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बाराबंकी में युवक की संदिग्ध मौत के बाद 5 दिन तक FIR को तरसे परिजन: आमरण अनशन शुरू होने पर दर्ज हुआ मुकदमा, पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल

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बाराबंकी के असंद्रा थाना क्षेत्र में युवक की संदिग्ध मौत के मामले में पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठे हैं।

परिजनों को एफआईआर दर्ज कराने के लिए 5 दिन तक थाने के चक्कर लगाने पड़े।

एसपी को शिकायत और आमरण अनशन की चेतावनी के बाद मुकदमा दर्ज हुआ, लेकिन अब तक आरोपियों पर कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों में आक्रोश है।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 14 जून 2026

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के असंद्रा थाना क्षेत्र में एक युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों का आरोप है कि युवक की मौत के बाद हत्या की आशंका जताते हुए नामजद तहरीर देने के बावजूद पुलिस ने तत्काल मुकदमा दर्ज नहीं किया और उन्हें लगातार पांच दिनों तक थाने के चक्कर कटवाए। आखिरकार पुलिस अधीक्षक को शिकायत और आमरण अनशन की चेतावनी के बाद मामला दर्ज किया गया, लेकिन अब तक किसी आरोपी की गिरफ्तारी न होने से परिजनों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।

9 जून को बाग में पेड़ से लटका मिला था युवक का शव

जानकारी के अनुसार, असंद्रा थाना क्षेत्र के सिल्हौर गांव निवासी मंगल दीप मिश्रा (20 वर्ष) का शव 9 जून 2026 को गांव के बाहर एक बाग में संदिग्ध परिस्थितियों में पेड़ से लटका मिला था। घटनास्थल से पड़ोसी गांव निवासी लवकुश रावत की बाइक भी बरामद हुई थी।

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परिजनों का आरोप है कि मृतक के शरीर पर चोटों के कई निशान मौजूद थे, जिससे आशंका है कि पहले उसके साथ मारपीट की गई और बाद में हत्या को आत्महत्या का रूप देने के लिए शव को पेड़ से लटका दिया गया। इसी आधार पर परिजनों ने पुलिस को तहरीर देकर लवकुश रावत पर संदेह जताया था।

अंतिम संस्कार के बाद रिपोर्ट दर्ज करने का दिया गया था आश्वासन

परिजनों का कहना है कि पोस्टमार्टम के बाद जब शव गांव पहुंचा तो पुलिस अधिकारियों ने उन्हें भरोसा दिलाया कि अंतिम संस्कार के बाद थाने आने पर मुकदमा दर्ज कर लिया जाएगा। लेकिन अंतिम संस्कार के बाद जब परिजन थाने पहुंचे तो उन्हें जांच का हवाला देकर वापस भेज दिया गया।

मृतक के चचेरे भाई अमन मिश्रा के अनुसार, 9 जून से लेकर लगातार चार दिनों तक परिवार के लोग थाने के चक्कर लगाते रहे, लेकिन उनकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई।

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एसपी को शिकायत और आमरण अनशन की चेतावनी के बाद हरकत में आई पुलिस

पुलिस की कार्यशैली से नाराज परिजनों ने 13 जून को पुलिस अधीक्षक बाराबंकी अर्पित विजयवर्गीय को शिकायती पत्र सौंपा। पत्र में आरोप लगाया गया कि स्थानीय पुलिस आरोपी पक्ष को बचाने का प्रयास कर रही है।

परिजनों ने चेतावनी दी थी कि यदि मुकदमा दर्ज नहीं किया गया तो वे सिद्धौर स्थित ब्रह्मदेव बाबा स्थान पर आमरण अनशन शुरू करेंगे।

अनशन शुरू होते ही दर्ज हुआ मुकदमा

परिजनों का आरोप है कि 14 जून को जब उन्होंने आमरण अनशन शुरू किया, तभी पुलिस हरकत में आई और असंद्रा थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। हालांकि, रिपोर्ट दर्ज होने के बावजूद अब तक किसी भी आरोपी के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

पुलिस की कार्यशैली पर उठ रहे गंभीर सवाल

इस पूरे घटनाक्रम के बाद स्थानीय लोगों और ग्रामीणों में पुलिस के प्रति नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि किसी संदिग्ध मौत के मामले में भी पीड़ित परिवार को एफआईआर दर्ज कराने के लिए कई दिनों तक संघर्ष करना पड़े, तो यह कानून व्यवस्था और पुलिस व्यवस्था दोनों पर गंभीर प्रश्नचिह्न है।

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ग्रामीणों का आरोप है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की जाती तो लोगों में इतना आक्रोश नहीं होता।

निष्पक्ष जांच और गिरफ्तारी की मांग

मृतक के परिजन और ग्रामीण लगातार मांग कर रहे हैं कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और घटना में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि जब तक दोषियों की गिरफ्तारी नहीं होती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

रिपोर्ट – मंसूफ अहमद

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Author: Kamran Alvi

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