Barabanki News: बाराबंकी के मंजीठा धाम में पार्किंग शुल्क को लेकर श्रद्धालुओं ने अधिक वसूली और सतरिख पुलिस की कथित मिलीभगत के आरोप लगाए।
रसीदें वायरल, प्रशासन ने जांच का भरोसा दिया।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 17 अगस्त 2026
एक तरफ आसमान में हेलिकॉप्टर मंडरा रहा था और उसमें बैठे अफसर शिवभक्तों पर फूल बरसा रहे थे, दूसरी तरफ जमीन पर श्रद्धालुओं की जेब पर ‘डाका’ डालने के आरोप लग रहे थे। सावन के तीसरे सोमवार और नाग पंचमी के मौके पर बाराबंकी के मंजीठा धाम से सामने आई पार्किंग शुल्क की तस्वीरों ने प्रशासन की तमाम व्यवस्थाओं और सतरिख पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामला सतरिख थाना क्षेत्र के मंजीठा धाम स्थित श्री नाग देवता मंदिर परिसर में आयोजित मेले का है। यहां दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालुओं ने आरोप लगाया कि वाहन पार्किंग के नाम पर निर्धारित शुल्क से अधिक रकम वसूली जा रही है। इतना ही नहीं, शिकायत के बावजूद मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों की ओर से कार्रवाई नहीं किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
यानी ऊपर से फूलों की बारिश की व्यवस्था और नीचे श्रद्धालुओं की जेब साफ करने का पूरा इंतजाम—बस फर्क इतना कि ऊपर वाली बारिश सरकारी इंतजामों का हिस्सा थी और नीचे श्रद्धालुओं की जेब साफ करने का जिम्मा पार्किंग स्टैंड संचालकों को दिया गया था।
चार घंटे की बाइक पार्किंग के ₹30, समय बढ़ा तो ‘दोगुनी’ वसूली!
श्रद्धालुओं का आरोप है कि मंजीठा धाम मेले में बनाए गए साइकिल स्टैंड पर बाइक खड़ी करने के लिए चार घंटे के नाम पर ₹30 वसूले जा रहे हैं।
श्रद्धालुओं के मुताबिक परेशानी तब और बढ़ जाती है जब मंदिर में दर्शन के लिए लगी लंबी कतार के कारण चार घंटे से अधिक समय लग जाता है। आरोप है कि निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद पार्किंग संचालक फिर से ₹30 की अतिरिक्त रकम, यानी कुल ₹60 तक वसूल रहे हैं।
अब सवाल यह है कि श्रद्धालु मंदिर में दर्शन करने आए हैं या पार्किंग के टाइमर से मुकाबला करने?
भक्तों का कहना है कि मंदिर में भीड़ इतनी अधिक होती है कि दर्शन में कई घंटे लग सकते हैं। ऐसे में पार्किंग की समय सीमा को लेकर स्पष्ट व्यवस्था नहीं होने का खामियाजा श्रद्धालुओं को भुगतना पड़ रहा है।

रसीदें सोशल मीडिया पर पहुंचीं, प्रशासन से कार्रवाई की मांग
मामले को लेकर कुछ श्रद्धालुओं ने पार्किंग शुल्क की रसीदों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा की हैं। इन तस्वीरों के जरिए श्रद्धालुओं ने प्रशासन से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि आखिर पार्किंग शुल्क कितना निर्धारित है और किस आधार पर अतिरिक्त रकम ली जा रही है।
श्रद्धालुओं का आरोप है कि उन्होंने मेले की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों से भी पार्किंग शुल्क को लेकर शिकायत की, लेकिन उन्हें अपेक्षित राहत नहीं मिली।
यही शिकायत अब सोशल मीडिया के जरिए प्रशासन में बैठे जिम्मेदारों तक पहुंच रही है।

श्रद्धालुओं का सवाल—एक जिले में पार्किंग का ‘रेट कार्ड’ अलग-अलग क्यों?
मंजीठा धाम से नाराज श्रद्धालुओं ने बाराबंकी के ही प्रसिद्ध लोधेश्वर महादेवा धाम का उदाहरण देते हुए सवाल उठाया है।
श्रद्धालुओं के मुताबिक रामनगर स्थित लोधेश्वर महादेवा धाम में बाइक पार्किंग के लिए ₹20 शुल्क लिया जा रहा है और वहां समय की ऐसी सीमा नहीं बताई जा रही है।
ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब दोनों धार्मिक स्थलों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं तो पार्किंग शुल्क और नियमों में इतना अंतर क्यों है?
क्या अलग-अलग मेलों के लिए अलग-अलग नियम हैं या फिर श्रद्धालु जहां गए, वहीं ‘रेट कार्ड’ बदल गया?
पुलिस पर क्यों उठ रही उंगली?
सबसे गंभीर सवाल पार्किंग शुल्क से ज्यादा पुलिस की भूमिका को लेकर उठ रहे हैं।
श्रद्धालुओं का आरोप है कि पार्किंग के नाम पर कथित अधिक वसूली की शिकायत मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों से की गई, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। इसी आधार पर कुछ श्रद्धालु स्थानीय पुलिस की कथित मिलीभगत के आरोप लगा रहे हैं।
हालांकि, पुलिस की मिलीभगत के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में असली सवाल जांच के बाद ही साफ होगा कि पार्किंग शुल्क किसने तय किया, ठेके की शर्तें क्या थीं, कितनी रकम वसूलने की अनुमति थी और निर्धारित शुल्क से अधिक वसूली हुई या नहीं।
लेकिन यदि शिकायतें सही पाई जाती हैं तो सवाल यह भी होगा कि मेले में सुरक्षा और व्यवस्था के लिए तैनात पुलिसकर्मियों ने कथित अवैध वसूली को रोकने के लिए तत्काल कदम क्यों नहीं उठाया?
SDM बोलीं—ठेका मेला कमेटी ने दिया, अधिक वसूली हुई तो जांच होगी
मामले को लेकर जब नवाबगंज तहसील की एसडीएम गुंजिता अग्रवाल से संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि उन्हें मामले की जानकारी नहीं है।
एसडीएम के मुताबिक साइकिल स्टैंड का ठेका मेला कमेटी की ओर से दिया गया है और शुल्क का निर्धारण भी कमेटी द्वारा किया गया होगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि निर्धारित शुल्क से अधिक वसूली की जा रही है तो मामले की जांच कराकर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अब गेंद मेला कमेटी और प्रशासन के पाले में है।
सबसे पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि पार्किंग शुल्क वास्तव में कितना निर्धारित किया गया था और क्या श्रद्धालुओं से उससे अधिक रकम ली गई?

आसमान में अफसरों की पुष्पवर्षा, जमीन पर व्यवस्थाओं की असली परीक्षा
सावन के तीसरे सोमवार और नाग पंचमी के अवसर पर बाराबंकी में प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए व्यापक व्यवस्थाओं का दावा किया।
मंडलायुक्त राजेश कुमार और अयोध्या रेंज के डीआईजी सोमेन वर्मा ने प्रमुख शिवालयों में कांवड़ यात्रियों और श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा कर उनका उत्साह बढ़ाया।
लोधेश्वर महादेवा के अलावा बुढ़वा बाबा, औसानेश्वर समेत अन्य प्रमुख शिवालयों में भी सुरक्षा, यातायात और श्रद्धालुओं की सुविधा के इंतजाम किए गए। जगह-जगह सेवा शिविरों में फलाहार, पेयजल और चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई।
लेकिन मंजीठा धाम से सामने आए पार्किंग शुल्क को लेकर आरोपों ने इन व्यवस्थाओं के बीच एक असहज सवाल खड़ा कर दिया है—
अगर ऊपर से हेलीकॉप्टर फूल बरसा रहा था, तो नीचे श्रद्धालुओं की जेब कौन देख रहा था?

मंजीठा धाम की आस्था और नाग देवता से जुड़ी मान्यताएं
मंजीठा धाम का धार्मिक महत्व स्थानीय स्तर पर काफी माना जाता है। सावन के महीने में बाराबंकी ही नहीं, आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार मंदिर में नाग देवता से जुड़ी विशेष धार्मिक परंपराएं हैं। श्रद्धालुओं में यह विश्वास भी है कि सांप के काटने के बाद पीड़ित को मंदिर तक लाने से उसे राहत मिल सकती है। मंदिर की मिट्टी को लेकर भी कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं।

अब प्रशासन के सामने बड़ा सवाल—किसने तय किया पार्किंग का शुल्क?
मंजीठा धाम में पार्किंग शुल्क को लेकर उठे सवालों का जवाब अब प्रशासनिक जांच से मिल सकता है।
जांच में मुख्य रूप से यह स्पष्ट होना जरूरी है—
- साइकिल स्टैंड/पार्किंग का ठेका किसे दिया गया?
- ठेके की शर्तें क्या थीं?
- बाइक पार्किंग का निर्धारित शुल्क कितना था?
- क्या चार घंटे की कोई समय सीमा आधिकारिक रूप से तय थी?
- अतिरिक्त समय के नाम पर अतिरिक्त शुल्क लेने की अनुमति थी या नहीं?
- श्रद्धालुओं से कथित ₹60 वसूली के आरोप सही हैं या नहीं?
- शिकायत के बावजूद मौके पर तैनात पुलिस ने क्या कार्रवाई की?
- यदि अधिक वसूली हुई तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
फिलहाल श्रद्धालुओं की शिकायतें और सोशल मीडिया पर सामने आई रसीदों की तस्वीरें प्रशासन के लिए जांच का आधार जरूर बन सकती हैं।
‘पुष्पवर्षा’ के साथ व्यवस्था की भी जरूरत
श्रद्धालुओं का सम्मान केवल हेलीकॉप्टर से फूल बरसाने से नहीं, बल्कि जमीन पर उन्हें सुरक्षित, सुविधाजनक और पारदर्शी व्यवस्था देने से भी होता है।
मंजीठा धाम की पार्किंग को लेकर उठे सवाल अगर जांच में सही साबित होते हैं तो यह केवल कुछ रुपये की वसूली का मामला नहीं होगा, बल्कि आस्था के नाम पर आने वाले श्रद्धालुओं के साथ व्यवस्था की पारदर्शिता का सवाल भी बनेगा।
अब देखना यह है कि प्रशासन आसमान से हुई पुष्पवर्षा के बाद जमीन पर श्रद्धालुओं की जेब से कथित ‘वसूली’ के आरोपों पर भी उतनी ही गंभीरता से कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी मेले की भीड़ में कहीं दबकर रह जाता है।
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद














