बाराबंकी के सिद्धौर में IGRS शिकायतों के कथित फर्जी निस्तारण का मामला सामने आया है।
सार्वजनिक रास्ते पर अवैध कब्जे के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई, जिससे प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठे हैं।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 20 अप्रैल 2026
जनपद के नगर पंचायत सिद्धौर के लम्बौआ वार्ड में सार्वजनिक भूमि पर अवैध कब्जे का मामला अब प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल बन गया है।
स्थानीय निवासी अक्षय कुमार पाण्डेय का आरोप है कि गाटा संख्या 1718, जो राजस्व अभिलेखों में सार्वजनिक मार्ग के रूप में दर्ज है, उस पर कई लोगों ने कब्जा कर स्थायी और अस्थायी निर्माण कर लिया है।
इस अतिक्रमण के चलते आम लोगों का रास्ता बाधित हो रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग मूकदर्शक बने हुए हैं।
पैमाइश हुई, नोटिस भी जारी… लेकिन कार्रवाई ‘जीरो’
शिकायतकर्ता ने बताया कि उन्होंने IGRS पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद राजस्व और नगर पंचायत टीम ने मौके पर पहुंचकर पैमाइश और चिन्हांकन किया।
अतिक्रमणकारियों को नोटिस भी भेजा गया—लेकिन इसके बाद पूरा मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
जमीन पर कब्जा जस का तस है, जबकि कागजों में कार्रवाई पूरी दिखा दी गई।

‘फर्जी निस्तारण’ का आरोप—कागजों में न्याय, जमीन पर अन्याय
सबसे गंभीर आरोप यह है कि बिना अतिक्रमण हटाए ही शिकायत को IGRS पोर्टल पर निस्तारित दिखा दिया गया।
यानी, सिस्टम ने कागजों में समस्या खत्म कर दी—लेकिन हकीकत में समस्या आज भी जिंदा है।
यह मामला सीधे-सीधे प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
क्या CM डैशबोर्ड की रैंकिंग सुधारने का खेल?
शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस तरह के “कागजी निस्तारण” के जरिए जिले की रैंकिंग मुख्यमंत्री डैशबोर्ड पर बेहतर दिखाई जाती है।
यानी सिस्टम का फोकस समस्या हल करने पर नहीं, बल्कि आंकड़े सुधारने पर ज्यादा नजर आता है।
अगर यह आरोप सही हैं, तो यह सिर्फ एक शिकायत नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल है।

जिम्मेदार अधिकारियों पर मिलीभगत के आरोप
नगर पंचायत सिद्धौर के अधिशासी अधिकारी आशुतोष त्रिपाठी और राजस्व विभाग पर भी सवाल उठे हैं।
आरोप है कि अधिकारी केवल औपचारिकता निभाते हुए नापजोख और नोटिस जारी कर देते हैं, लेकिन अतिक्रमण हटाने की ठोस कार्रवाई से बचते हैं।
इससे यह संदेह भी पैदा हो रहा है कि कहीं इस पूरे मामले में लापरवाही से ज्यादा कुछ और तो नहीं?
पहले भी उठ चुके हैं ऐसे ही सवाल
जनपद में यह पहला मामला नहीं है।
IGRS पोर्टल पर शिकायतों के कथित फर्जी निस्तारण के सैकड़ों आरोप पहले भी सामने आ चुके हैं।
हाल ही मे जनपद के एक वरिष्ठ पत्रकार द्वारा हरख ब्लॉक की बीडीओ प्रीति वर्मा और सचिव संस्कृति भटनागर की भ्रष्ट कार्यशैली को लेकर की गई शिकायत का भी जिला पंचायत राज अधिकारी नीतेश भोंडले ने फर्जी निस्तारण कर दिया, जबकि समस्या आज भी जस की तस बनी हुई है।
इस तरह के एक दो नहीं बल्कि सैकड़ों मामले है जहां बिना संतोषजनक कार्रवाई के ही शिकायतों को बंद कर दिया गया, जिससे आम लोगों का भरोसा सिस्टम पर लगातार कमजोर हो रहा है।

जनता पूछ रही—कहां जाएं, किससे न्याय मांगे?
इस पूरे घटनाक्रम के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर ऑनलाइन शिकायत प्रणाली भी सिर्फ कागजी साबित हो रही है, तो आम जनता अपनी समस्याएं लेकर कहां जाए?
जो पोर्टल जनता को त्वरित न्याय देने के लिए बनाया गया था, वही अगर औपचारिकता बनकर रह जाए, तो यह व्यवस्था की विफलता को दर्शाता है।
निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग
पीड़ित ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, सार्वजनिक रास्ते से अतिक्रमण हटाने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
साथ ही यह भी मांग उठ रही है कि IGRS पोर्टल पर शिकायतों के निस्तारण की स्वतंत्र समीक्षा कराई जाए, ताकि भविष्य में इस तरह के मामलों पर रोक लग सके।
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद














