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बाराबंकी में राजस्व विभाग का हैरतअंगेज कारनामा: गलत एंट्री से किसान की जमीन पर कब्जे का खतरा, 2 महीने से न्याय के लिए भटक रहा पीड़ित  

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बाराबंकी के फतेहपुर तहसील के सदरापुर गांव में खतौनी की गलती से किसान की जमीन गलत तरीके से बेच दी गई।

पीड़ित 2 महीने से न्याय के लिए भटक रहा है, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

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बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 27 अप्रैल 2026

जनपद बाराबंकी से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने न केवल राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि प्रशासनिक तंत्र की जवाबदेही को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। फतेहपुर तहसील के ग्राम सदरापुर (मजरा गयंदपुरवा) में एक किसान को अभिलेखीय त्रुटि का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है, जबकि वह पिछले दो महीनों से न्याय के लिए दर-दर भटक रहा है।

1994 के बैनामे के बावजूद किसान की जमीन पर संकट

2/3 हिस्से की वैध खरीद, फिर भी विवाद

ग्राम सदरापुर निवासी बैजनाथ वर्मा के अनुसार, गाटा संख्या 351/2 (कुल रकबा 0.573 हेक्टेयर) मूल रूप से खुशीराम के तीन पुत्रों—नंदकिशोर, रामलखन और मुकुंदीलाल—की संयुक्त संपत्ति थी। प्रत्येक का एक-तिहाई हिस्सा था।

वर्ष 1994 में बैजनाथ वर्मा ने नंदकिशोर और रामलखन से उनके हिस्से (कुल 2/3 भूमि) का विधिवत पंजीकृत बैनामा अपने नाम कराया। इसके बाद से वह लगातार उस भूमि पर खेती करते आ रहे हैं।

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2025 में खतौनी की गलती से खड़ा हुआ विवाद

1/3 हिस्सेदार ने बेच दी आधी जमीन

विवाद तब शुरू हुआ जब वर्ष 2025 में मुकुंदीलाल, जिनका वास्तविक हिस्सा केवल 1/3 था, ने कथित रूप से अपनी सीमा से अधिक भूमि बेच दी। आरोप है कि उन्होंने लगभग आधी जमीन गुलाब सिंह के नाम कर दी।

यह पूरा मामला तहसील स्तर पर हुई गंभीर अभिलेखीय त्रुटि के कारण संभव हुआ। खतौनी में वास्तविक हिस्सेदारी (2/3 और 1/3) के बजाय गलत तरीके से 1/2-1/2 दर्ज कर दी गई, जिसका फायदा उठाकर पीड़ित की जमीन भी विक्रय में शामिल कर ली गई।

जबरन कब्जे की कोशिश और बढ़ता तनाव

पीड़ित को दी जा रही धमकियां

पीड़ित बैजनाथ वर्मा का आरोप है कि जमीन खरीदने वाले गुलाब सिंह लगातार खेत पर आकर दबाव बना रहे हैं और जबरन कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्हें धमकियां दी जा रही हैं, जिससे गांव में तनाव की स्थिति बन गई है।

शिकायतों के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई

IGRS और अधिकारियों को कई बार दी शिकायत

पीड़ित के अनुसार, पिछले दो महीनों में उन्होंने तहसील प्रशासन को कई प्रार्थना पत्र दिए और सभी दस्तावेज प्रस्तुत किए, लेकिन न तो अंश निर्धारण किया गया और न ही खतौनी की त्रुटि सुधारी गई।

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इसके अलावा IGRS पोर्टल पर भी 05 मार्च, 04 अप्रैल और 10 अप्रैल 2026 को शिकायतें दर्ज कराई गईं, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

DM, SP को ईमेल के बाद भी नहीं मिला न्याय

पीड़ित ने 13 अप्रैल 2026 को जिलाधिकारी, अपर जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को ईमेल के जरिए पूरे मामले की जानकारी दी थी। इसके बाद 26 अप्रैल को फिर से विस्तृत शिकायत भेजी गई, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

RTI का जवाब नहीं, FIR भी दर्ज नहीं

प्रशासनिक उदासीनता पर सवाल

सूचना का अधिकार (RTI) के तहत दिए गए आवेदनों पर भी कोई जवाब नहीं मिला है। वहीं, मामले में धोखाधड़ी, जालसाजी और धमकी जैसे गंभीर आरोप होने के बावजूद अभी तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।

पीड़ित की मांग—तत्काल FIR और जमीन पर यथास्थिति

पीड़ित ने प्रशासन से मांग की है कि:

  • आरोपियों के खिलाफ तत्काल FIR दर्ज की जाए
  • निष्पक्ष जांच कराई जाए
  • जमीन पर यथास्थिति बनाए रखी जाए
  • जबरन कब्जे के प्रयास को रोका जाए
  • खतौनी में सुधार और अंश निर्धारण कराया जाए
  • पूर्व शिकायतों पर कार्रवाई की रिपोर्ट दी जाए
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एक किसान की लड़ाई या सिस्टम की नाकामी?

यह मामला सिर्फ एक किसान की जमीन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक लापरवाही, राजस्व अभिलेखों की विश्वसनीयता और न्याय व्यवस्था की गति पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह विवाद कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।

रिपोर्ट – मंसूफ अहमद 

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Author: Kamran Alvi

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