Barabanki News: त्रिवेदीगंज ब्लॉक में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कोरियानी और आयुष्मान हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर रामनगर दोपहर में बंद मिले।
मरीजों को बिना इलाज लौटना पड़ा। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली पर सवाल उठाए।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 23 जुलाई 2026
उत्तर प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। आयुष्मान भारत हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से गांव-गांव तक गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाने के दावे किए जाते हैं। लेकिन बाराबंकी जिले के त्रिवेदीगंज विकासखंड की जमीनी हकीकत इन सरकारी दावों पर सवाल खड़े कर रही है।
शनिवार को की गई पड़ताल में दो सरकारी स्वास्थ्य केंद्र निर्धारित समय में बंद मिले। केंद्रों पर न डॉक्टर मौजूद थे, न स्वास्थ्य कर्मचारी और न ही मरीजों के इलाज की कोई व्यवस्था दिखाई दी। इससे इलाज कराने पहुंचे मरीजों को मायूस होकर वापस लौटना पड़ा।
दोपहर एक बजे बंद मिला प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कोरियानी
स्थानीय स्तर पर की गई पड़ताल के दौरान प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) कोरियानी दोपहर करीब 1:00 बजे पूरी तरह बंद मिला। अस्पताल के मुख्य गेट पर ताला लटका हुआ था। परिसर में न कोई चिकित्सक दिखाई दिया, न फार्मासिस्ट और न ही अन्य स्वास्थ्यकर्मी मौजूद मिले।
इलाज के लिए पहुंचे मरीज काफी देर तक इंतजार करते रहे, लेकिन जब कोई कर्मचारी नहीं पहुंचा तो उन्हें बिना उपचार कराए वापस लौटना पड़ा। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसी स्थिति यहां अक्सर देखने को मिलती है।
आयुष्मान हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर रामनगर पर भी लटका मिला ताला
इसके बाद आयुष्मान भारत हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर, रामनगर का निरीक्षण किया गया। यहां भी करीब 1:10 बजे केंद्र बंद मिला। केंद्र के बाहर और परिसर में गंदा पानी भरा हुआ था, जिससे साफ-सफाई व्यवस्था की पोल खुलती नजर आई।
केंद्र पर न कोई स्वास्थ्यकर्मी मौजूद था और न ही मरीजों के इलाज की कोई व्यवस्था दिखाई दी। सरकार द्वारा संचालित इस स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति देखकर ग्रामीणों में नाराजगी देखने को मिली।
बरसात में बढ़ रहे मरीज, लेकिन स्वास्थ्य केंद्रों पर ताले
ग्रामीणों ने बताया कि बरसात के मौसम में क्षेत्र में वायरल बुखार, सर्दी-जुकाम, डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे समय में यदि सरकारी स्वास्थ्य केंद्र ही समय पर संचालित नहीं होंगे, तो गरीब और जरूरतमंद लोगों को मजबूरन निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ेगा।
ग्रामीणों का कहना है कि निजी अस्पतालों में इलाज का खर्च वहन करना हर परिवार के लिए संभव नहीं है। इसलिए सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का नियमित संचालन बेहद आवश्यक है।
बजट मिलने के बावजूद बदहाल व्यवस्था पर उठे सवाल
ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब सरकार स्वास्थ्य केंद्रों के संचालन, रखरखाव और साफ-सफाई के लिए नियमित बजट उपलब्ध करा रही है, तो फिर अस्पतालों में ताले क्यों लटके रहते हैं।
लोगों का कहना है कि परिसर में जलभराव, गंदगी और कर्मचारियों की अनुपस्थिति जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही को दर्शाती है। यदि समय रहते व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो आम जनता का सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं से भरोसा उठ जाएगा।
अधीक्षक बोले- कर्मचारियों से मांगा जाएगा स्पष्टीकरण
मामले में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र त्रिवेदीगंज के अधीक्षक से दूरभाष पर संपर्क किया गया। उन्होंने बताया कि मामला उनके संज्ञान में आया है।
उन्होंने कहा कि संबंधित कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा और जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
बड़ा सवाल—कब सुधरेगी त्रिवेदीगंज की स्वास्थ्य व्यवस्था?
सरकार ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लगातार दावे कर रही है, लेकिन त्रिवेदीगंज के सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों की तस्वीर इन दावों की हकीकत बयां कर रही है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकारी स्वास्थ्य योजनाएं केवल कागजों तक सीमित रहेंगी, या फिर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होगी? यह सवाल क्षेत्र की जनता लगातार उठा रही है।
रिपोर्ट – मंसूफ़ अहमद












