Barabanki News: बाराबंकी के PHC सुबेहा में जायजे के दौरान डॉक्टर समेत अधिकांश स्टाफ मौजूद नहीं मिला। लैब पर ताला मिला, जांच प्रभावित होने के आरोप; CMO ने जांच की बात कही।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 16 सितम्बर 2026
बाराबंकी जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। कागजों पर डॉक्टर और कर्मचारियों की नियमित मौजूदगी तथा मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के दावों के बीच बुधवार को पीएचसी सुबेहा की जमीनी स्थिति अलग नजर आई। अस्पताल पहुंचकर किए गए जायजे में स्टाफ नर्स ममता राजन और स्वीपर सुरेश कुमार ही मौजूद मिले, जबकि अन्य कर्मचारी अस्पताल में दिखाई नहीं दिए।
पीएचसी में डॉक्टर, फार्मासिस्ट, दो स्टाफ नर्स और लैब टेक्नीशियन समेत छह कर्मचारियों की तैनाती बताई गई है। इसके बावजूद अस्पताल में निरीक्षण के दौरान अधिकांश स्टाफ की गैरमौजूदगी को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।
मामले की जानकारी मिलने पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रंजन गौतम ने जांच कराने और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की बात कही है।
PHC सुबेहा में छह कर्मचारियों की तैनाती, मौके पर मिले सिर्फ दो
बुधवार को पीएचसी सुबेहा का जायजा लिया गया तो अस्पताल में स्टाफ नर्स ममता राजन और स्वीपर सुरेश कुमार ही मौजूद मिले।
वहीं, अस्पताल में डॉक्टर, फार्मासिस्ट, दो स्टाफ नर्स और लैब टेक्नीशियन समेत छह कर्मचारियों की तैनाती होने की जानकारी दी गई है। निरीक्षण के दौरान बाकी कर्मचारियों के अस्पताल में मौजूद नहीं मिलने से स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सवाल उठे।

अस्पताल में वर्तमान स्टाफ की सूची तक नहीं
पीएचसी परिसर में वर्तमान में तैनात डॉक्टर और कर्मचारियों की सूची भी चस्पा नहीं की गई है। अस्पताल की दीवार पर अभी भी सेवानिवृत्त और स्थानांतरित कर्मचारियों के नाम लिखे हुए मिले।
ऐसे में अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों और तीमारदारों को यह पता लगाने में परेशानी होती है कि वर्तमान में पीएचसी पर कौन-कौन से डॉक्टर और कर्मचारी तैनात हैं।
दो स्टाफ नर्स की तैनाती, फिर भी नहीं चल रही प्रसव सुविधा
पीएचसी सुबेहा में दो स्टाफ नर्स की तैनाती होने के बावजूद यहां प्रसव की सुविधा संचालित नहीं होने की बात भी सामने आई।
यह स्थिति खास तौर पर ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि प्रसव संबंधी सुविधा उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में महिलाओं को अन्य स्वास्थ्य केंद्रों का रुख करना पड़ सकता है।

ओपीडी का समय खत्म होते ही अस्पताल में लग जाता है ताला
जायजे के दौरान यह भी बताया गया कि ओपीडी का समय समाप्त होने के बाद पीएचसी में ताला लग जाता है।
ऐसे में ओपीडी के बाद अस्पताल आने वाले मरीजों को तत्काल स्वास्थ्य सुविधा मिलने को लेकर भी सवाल खड़े होते हैं।
स्टाफ नर्स ने बताया- दोपहर एक बजे तक पहुंचे करीब 20 मरीज
स्टाफ नर्स ममता राजन ने बताया कि बुधवार को दोपहर करीब एक बजे तक लगभग 20 मरीज पीएचसी पहुंचे थे। इन मरीजों को अस्पताल से दवाएं वितरित की गईं।
यानी अस्पताल में मरीजों की आवाजाही बनी हुई थी और मौजूद स्टाफ द्वारा मरीजों को दवाएं उपलब्ध कराई जा रही थीं।
डॉक्टर और फार्मासिस्ट ने बताई अपनी-अपनी वजह
अस्पताल में डॉक्टर और फार्मासिस्ट की गैरमौजूदगी को लेकर संबंधित कर्मचारियों की ओर से अलग-अलग कारण बताए गए।
डॉक्टर विवेक कुमार ने सरकारी कार्य से बाहर होने का दिया हवाला
डॉक्टर विवेक कुमार ने बताया कि वह सरकारी कार्य से बाहर होने के कारण बुधवार को अस्पताल नहीं आ सके।
वहीं फार्मासिस्ट पुष्पेंद्र तिवारी ने बताया कि अधीक्षक ने मंगलवार को उनकी ड्यूटी सीएचसी हैदरगढ़ की इमरजेंसी में लगाई थी। इसी वजह से वह पीएचसी सुबेहा नहीं पहुंच पाए।
लैब टेक्नीशियन के कक्ष में लटका मिला ताला
पीएचसी के लैब टेक्नीशियन के कक्ष में ताला लटका मिला। स्थानीय लोगों ने लैब टेक्नीशियन के नियमित रूप से मौजूद नहीं रहने का आरोप लगाया है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक पीएचसी में खून, बलगम समेत अन्य जांच की सुविधा होने के बावजूद नियमित जांच नहीं हो पा रही है।
जांच नहीं होने से टीबी मरीजों को परेशानी का आरोप
स्थानीय लोगों का कहना है कि जांच सुविधा प्रभावित होने से टीबी के मरीजों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें आवश्यक जांच के लिए इधर-उधर जाना पड़ता है।
हालांकि, इन आरोपों की वास्तविक स्थिति स्वास्थ्य विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
CMO ने कहा- जांच कराकर तथ्यों के आधार पर होगी कार्रवाई
मामले को लेकर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रंजन गौतम ने कहा कि प्रकरण की जांच कराई जाएगी। जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अब सवाल यह है कि स्वास्थ्य विभाग की जांच में पीएचसी सुबेहा में सामने आई कर्मचारियों की गैरमौजूदगी, लैब की स्थिति और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े आरोपों की क्या तस्वीर सामने आती है और विभाग की ओर से इस मामले में क्या कार्रवाई की जाती है।
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद












