Barabanki News: बाराबंकी की नवाबगंज तहसील में सरकारी आबादी और रास्ते की भूमि पर कथित कब्जे का मामला सामने आया है।
शिकायतकर्ता ने दीवार और गेट लगाकर रास्ता बंद करने का आरोप लगाते हुए जांच व कार्रवाई की मांग की है।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 08 अगस्त 2026
उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार भूमाफियाओं और सरकारी संपत्तियों पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति का दावा करती है। सरकार की ओर से बार-बार कहा जाता है कि सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी और किसी भी दबंग या प्रभावशाली व्यक्ति को कानून से ऊपर नहीं माना जाएगा।
लेकिन राजधानी लखनऊ से सटे बाराबंकी जिले की नवाबगंज तहसील से सामने आया एक मामला इन दावों की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। आरोप है कि ग्राम बाराबंकी (अरबन) में सरकारी आबादी और सार्वजनिक रास्ते की भूमि पर कथित कब्जा कर बाउंड्रीवाल खड़ी कर दी गई। रास्ते को गेट लगाकर बंद किए जाने की बात भी शिकायत में कही गई है। इससे भी गंभीर बात यह है कि लिखित शिकायत के बावजूद दो महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से कोई ठोस वैधानिक कार्रवाई नहीं की गई।
ऐसे में स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि क्या नवाबगंज तहसील प्रशासन भूमाफियाओं पर मेहरबान है या फिर राजस्व विभाग के जिम्मेदार अधिकारी पूरे मामले को दबाने में जुटे हैं?
सरकारी आबादी और रास्ते की जमीन पर कब्जे का आरोप
बंकी कस्बे के निवासी मोहम्मद फुरकान ने इस संबंध में शिकायत की है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि ग्राम बाराबंकी (अरबन), तहसील नवाबगंज, जनपद बाराबंकी में स्थित सरकारी आबादी, लावारिस के नाम दर्ज भूमि और सार्वजनिक रास्ते की जमीन पर योजनाबद्ध तरीके से कब्जा किया गया।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जिले के चर्चित भूमाफिया उस्मान सिद्दीकी तथा उनके सहयोगियों ने अपने नाम कराई गई जमीन से अधिक क्षेत्रफल पर कब्जा किया। आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में राजस्व विभाग के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत या भूमिका की भी जांच की जानी चाहिए।

इन गाटा संख्याओं पर अनधिकृत कब्जे की शिकायत
शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत में ग्राम बाराबंकी (अरबन) की तीन प्रमुख गाटा संख्याओं का उल्लेख किया है। उसके अनुसार, इन जमीनों की स्थिति राजस्व अभिलेखों में इस प्रकार दर्ज है—
गाटा संख्या 402
गाटा संख्या 402 (N.Z.A.) का रकबा 0.092 हेक्टेयर बताया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, यह भूमि राजस्व अभिलेखों में आबादी भूमि के रूप में दर्ज है। आरोप है कि इस भूमि के हिस्से को भी कथित रूप से कब्जे में लेकर बाउंड्रीवाल के भीतर शामिल किया गया।
गाटा संख्या 1826
गाटा संख्या 1826 का रकबा 0.0780 हेक्टेयर बताया गया है। शिकायत में कहा गया है कि यह भूमि राजस्व अभिलेखों में जगन्नाथ (लावारिस) के नाम दर्ज है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस भूमि पर भी अनधिकृत कब्जा किया गया।
गाटा संख्या 1828
गाटा संख्या 1828 का रकबा 0.063 हेक्टेयर बताया गया है। शिकायत के अनुसार, यह भूमि राजस्व अभिलेखों में रास्ते के रूप में दर्ज है। आरोप है कि इसी रास्ते को घेरकर सार्वजनिक आवागमन में बाधा उत्पन्न की गई और वहां गेट लगा दिया गया।
दीवार खड़ी कर गेट लगाने का आरोप
शिकायतकर्ता का कहना है कि सरकारी आबादी और रास्ते की बताई जा रही जमीन पर बाउंड्रीवाल बनाकर कब्जा कर लिया गया है। इसके बाद निर्माण क्षेत्र को गेट लगाकर बंद कर दिया गया। आरोप है कि यह कदम प्रशासनिक कार्रवाई से बचने और विवादित भूमि को अस्थायी रूप से छिपाने के उद्देश्य से उठाया गया।
मौके पर बनाई गई दीवार और लगाए गए गेट की तस्वीरें भी शिकायतकर्ता की ओर से उपलब्ध कराई गई हैं। तस्वीरों में विवादित स्थल को घेरने वाली दीवार और प्रवेश मार्ग पर लगा गेट दिखाई देता है।

बैनामे की जमीन से अधिक क्षेत्र पर कब्जे का आरोप
मोहम्मद फुरकान की शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कथित कब्जे की योजना के तहत आसपास की कुछ जमीनों का बैनामा कराया गया और बाद में बैनामे में दर्ज भूमि से अधिक क्षेत्र पर कब्जा कर लिया गया।
शिकायत के अनुसार, विवादित भूमि के पास स्थित गाटा संख्या 404 मिन, जिसका रकबा 0.66 हेक्टेयर, का बैनामा 08 जनवरी 2013 को उस्मान सिद्दीकी के पक्ष में कराया गया था।
इसी क्षेत्र के पास स्थित गाटा संख्या 1825, रकबा 0.136 हेक्टेयर, का बैनामा 28 अक्टूबर 2020 को अनिल कुमार और मोहम्मद नदीम द्वारा कराए जाने की बात शिकायत में कही गई है।
फुरकान का आरोप है कि संबंधित व्यक्तियों ने बैनामे में दर्ज भूमि की सीमा से बाहर जाकर अतिरिक्त क्षेत्रफल पर कब्जा कर लिया। शिकायतकर्ता के अनुसार, इसी कथित कब्जे के दौरान सरकारी आबादी और रास्ते की भूमि को भी घेर लिया गया।
अब इस मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि बैनामे में दर्ज भूमि का वास्तविक क्षेत्रफल कितना है और मौके पर कब्जा किस-किस गाटा संख्या में किया गया है। इसका जवाब केवल निष्पक्ष पैमाइश और राजस्व मानचित्र के मिलान से ही मिल सकता है।
प्लॉट के नाम पर बने बनाए मकान की बिक्री का आरोप
शिकायत में बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के निर्माण कराने और मकानों को बिक्री के लिए उपलब्ध कराने का भी आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि विवादित क्षेत्र में केवल प्लॉट की बिक्री नहीं हो रही, बल्कि निर्माण कराए गए मकानों को भी बेचने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
फुरकान ने बैनामा संख्या 20313 दिनांक 03 दिसंबर 2019 का हवाला देते हुए आरोप लगाया है कि इसमें बना-बनाया मकान बेचा गया, जबकि दस्तावेज में प्लॉट का उल्लेख किया गया। यदि यह आरोप जांच में सही पाया जाता है तो मामला अवैध निर्माण के साथ-साथ संपत्ति के दस्तावेजी विवरण से जुड़ा गंभीर प्रश्न भी बन सकता है।
इस पूरे मामले में बैनामा दस्तावेजों, निर्माण की अनुमति, नक्शे, भूमि उपयोग और राजस्व अभिलेखों की जांच आवश्यक है।
कानूनगो पर भी उठाए सवाल, जांच टीम से बाहर रखने की मांग
मोहम्मद फुरकान का आरोप है कि उन्होंने पहले इस मामले की शिकायत संबंधित कानूनगो से की थी, लेकिन कोई प्रभावी जांच नहीं की गई। शिकायतकर्ता ने वर्तमान कानूनगो लक्ष्मीकांत मिश्रा को जांच टीम में शामिल नहीं किए जाने की मांग की है।
फुरकान का आरोप है कि संबंधित अधिकारी की भूमाफियाओं से कथित सांठगांठ हो सकती है। ऐसे में निष्पक्ष जांच के लिए शिकायतकर्ता ने किसी दूसरे राजस्व अधिकारी या स्वतंत्र टीम से पैमाइश कराने की मांग की है।
23 मई को एसडीएम को दी गई लिखित शिकायत
शिकायतकर्ता के मुताबिक, उसने 23 मई 2026 को एसडीएम नवाबगंज को लिखित शिकायत दी थी। जिसमें सात प्रमुख मांग की गई।
मौके की पैमाइश और वीडियोग्राफी
शिकायतकर्ता ने राजस्व टीम गठित कर तत्काल मौके की पैमाइश और वीडियोग्राफी कराने की मांग की है। उसका कहना है कि पैमाइश राजस्व अभिलेखों और सरकारी नक्शे के आधार पर होनी चाहिए।
कथित कब्जा हटाने की मांग
सरकारी, आबादी और रास्ते की भूमि पर यदि कब्जा पाया जाता है तो उसे तत्काल हटाने की मांग की गई है। शिकायतकर्ता ने प्रशासन से भूमि को उसके मूल स्वरूप में बहाल कराने को कहा है।
अवैध निर्माण पर कार्रवाई
शिकायत में आरोपित अवैध निर्माणों को नियमानुसार ध्वस्त कराने की मांग की गई है। हालांकि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से पहले सक्षम प्राधिकारी की जांच, नोटिस और कानूनी प्रक्रिया का पालन आवश्यक होगा।
सार्वजनिक रास्ता खुलवाने की मांग
यदि गाटा संख्या 1828 राजस्व अभिलेखों में सार्वजनिक रास्ते के रूप में दर्ज है और मौके पर मार्ग अवरुद्ध पाया जाता है, तो रास्ते को खुलवाने की मांग की गई है।
अवैध प्लॉटिंग और बिक्री पर रोक
शिकायतकर्ता ने विवादित भूमि पर कथित अवैध निर्माण, प्लॉटिंग और संपत्ति की बिक्री पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है, ताकि आगे किसी अन्य व्यक्ति को जमीन बेचकर विवाद को बढ़ाया न जा सके।
अधिकारियों और कर्मचारियों की जांच
शिकायत में संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की गई है। यदि किसी स्तर पर मिलीभगत सामने आती है तो दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।
संगठित गतिविधि मिलने पर कठोर कार्रवाई
शिकायतकर्ता ने कहा है कि यदि जांच में सरकारी भूमि पर संगठित तरीके से कब्जा, अवैध प्लॉटिंग या लोगों को गुमराह कर आर्थिक लाभ कमाने की पुष्टि होती है तो लागू कानूनों के तहत कठोर कार्रवाई की जाए। शिकायत में गैंगस्टर एक्ट, जिला बदर और अन्य वैधानिक प्रावधानों के तहत कार्रवाई की मांग भी की गई है।
दो महीने से अधिक समय बाद भी कार्रवाई का इंतजार
फुरकान का आरोप है कि शिकायत दिए जाने के दो महीने से अधिक समय बाद भी मौके पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। न तो कथित कब्जे की निष्पक्ष पैमाइश कराई गई और न ही विवादित निर्माण को लेकर प्रशासन की ओर से स्थिति स्पष्ट की गई।
शिकायतकर्ता का कहना है कि मामला सरकारी भूमि, सार्वजनिक रास्ते, अवैध निर्माण और संभावित आर्थिक गतिविधियों से जुड़ा है। ऐसे में प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है।
स्थानीय लोगों के बीच भी यह सवाल चर्चा में है कि यदि शिकायत गलत है तो प्रशासन राजस्व अभिलेखों के आधार पर जांच कर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं करता? और यदि शिकायत सही है तो कथित कब्जे और निर्माण पर कार्रवाई में देरी किस वजह से हो रही है?
कार्रवाई नहीं हुई तो बढ़ सकता है विवाद
शिकायतकर्ता ने आशंका जताई है कि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो सरकारी भूमि पर स्थायी अवैध कॉलोनी विकसित हो सकती है। इससे शासन को आर्थिक और प्रशासनिक नुकसान होने के साथ भविष्य में स्थानीय विवाद और कानून-व्यवस्था की समस्या भी पैदा हो सकती है।
सरकारी जमीन और सार्वजनिक रास्ते से जुड़े मामलों में देरी अक्सर विवाद को और जटिल बना देती है। निर्माण बढ़ने के बाद अतिक्रमण हटाना, खरीदारों के हितों की रक्षा करना और भूमि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करना प्रशासन के लिए अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
तहसील प्रशासन की भूमिका पर सवाल
सरकार भूमाफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई का दावा करती है, लेकिन किसी भी शिकायत पर कार्रवाई न होने से सरकारी दावों की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। नवाबगंज तहसील के इस मामले में प्रशासन को जल्द से जल्द स्पष्ट करना चाहिए कि विवादित भूमि का वास्तविक स्वामित्व और उपयोग क्या है।
निष्पक्ष पैमाइश, वीडियोग्राफी और राजस्व अभिलेखों की जांच से यह पता लगाया जा सकता है कि दीवार और गेट किस भूमि पर बनाए गए हैं। यदि सरकारी या सार्वजनिक रास्ते की भूमि पर कब्जा पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, यदि आरोप गलत पाए जाते हैं तो प्रशासन को संबंधित पक्ष को भी स्पष्ट राहत देनी चाहिए।
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद












