Barabanki News: बाराबंकी के हैदरगढ़ क्षेत्र में यूरिया खाद को लेकर किसानों में हाहाकार।
सुबेहा बी-पैक्स केंद्र पर लंबी कतारें, ओवररेटिंग और पक्षपात के आरोप।
किसानों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 29 जुलाई 2026
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में खरीफ सीजन के बीच किसानों को यूरिया खाद के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हैदरगढ़ क्षेत्र में एक ओर निजी खाद विक्रेताओं पर निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत वसूलने और जिंक सल्फेट खरीदने की शर्त पर ही यूरिया देने के आरोप लग रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सरकारी बी-पैक्स केंद्रों पर खाद की सीमित उपलब्धता और लंबी कतारों के कारण किसान घंटों धूप में इंतजार करने को मजबूर हैं।
बुधवार को सुबेहा बी-पैक्स केंद्र पर खाद वितरण के दौरान बड़ी संख्या में किसान सुबह से ही लाइन में खड़े दिखाई दिए। कई किसानों को घंटों इंतजार के बाद खाद मिल गई, जबकि दर्जनों किसान बिना खाद लिए ही मायूस होकर लौट गए। किसानों का कहना है कि समय पर खाद न मिलने से धान की फसल प्रभावित होने का खतरा बढ़ता जा रहा है।
खाद के लिए घंटों इंतजार, कई किसान लौटे खाली हाथ
सुबेहा बी-पैक्स केंद्र पर सुबह से ही किसानों की लंबी कतार लग गई। दूर-दराज के गांवों से आए किसान अपनी बारी का इंतजार करते रहे, लेकिन सीमित स्टॉक के चलते सभी को खाद उपलब्ध नहीं हो सकी।
किसानों का कहना है कि खेती का समय निकलता जा रहा है, लेकिन पर्याप्त मात्रा में यूरिया उपलब्ध नहीं होने से उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
किसानों ने लगाए ओवररेटिंग और पक्षपात के आरोप
खाद लेने पहुंचे कई किसानों ने वितरण व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए।
रामपुर निवासी किसान जितेंद्र कुमार ने आरोप लगाया कि निजी दुकानदार निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत पर यूरिया बेच रहे हैं। उनका कहना है कि कई दुकानों पर किसानों को जिंक सल्फेट खरीदने की शर्त पर ही यूरिया दी जा रही है। उन्होंने बताया कि वह पिछले तीन दिनों से समिति का चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन हर बार अगले दिन आने की बात कहकर लौटा दिया जाता है।
किसान हरीराम यादव ने बताया कि उन्हें आठ दिन इंतजार करने के बाद भी चार बोरी के स्थान पर केवल दो बोरी यूरिया मिली और प्रति बोरी 266 रुपये के बजाय 275 रुपये वसूले गए।
वहीं भिटारी निवासी दीनानाथ ने कहा कि वह लगातार तीन दिनों से समिति पहुंच रहे हैं, लेकिन अब तक खाद नहीं मिल सकी है। किसान रामू और सत्यबहादुर यादव ने भी खाद वितरण में देरी, पक्षपात और अव्यवस्था के आरोप लगाए।
बी-पैक्स सचिव ने आरोपों को बताया निराधार
सुबेहा बी-पैक्स केंद्र के सचिव राजेश सिंह ने किसानों द्वारा लगाए गए आरोपों को निराधार बताया।
उन्होंने कहा कि खाद का वितरण पूरी तरह टोकन व्यवस्था के अनुसार पारदर्शी तरीके से किया जा रहा है। प्रतिदिन लगभग 40 से 50 किसानों को यूरिया उपलब्ध कराई जाती है। भीड़ अधिक होने के कारण शेष किसानों को अगले दिन बुलाया जाता है।
सचिव ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रति बोरी लिए जाने वाले 10 रुपये अतिरिक्त खाद उतरवाने, पल्लेदारी एवं अन्य व्यवस्थागत खर्चों के लिए हैं। उनका दावा है कि यह राशि पूरी तरह स्वैच्छिक है और किसी किसान पर इसे देने का दबाव नहीं बनाया जाता।
किसानों ने प्रशासन से की हस्तक्षेप की मांग
किसानों का कहना है कि खरीफ सीजन में यूरिया की मांग चरम पर है। ऐसे में यदि समय पर पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध नहीं कराई गई तो फसल उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
किसानों ने जिला प्रशासन और कृषि विभाग से सरकारी समितियों पर पर्याप्त मात्रा में यूरिया उपलब्ध कराने, निजी दुकानों पर औचक निरीक्षण करने तथा ओवररेटिंग और कथित अनियमितताओं की जांच कराने की मांग की है।
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद











