Barabanki News: बाराबंकी सिविल कोर्ट में मान्यता प्राप्त पत्रकार लाला उमेश चंद्र श्रीवास्तव ने 10-12 लोगों पर मारपीट, बंधक बनाने और धमकी देने का आरोप लगाया। CCTV व 112 रिकॉर्ड सुरक्षित कराने की मांग की।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 10 सितम्बर 2026
बाराबंकी में मान्यता प्राप्त पत्रकार को कथित तौर पर बंधक बनाकर मारपीट, धमकी और जानलेवा हमला किए जाने का मामला सामने आया है। घटना ने न केवल पत्रकारों की सुरक्षा बल्कि दीवानी न्यायालय परिसर की सुरक्षा व्यवस्था और जिले की कानून-व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नगर कोतवाली क्षेत्र के लखपेड़ाबाग निवासी मान्यता प्राप्त पत्रकार लाला उमेश चंद्र श्रीवास्तव ने आरोप लगाया है कि 9 सितम्बर 2026 को वह बाराबंकी सिविल कोर्ट में करबला सिविल लाइंस के सामने स्थित विवादित भूमि पर कथित अवैध कब्जे से जुड़े मुकदमों की कवरेज करने पहुंचे थे। इसी दौरान उनके साथ कथित रूप से मारपीट की गई और उन्हें एक कमरे में बंधक बना लिया गया।
पत्रकार का आरोप है कि सिविल लाइन चौकी क्षेत्र अंतर्गत लाइन पुरवा निवासी दबंग मोहम्मद अब्बास, अपने करीब 10-12 साथियों के साथ वहां पहुंचा और उनके साथ मारपीट करते हुए उन्हें धमकाया। पत्रकार के मुताबिक, घटना के बाद से उन्हें स्वयं और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर गंभीर आशंका है।
अदालत में मुकदमों की कवरेज करने पहुंचे थे पत्रकार
पीड़ित पत्रकार लाला उमेश चंद्र श्रीवास्तव के अनुसार, 9 सितम्बर को वह बाराबंकी सिविल कोर्ट में करबला सिविल लाइंस की विवादित भूमि और उससे जुड़े मुकदमों की कवरेज के लिए गए थे।
उनका कहना है कि वह अपने पत्रकारिता संबंधी दायित्व का निर्वहन कर रहे थे। इसी दौरान आरोपित पक्ष के लोग कथित तौर पर उनके पास पहुंचे और उनके साथ विवाद शुरू हुआ।

पत्रकारिता से रोकने और भयभीत करने का लगाया आरोप
पीड़ित पत्रकार ने अपनी शिकायत में घटना को करबला सिविल लाइंस की विवादित भूमि, कथित अवैध कब्जे और उससे जुड़े मुकदमों की रिपोर्टिंग से जोड़ते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं।
उनका आरोप है कि उन्हें मामले की रिपोर्टिंग से रोकने और भयभीत करने के उद्देश्य से घटना को अंजाम दिया गया है। पत्रकार ने आशंका जताई है कि यदि मामले में तत्काल कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में उनके या उनके परिवार के साथ कोई गंभीर घटना हो सकती है।
परिवार की सुरक्षा को लेकर जताई चिंता
पीड़ित पत्रकार के मुताबिक, घटना के बाद से वह स्वयं और उनका परिवार भय की स्थिति में है। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से मामले को गंभीरता से लेते हुए उनकी और उनके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित कराने की मांग की है।
पत्रकार का कहना है कि पत्रकारिता के दौरान यदि किसी रिपोर्ट या कवरेज को लेकर इस तरह का दबाव बनाया जाता है तो यह स्वतंत्र पत्रकारिता और पत्रकारों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है।

112 पर सूचना देने के बाद पुलिस को दी लिखित तहरीर
पत्रकार ने बताया कि घटना के बाद उन्होंने यूपी 112 पर सूचना दी। इसके अलावा नगर कोतवाली और पुलिस अधीक्षक बाराबंकी अर्पित विजयवर्गीय को भी लिखित तहरीर देकर पूरे मामले की जानकारी दी।
तहरीर में पत्रकार ने घटना से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक और अन्य साक्ष्यों को सुरक्षित कराने की मांग की है।
CCTV फुटेज और डायल-112 रिकॉर्ड सुरक्षित कराने की मांग
पीड़ित पत्रकार ने पुलिस से विशेष रूप से दीवानी न्यायालय परिसर और आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज सुरक्षित कराने की मांग की है।
इसके साथ ही उन्होंने डायल-112 से संबंधित रिकॉर्ड, उपलब्ध फोटो-वीडियो और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को भी तत्काल सुरक्षित कराए जाने की मांग की है, ताकि घटना की जांच में इनका इस्तेमाल किया जा सके।
“अभी तक नहीं हुई ठोस कार्रवाई”, पत्रकार ने उठाए सवाल
पत्रकार का दावा है कि घटना की सूचना देने और लिखित तहरीर सौंपने के बावजूद अभी तक पुलिस की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई किए जाने की मांग की है।
पत्रकारों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब पत्रकारों की सुरक्षा और उन्हें स्वतंत्र रूप से रिपोर्टिंग करने के अधिकार को लेकर लगातार चर्चा हो रही है।
घटना को लेकर स्थानीय लोगों में भी आक्रोश है। उन्होंने पत्रकार के साथ हुई इस घटना को गंभीर मामला बताते हुए इसकी निष्पक्ष जांच की मांग है।
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद












