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Barabanki Flood: सरयू ने धारण किया रौद्र रूप, खतरे के निशान से 30 सेंटीमीटर ऊपर नदी; दर्जनों गांवों में दहशत

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Barabanki Flood: सरयू नदी एल्गिन-चरसरी ब्रिज पर खतरे के निशान से 30 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है।

दर्जनों गांवों में बाढ़ का खतरा, ग्रामीणों ने नाव और राहत व्यवस्था पर सवाल उठाए।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 19 अगस्त 2026

पहाड़ों पर लगातार हो रही बारिश और नेपाल के बैराजों से लाखों क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद बाराबंकी में सरयू नदी ने रौद्र रूप धारण कर लिया है। एल्गिन-चरसरी ब्रिज पर सरयू नदी का जलस्तर खतरे के निशान से करीब 30 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया है। नदी का बढ़ता पानी अब तलहटी के गांवों की ओर तेजी से बढ़ रहा है।

सरयू के उफान से सिरौली गौसपुर और रामनगर तहसील क्षेत्र के दर्जनों गांवों में दहशत का माहौल है। खेतों और संपर्क मार्गों को डुबोने के बाद बाढ़ का पानी अब आबादी वाले इलाकों की तरफ बढ़ रहा है। ग्रामीणों के सामने घर-गृहस्थी बचाने के साथ-साथ पीने के पानी, पशुओं के चारे और सुरक्षित स्थान तक पहुंचने की चुनौती खड़ी हो गई है।

खतरे के निशान से ऊपर पहुंची सरयू, गांवों की ओर बढ़ रहा पानी

सरयू नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से नदी के किनारे बसे गांवों में चिंता बढ़ती जा रही है। एल्गिन-चरसरी ब्रिज पर नदी खतरे के निशान से करीब 30 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है।

नदी का पानी खेतों और गांवों को जोड़ने वाले संपर्क मार्गों तक पहुंच चुका है। कई स्थानों पर रास्तों पर पानी भरने से ग्रामीणों का आवागमन प्रभावित हुआ है। प्रशासन की निगाह अब इस बात पर है कि बढ़ता जलस्तर आबादी वाले क्षेत्रों को किस हद तक प्रभावित करता है।

फसलें डूबीं, अब घरों की तरफ बढ़ रहा बाढ़ का पानी

बाढ़ ने सबसे पहले किसानों की फसलों को अपनी चपेट में लिया। खेतों में पानी भरने से किसानों को भारी नुकसान की चिंता सताने लगी है।

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इसके बाद गांवों के संपर्क मार्गों पर पानी पहुंचने से आवागमन भी मुश्किल होने लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि नदी का जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो पानी आबादी वाले हिस्सों में भी प्रवेश कर सकता है।

गांवों में रहने वाले लोगों के सामने अब दो वक्त की रोटी के साथ शुद्ध पेयजल और सुरक्षित आवागमन की समस्या खड़ी हो गई है।

पीने के पानी और पशुओं के चारे का संकट

बाढ़ प्रभावित गांवों में इंसानों के साथ-साथ मवेशियों की चिंता भी बड़ी समस्या बन गई है। पानी से घिरे ग्रामीणों को अपने पशुओं के लिए चारा और पानी जुटाना मुश्किल हो रहा है।

कई परिवारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि यदि उन्हें सुरक्षित स्थान पर जाना पड़े तो वे अपने मवेशियों और जरूरी सामान को किस तरह बाहर निकालें।

बाढ़ के साथ बिजली संकट, जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा भी बढ़ा

बाढ़ प्रभावित इलाकों में पानी बढ़ने के साथ बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। कई ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली गुल होने से अंधेरा छाया हुआ है।

ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ के पानी के साथ सांप और अन्य जहरीले जीव-जंतु भी आबादी की ओर आने लगे हैं। ऐसे में रात के समय अंधेरे के बीच ग्रामीणों की मुश्किल और बढ़ गई है।

ग्रामीणों का आरोप है कि प्रभावित गांवों में पर्याप्त वैकल्पिक प्रकाश व्यवस्था नहीं की गई है। बिजली गुल होने और चारों तरफ पानी होने के कारण लोगों में डर का माहौल है।

घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने को मजबूर ग्रामीण

जलस्तर बढ़ने के साथ कई परिवार सुरक्षित स्थानों की ओर जाने की तैयारी में हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पानी और बढ़ा तो उन्हें घर छोड़कर तटबंध या ऊंचे स्थानों पर शरण लेनी पड़ेगी।

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लेकिन यहां भी एक बड़ी समस्या सामने आ रही है—नावों की पर्याप्त उपलब्धता।

ग्रामीणों के मुताबिक, नावों की संख्या पर्याप्त नहीं होने के कारण परिवार अपने जरूरी सामान, बच्चों और मवेशियों को लेकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचने में परेशानी का सामना कर रहे हैं।

नाव और राहत व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों की चिंता

बाढ़ के बीच ग्रामीणों की मांग है कि प्रभावित गांवों में पर्याप्त संख्या में नावें उपलब्ध कराई जाएं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके।

ग्रामीणों का कहना है कि राहत सामग्री के साथ-साथ पेयजल, पशु चारा, प्रकाश व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी तत्काल ध्यान देने की जरूरत है।

ग्रामीणों का आरोप—जमीन पर हालात और प्रशासन की तैयारी में अंतर

ग्रामीणों का कहना है कि जमीन पर स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है, जबकि प्रशासन की ओर से व्यवस्थाएं पर्याप्त होने के दावे किए जा रहे हैं।

ग्रामीणों के मुताबिक, यदि जलस्तर और बढ़ता है तो प्रभावित गांवों से बड़े पैमाने पर लोगों को बाहर निकालने की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में पहले से पर्याप्त नाव, प्रकाश, राहत सामग्री और सुरक्षित ठिकानों की व्यवस्था जरूरी है।

प्रशासन का दावा—बाढ़ चौकियां और राहत शिविर सक्रिय

वहीं, प्रशासन का कहना है कि बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और शासन के निर्देशों के अनुसार सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सक्रिय कर दी गई हैं।

सिरौली गौसपुर के उप जिलाधिकारी अनिल कुमार सरोज के मुताबिक, क्षेत्र की सभी बाढ़ चौकियों और राहत शिविरों को सक्रिय कर दिया गया है। लेखपालों और बाढ़ खंड के अधिकारियों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए गए हैं।

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उन्होंने बताया कि ग्रामीणों को प्रभावित गांवों से सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए नावों और लाइफ जैकेटों की व्यवस्था की गई है।

प्रशासन और ग्रामीणों के दावों के बीच असली परीक्षा अब बाढ़ के बढ़ते पानी की

सरयू का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंचने के बाद अब प्रशासन की तैयारियों की असली परीक्षा शुरू हो गई है।

एक तरफ ग्रामीण बिजली, नाव, पेयजल और पशु चारे की कमी की शिकायत कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ प्रशासन बाढ़ चौकियों, राहत शिविरों और नावों की व्यवस्था सक्रिय होने की बात कह रहा है।

अब सबसे अहम सवाल यह है कि यदि सरयू का जलस्तर और बढ़ता है तो प्रशासन इन गांवों में रहने वाले लोगों को कितनी तेजी से सुरक्षित स्थानों तक पहुंचा पाता है और राहत व्यवस्था कितनी प्रभावी साबित होती है।

फिलहाल सरयू का बढ़ता जलस्तर सिरौली गौसपुर और रामनगर तहसील क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए बड़ी चिंता बना हुआ है।

रिपोर्ट – मंसूफ अहमद 

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Author: Kamran Alvi

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