Barabanki News: लखनऊ-सुल्तानपुर हाईवे हादसे में घायल सिपाही गौरव यादव पहले ही अभद्रता के आरोप में एसपी द्वारा लाइन हाजिर किए जा चुके थे।
अब सवाल उठ रहा है कि लाइन हाजिर सिपाही लोनीकटरा थाने की दबिश टीम में कैसे शामिल हुआ? जानिए पूरा मामला।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 23 जुलाई 2026
बाराबंकी जिले के लोनीकटरा थाना क्षेत्र में लखनऊ-सुल्तानपुर हाईवे पर हुए सड़क हादसे ने अब पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे में घायल हुए तीन पुलिसकर्मियों में शामिल सिपाही गौरव कुमार यादव वही पुलिसकर्मी हैं, जिन्हें कुछ दिन पहले ही सीओ की जांच में दोषी पाए जाने के बाद पुलिस अधीक्षक के आदेश पर लाइन हाजिर किया गया था।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब गौरव यादव पुलिस लाइन से संबद्ध (लाइन हाजिर) थे, तो वह लोनीकटरा थाने की दबिश टीम में कैसे शामिल हुए? आखिर किसके आदेश पर उन्हें थाने से ऑपरेशन में भेजा गया? अब यह मामला सड़क हादसे से आगे बढ़कर पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली और अनुशासन पर सवाल खड़े कर रहा है।
सड़क हादसे के बाद खुला नया विवाद
बुधवार देर रात लखनऊ-सुल्तानपुर हाईवे पर हुसैनाबाद पेट्रोल पंप के पास तेज रफ्तार स्कॉर्पियो (UP 32 QV 9669) आगे चल रहे ट्रक में घुस गई थी। इस हादसे में लोनीकटरा थाने के तीन पुलिसकर्मी घायल हो गए।
घायलों में शामिल थे—
- गौरव कुमार यादव (लाइन हाजिर सिपाही)
- ज्ञानेन्द्र
- जीत सिंह
इनमें ज्ञानेन्द्र और जीत सिंह की हालत गंभीर होने पर उन्हें लखनऊ ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया, जबकि गौरव यादव को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई।

सीओ की जांच में दोषी पाए जाने के बाद हुए थे लाइन हाजिर
जानकारी के मुताबिक, भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के ब्लॉक अध्यक्ष सचिन पांडेय ने क्षेत्राधिकारी (सीओ) से लिखित शिकायत की थी कि 13 जुलाई 2026 को लक्ष्मनपुर चौराहे पर वह संगठन के युवा इकाई ब्लॉक अध्यक्ष शोएब के साथ बैठे थे।
आरोप था कि उसी दौरान बिना वर्दी पहुंचे दो सिपाही विकास विश्वकर्मा और गौरव कुमार यादव शराब के नशे में वहां पहुंचे और अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए उनका अपमान किया।
मामले की जांच सीओ समीर कुमार सिंह ने की। जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद रिपोर्ट पुलिस अधीक्षक को भेजी गई, जिसके आधार पर एसपी ने सिपाही विकास विश्वकर्मा और गौरव कुमार यादव को 21 जुलाई 2026 को लाइन हाजिर कर दिया था।


अब सबसे बड़ा सवाल—लाइन हाजिर सिपाही थाने में क्या कर रहा था?
लाइन हाजिर होने के बाद सामान्यतः किसी पुलिसकर्मी को संबंधित थाने की सक्रिय ड्यूटी से हटाकर पुलिस लाइन से संबद्ध कर दिया जाता है।
ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि—
- जब गौरव यादव लाइन हाजिर थे तो वह लोनीकटरा थाने में किस हैसियत से मौजूद थे?
- उन्हें दबिश टीम में शामिल करने का आदेश किस अधिकारी ने दिया?
- क्या लाइन हाजिर होने के बावजूद वह नियमित रूप से थाने की ड्यूटी कर रहे थे?
- क्या विभागीय आदेशों का पालन नहीं हुआ?
इन सवालों के जवाब अब पुलिस विभाग को देने होंगे।
थानाध्यक्ष का बयान भी बढ़ा रहा सवाल
लोनीकटरा थाना प्रभारी अभिमन्यु मल्ल ने हादसे के बाद बताया था कि—
“तीनों घायल मेरे थाने के सिपाही हैं। ये एक वारंटी की गिरफ्तारी के लिए दबिश देकर वापस लौट रहे थे।”
थानाध्यक्ष के इस बयान के बाद यह स्पष्ट हो गया कि लाइन हाजिर सिपाही गौरव यादव भी दबिश टीम का हिस्सा थे। इसी बिंदु को लेकर अब पूरे मामले पर सवाल उठने लगे हैं।
पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
मामला अब केवल सड़क दुर्घटना तक सीमित नहीं रह गया है। पुलिस विभाग के भीतर अनुशासन और आदेशों के पालन को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।
यदि किसी पुलिसकर्मी को विभागीय कार्रवाई के तहत लाइन हाजिर किया गया था, तो उसे फील्ड ड्यूटी और दबिश जैसे संवेदनशील अभियान में शामिल किया जाना विभागीय नियमों के अनुरूप था या नहीं, इसकी भी जांच की मांग उठ रही है।
जांच के बाद ही साफ होगी स्थिति
फिलहाल हादसे की जांच जारी है। हालांकि अब इस मामले में यह भी जरूरी माना जा रहा है कि पुलिस विभाग स्पष्ट करे कि लाइन हाजिर सिपाही गौरव यादव किस आदेश के तहत दबिश टीम का हिस्सा बने और क्या विभागीय प्रक्रिया का पालन किया गया था। यदि एसपी के आदेश की नाफरमानी हुई तो क्या दोषियों की जवाबदेही तय की जाएगी?
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद












