलग हिसाब-किताब” चलता है।
उन्होंने तंज कसते हुए लिखा कि यदि अपनी ही बिरादरी के कार्यकर्ताओं से ऐसा व्यवहार हो रहा है तो अन्य लोगों से कितना पैसा लिया जाता होगा।
‘900 गुना संपत्ति बढ़ने के बाद भी एक्स्ट्रा इनकम क्यों?’
राजभर ने अपने फेसबुक पोस्ट में अखिलेश यादव की संपत्ति को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने लिखा कि जब उनकी संपत्ति में कथित रूप से 900 गुना बढ़ोतरी हो चुकी है तो फिर कार्यकर्ताओं से कथित वसूली कराने की जरूरत आखिर क्यों पड़ रही है?
उन्होंने लिखा कि अगर यह वसूली स्वयं अखिलेश यादव की जानकारी में हो रही है तो यह बेहद गंभीर बात है और यदि उनके आसपास मौजूद लोग ऐसा कर रहे हैं तो उन्हें तत्काल हस्तक्षेप कर इसे बंद कराना चाहिए।
’20 रुपये चंदा मांगकर कार्यकर्ताओं को मूर्ख मत बनाइए’
राजभर ने अपनी पोस्ट में समाजवादी पार्टी की सदस्यता और चंदा अभियान पर भी निशाना साधा। उन्होंने लिखा कि एक तरफ कार्यकर्ताओं से 20 रुपये चंदा मांगा जाता है और दूसरी ओर कथित तौर पर मुलाकात और फोटो के नाम पर हजारों रुपये वसूले जाते हैं।
उन्होंने लिखा कि यह व्यवस्था यदि बंद नहीं हुई तो पार्टी को राजनीतिक रूप से बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।
‘हार तो वैसे भी रहे हैं, यह सिस्टम और डुबो देगा’
ओमप्रकाश राजभर ने अपनी पोस्ट में भविष्य की राजनीति को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने लिखा कि यदि कथित वसूली का यह सिस्टम जारी रहा तो समाजवादी पार्टी के लिए आने वाला विधानसभा चुनाव और कठिन हो सकता है।
उन्होंने लिखा कि जनता तो जवाब देगी ही, लेकिन सबसे ज्यादा नाराज वही कार्यकर्ता होंगे जो खुद को प्रताड़ित और शोषित महसूस कर रहे हैं।
राजभर ने यह भी लिखा कि यदि यह व्यवस्था बंद हो गई तो उन्हें अगले चुनाव में एक मजबूत विपक्ष मिलेगा, लेकिन यदि यही चलता रहा तो नेता प्रतिपक्ष बनने लायक सीटें भी मिलना मुश्किल हो सकता है।
चुनावी माहौल में तेज हुई सियासी जंग
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सभी राजनीतिक दल अपनी रणनीति बनाने में जुटे हैं। ऐसे समय में ओमप्रकाश राजभर की यह फेसबुक पोस्ट राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनाव नजदीक आने के साथ नेताओं के बीच इस तरह की बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।
हालांकि, समाचार लिखे जाने तक समाजवादी पार्टी या अखिलेश यादव की ओर से ओमप्रकाश राजभर के आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। यदि इस मामले में कोई बयान जारी होता है तो समाचार को अपडेट किया जाएगा।
रिपोर्ट – नौमान माजिद
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