Barabanki News: बाराबंकी के लोधेश्वर महादेवा धाम में सावनी मेले और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यक्रम की तैयारियों के दौरान सीढ़ी से गिरकर घायल हुए 22 वर्षीय निजी मैकेनिक समीर की इलाज के दौरान मौत हो गई।
घटना के बाद यह सवाल उठ रहा है कि निजी मैकेनिकों को काम पर किसने लगाया था।
विभाग और मंदिर प्रशासन ने जिम्मेदारी से किया इनकार।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 20 जुलाई 2026
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले स्थित लोधेश्वर महादेवा धाम में सावनी मेले एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रस्तावित कार्यक्रम की तैयारियों के दौरान एक दर्दनाक हादसा हो गया। मंदिर परिसर में विद्युत व्यवस्था दुरुस्त करने के दौरान 22 वर्षीय निजी मैकेनिक समीर सीढ़ी से नीचे गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया। कई अस्पतालों में इलाज के बावजूद उसकी जान नहीं बच सकी और सोमवार को घर पहुंचते ही उसकी मृत्यु हो गई।
इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब विद्युत विभाग और मंदिर प्रशासन दोनों ही निजी कर्मचारियों को काम पर लगाने से इनकार कर रहे हैं, तो आखिर इन निजी मैकेनिकों को किसके निर्देश पर मंदिर परिसर में बिजली का कार्य कराया जा रहा था।
मुख्यमंत्री के कार्यक्रम और सावनी मेले की तैयारियों के दौरान हुआ हादसा
जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रस्तावित दौरे तथा सावनी मेले की तैयारियों को लेकर बीते शनिवार से मंदिर परिसर एवं आसपास की विद्युत व्यवस्था को दुरुस्त करने का कार्य चल रहा था। इसके लिए करीब आधा दर्जन निजी मैकेनिक अलग-अलग स्थानों पर कार्य कर रहे थे।
रविवार शाम करीब 4 बजे टीम में शामिल समीर पुत्र मग्गू (22 वर्ष) निवासी ग्राम पट्टी मजरे लोधौरा मंदिर परिसर में सीढ़ी पर चढ़कर बिजली की लाइन ठीक कर रहा था। इसी दौरान अचानक उसका संतुलन बिगड़ गया और वह सीढ़ी से नीचे गिर पड़ा। गिरने से उसके सिर में गंभीर चोटें आईं और वह मौके पर ही लहूलुहान हो गया।
रामनगर से लखनऊ तक चला इलाज, नहीं बच सकी जान
हादसे की सूचना मिलते ही आसपास मौजूद लोगों ने घायल समीर को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रामनगर पहुंचाया।
प्राथमिक उपचार के बाद हालत गंभीर होने पर चिकित्सकों ने उसे जिला अस्पताल बाराबंकी रेफर कर दिया। वहां से डॉक्टरों ने बेहतर इलाज के लिए डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल, लखनऊ भेज दिया।
परिजनों के अनुसार लोहिया अस्पताल में चिकित्सकों ने काफी प्रयास किए, लेकिन उसकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई। इसके बाद उसे एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने स्थिति अत्यंत गंभीर बताते हुए घर ले जाने की सलाह दे दी।
सोमवार को परिजन समीर को घर लेकर पहुंचे, जहां कुछ ही देर बाद उसकी मौत हो गई।
पिता का पहले ही हो चुका था निधन, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
मृतक समीर के बाबा सिराज ने बताया कि समीर दो भाइयों में छोटा था। उसके पिता का करीब 20 वर्ष पहले निधन हो चुका था।
उन्होंने बताया कि समीर का बड़ा भाई इरशाद सऊदी अरब में कार्यरत है और उसके लौटने के बाद ही अंतिम संस्कार किया जाएगा। फिलहाल परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया है।
सबसे बड़ा सवाल- निजी मैकेनिकों को काम पर किसने लगाया?
समीर की मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि मंदिर परिसर में बिजली का कार्य कर रहे निजी मैकेनिकों को आखिर किसने नियुक्त किया था।
मंदिर प्रशासन ने जिम्मेदारी से किया इनकार
लोधेश्वर महादेवा मठ के रिसीवर हरि प्रसाद द्विवेदी ने स्पष्ट कहा कि मंदिर की ओर से किसी भी व्यक्ति को विद्युत कार्य के लिए नहीं बुलाया गया था।
ग्राम प्रधान बोले- हमें भी नहीं है जानकारी
ग्राम प्रधान अजय तिवारी उर्फ राजन ने बताया कि निजी मैकेनिक किसके निर्देश पर कार्य कर रहे थे, इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है।
बिजली विभाग ने भी झाड़ा पल्ला
अवर अभियंता विद्युत, रामनगर ने बताया कि विद्युत विभाग की ओर से किसी भी निजी कर्मचारी को महादेवा में बिजली व्यवस्था ठीक करने के लिए नहीं लगाया गया था।
उन्होंने कहा कि मंदिर एवं मंदिर परिसर की देखरेख मंदिर प्रशासन करता है और विभाग की ओर से ऐसे किसी कार्य के लिए निजी कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं की गई।
जिम्मेदारी तय करने की उठी मांग
घटना के बाद स्थानीय लोगों और परिजनों में सवाल उठ रहे हैं कि यदि किसी भी विभाग ने निजी कर्मचारियों को अधिकृत नहीं किया था, तो आखिर किसके कहने पर यह कार्य कराया जा रहा था।
लोगों का कहना है कि वीवीआईपी कार्यक्रम की तैयारियों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी गंभीर लापरवाही है। यदि उचित सुरक्षा उपकरण और अधिकृत व्यवस्था होती, तो संभवतः इस युवा की जान बचाई जा सकती थी।
अब लोगों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि निजी मैकेनिकों को किसने लगाया और सुरक्षा मानकों का पालन क्यों नहीं किया गया।
रिपोर्ट – निरंकार त्रिवेदी











