Barabanki News: बाराबंकी के लोधेश्वर महादेवा मंदिर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पूजन के दौरान ली गई एक तस्वीर सोशल मीडिया पर राजनीतिक बहस का विषय बन गई है।
दलित नेताओं के पीछे बैठने को लेकर विपक्ष ने भाजपा पर हमला बोला है, जबकि तस्वीर को लेकर सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 20 जुलाई 2026
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में स्थित लोधेश्वर महादेवा मंदिर में सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पूजन-अर्चन के दौरान ली गई एक तस्वीर ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही इस तस्वीर को लेकर विपक्षी दल भाजपा पर दलित नेताओं की उपेक्षा का आरोप लगा रहे हैं, जबकि सोशल मीडिया पर भी तस्वीर को लेकर तीखी प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है।
वायरल तस्वीर के सामने आने के बाद विपक्ष भाजपा के उस दावे पर सवाल उठा रहा है, जिसमें पार्टी स्वयं को दलित हितैषी और सामाजिक समरसता की पक्षधर बताती रही है।
मुख्यमंत्री के साथ आगे कौन बैठे और पीछे कौन?
वायरल तस्वीर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भगवान लोधेश्वर महादेव का दुग्धाभिषेक करते दिखाई दे रहे हैं।
मुख्यमंत्री के एक ओर उत्तर प्रदेश सरकार के खाद्य एवं रसद विभाग के राज्यमंत्री सतीश चंद्र शर्मा बैठे नजर आ रहे हैं, जबकि दूसरी ओर रामनगर विधानसभा के पूर्व विधायक शरद कुमार अवस्थी मौजूद हैं।
इसी तस्वीर में इनके पीछे दूसरी पंक्ति में अनुसूचित जाति (SC) समाज से आने वाले उत्तर प्रदेश सरकार के कारागार (कारागार प्रशासन एवं सुधार) राज्य मंत्री सुरेश राही, उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद बैजनाथ रावत तथा हैदरगढ़ विधानसभा से भाजपा विधायक दिनेश कुमार रावत बैठे दिखाई दे रहे हैं।
यही तस्वीर अब राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गई है।

विपक्ष ने साधा निशाना, लगाए भेदभाव के आरोप
तस्वीर सामने आने के बाद विपक्षी दलों को भाजपा पर हमला बोलने का नया मुद्दा मिल गया है।
विपक्ष का आरोप है कि ब्राह्मण समाज से जुड़े पूर्व विधायक शरद कुमार अवस्थी को मुख्यमंत्री के ठीक बगल में पहली पंक्ति में स्थान दिया गया, जबकि दलित समाज से आने वाले राज्य मंत्री सुरेश राही, एससी-एसटी आयोग के अध्यक्ष बैजनाथ रावत और वर्तमान विधायक दिनेश कुमार रावत को पीछे बैठाया गया।
विपक्षी नेताओं का कहना है कि यदि भाजपा वास्तव में दलित सम्मान और सामाजिक समरसता की राजनीति करती है, तो कार्यक्रम में बैठने की व्यवस्था भी उसी भावना को दर्शानी चाहिए थी।
इसी आधार पर विपक्ष भाजपा पर सामाजिक भेदभाव का आरोप लगाते हुए इसे दलित सम्मान के मुद्दे से जोड़ रहा है।
सोशल मीडिया पर भी तेज हुई बहस
तस्वीर वायरल होने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी तीखीं प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
कई यूजर्स तस्वीर साझा करते हुए सवाल उठा रहे हैं कि क्या भाजपा में आज भी दलित नेताओं को बराबरी का स्थान नहीं मिल पा रहा है? कुछ लोगों ने इसे “भाजपा का असली चेहरा” बताते हुए दलित सम्मान का मुद्दा उठाया है।
हालांकि दूसरी ओर कुछ लोग यह भी तर्क दे रहे हैं कि किसी भी वीवीआईपी कार्यक्रम में बैठने की व्यवस्था प्रोटोकॉल, आयोजन समिति या सुरक्षा कारणों से तय होती है और केवल तस्वीर के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
हालांकि बड़ी संख्या में सोशल मीडिया पोस्ट में इसे भाजपा के “दलित प्रेम” पर सवाल उठाने वाले प्रतीक के रूप में प्रचारित किया जा रहा है।
भाजपा या प्रशासन की ओर से नहीं आया स्पष्टीकरण
समाचार लिखे जाने तक भाजपा, जिला प्रशासन अथवा कार्यक्रम आयोजकों की ओर से इस तस्वीर को लेकर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है।
यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि कार्यक्रम के दौरान मंच अथवा पूजन स्थल पर बैठने की व्यवस्था किस प्रोटोकॉल के तहत निर्धारित की गई थी।
तस्वीर से शुरू हुई नई राजनीतिक बहस
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बाराबंकी दौरा विकास परियोजनाओं के लोकार्पण, शिलान्यास और लोधेश्वर महादेव कॉरिडोर को लेकर चर्चा में रहा, लेकिन अब उसी कार्यक्रम की एक तस्वीर राजनीतिक विवाद का विषय बन गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में विपक्ष इस तस्वीर को दलित सम्मान और सामाजिक प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर भाजपा को घेरने के लिए इस्तेमाल कर सकता है। वहीं भाजपा की ओर से यदि इस पर कोई सफाई आती है, तो तस्वीर को लेकर जारी विवाद नई दिशा ले सकता है।
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद / निरंकार त्रिवेदी












