Barabanki Crime: कोठी क्षेत्र में जमीन विवाद में नाद रखने को लेकर विवाद के बाद कार सवार युवक पर तमंचे से फायरिंग का आरोप है।
घायल हंसराज वर्मा की लखनऊ ले जाते समय मौत हो गई।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 18 अगस्त 2026
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में जमीन के पुराने विवाद ने एक बार फिर खूनी रूप ले लिया। कोठी थाना क्षेत्र के रेवतीपुरवा मजरे भिटौरा लखनापुर गांव में जमीन की रंजिश के चलते 50 वर्षीय हंसराज वर्मा की गोली लगने के बाद मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि कोठी थाने जाने के लिए बस का इंतजार कर रहे हंसराज पर कार सवार मनोज कुमार यादव और उसके साथियों ने तमंचे से गोली चलाई और इसके बाद घायल हंसराज के ऊपर कार चढ़ा दी।
गंभीर रूप से घायल हंसराज को पहले सीएचसी सिद्धौर ले जाया गया। वहां से जिला अस्पताल और फिर लखनऊ ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया, लेकिन लखनऊ ले जाते समय रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया।
घटना के बाद गांव में तनाव फैल गया। आक्रोशित परिजनों द्वारा आरोपी के घर पर तोड़फोड़ किए जाने की भी बात सामने आई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और जांच शुरू कर दी।
जमीन की पुरानी रंजिश में फिर भड़की चिंगारी
कोठी थाना क्षेत्र के रेवतीपुरवा मजरे भिटौरा लखनापुर निवासी हंसराज वर्मा (50 वर्ष) पुत्र रामसमुझ वर्मा का गांव के ही मनोज कुमार यादव पुत्र मैकू यादव से जमीन को लेकर पुराना विवाद चल रहा था।
बताया जा रहा है कि जमीन से संबंधित मामला हैदरगढ़ तहसील में विचाराधीन है। इसी विवाद को लेकर दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से रंजिश चली आ रही थी।
मंगलवार को सहन की जमीन, जिसे ग्रामीण तालाब के रकबे से जुड़ा बता रहे हैं, पर नाद रखने को लेकर दोनों पक्षों में फिर विवाद शुरू हो गया। परिजनों के मुताबिक, विवाद सुबह से ही चल रहा था।
‘तीन बार पुलिस को सूचना दी, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई’—परिजनों का आरोप
घटना के बाद मृतक के परिजनों ने पुलिस की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं।
एसपी अर्पित विजयवर्गीय के सामने परिजनों ने आरोप लगाया कि सुबह से चल रहे विवाद के दौरान तीन बार पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस मौके पर पहुंची भी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई किए बिना वापस लौट गई।
परिजनों का कहना है कि यदि समय रहते विवाद को गंभीरता से लिया जाता और दोनों पक्षों को नियंत्रित किया जाता तो शायद मामला इस हद तक नहीं पहुंचता।

थाने जाने के लिए बस का इंतजार कर रहे थे हंसराज, तभी पहुंची कार
परिजनों के मुताबिक, शाम के समय हंसराज वर्मा कोठी थाने जाने के लिए बस का इंतजार कर रहे थे। इसी दौरान मनोज कुमार यादव अपने कुछ साथियों के साथ कार से वहां पहुंचा।
परिजनों का आरोप है कि कार से उतरने के बजाय आरोपियों ने कार का शीशा खोला और तमंचे से हंसराज पर गोली चला दी। गोली लगते ही हंसराज गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर पड़े।
गोली के बाद कार चढ़ाने का भी आरोप, घटनाक्रम ने बढ़ाई सनसनी
परिजनों का आरोप है कि गोली लगने के बाद जब हंसराज जमीन पर गिर पड़े, तब आरोपियों ने उनके ऊपर धारदार हथियार से प्रहार किया और कार चढ़ा दी। इससे हंसराज और गंभीर रूप से घायल हो गए।
गोली की आवाज सुनकर हंसराज के भाई जितेंद्र कुमार समेत परिवार के अन्य लोग मौके की ओर दौड़े। लेकिन तब तक कार सवार आरोपी मौके से फरार हो चुके थे।
घटनास्थल पर हंसराज को खून से लथपथ हालत में देखकर परिवार में चीख-पुकार मच गई।

सीएचसी से जिला अस्पताल और फिर लखनऊ रेफर
परिजन आनन-फानन में हंसराज को लेकर सीएचसी सिद्धौर पहुंचे। हालत गंभीर होने पर चिकित्सकों ने उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया।
इसके बाद उनकी हालत को देखते हुए उन्हें लखनऊ ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया। परिजन उन्हें लखनऊ लेकर जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही उनकी हालत बिगड़ गई और हंसराज ने दम तोड़ दिया। मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया।
मौत के बाद भड़का आक्रोश, आरोपी के घर पर तोड़फोड़
घटना की जानकारी फैलते ही गांव में तनाव का माहौल बन गया। परिजनों और ग्रामीणों में घटना को लेकर भारी आक्रोश देखने को मिला।
आरोप है कि आक्रोशित परिजनों ने आरोपी के घर पर पहुंचकर तोड़फोड़ कर दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया।
एसपी समेत पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे
घटना की सूचना मिलते ही बाराबंकी पुलिस अधीक्षक अर्पित विजयवर्गीय, कोठी थाना प्रभारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह और सीओ हैदरगढ़ समीर सिंह मौके पर पहुंचे।
अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और घटना से जुड़े लोगों से जानकारी जुटाई। पुलिस ने आरोपी की तलाश शुरू कर दी है।
जमीन विवाद से गोलीकांड और फिर मौत तक पहुंचा मामला
जिस विवाद की शुरुआत जमीन और नाद रखने जैसे मुद्दे से हुई, वह कुछ ही घंटों में गोलीकांड और मौत की घटना में बदल गया।
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि जब विवाद सुबह से चल रहा था और परिजनों के अनुसार पुलिस को तीन बार सूचना दी गई थी, तो आखिर स्थिति को समय रहते नियंत्रित क्यों नहीं किया जा सका?
यदि पुलिस को विवाद की जानकारी पहले से थी तो क्या दोनों पक्षों के बीच पर्याप्त निरोधात्मक कार्रवाई की गई थी? क्या विवादित जमीन को लेकर दोनों पक्षों को स्पष्ट रूप से समझाया या पाबंद किया गया था? इन सवालों के जवाब पुलिस जांच के बाद ही सामने आएंगे।
फिलहाल पुलिस के सामने एक ओर घटना में शामिल आरोपियों की गिरफ्तारी की चुनौती है, तो दूसरी ओर घटना के बाद गांव में बने तनाव को नियंत्रित रखना भी चुनौती है।
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद














