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बाराबंकी में नाबालिग से छेड़छाड़ के बाद मां की पिटाई: शिकायत पर सुलह का पुलिसिया दबाव! 48 घंटे बाद भी कार्रवाई नहीं, एसपी से शिकायत पर मिला भरोसा 

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बाराबंकी में नाबालिग से छेड़छाड़ के विरोध पर मां की बेरहमी से पिटाई का मामला सामने आया है।

48 घंटे बाद भी पुलिस कार्रवाई न होने और सुलह का दबाव बनाने का आरोप।

पीड़िता ने एसपी से शिकायत की, जिसके बाद कार्रवाई का आश्वासन मिला है।

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बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 16 अप्रैल 2026

महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा को लेकर चलाए जा रहे “मिशन शक्ति” अभियान के दावों के बीच एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने इन दावों की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

नगर कोतवाली क्षेत्र की सिटी चौकी अंतर्गत नई बस्ती नबीगंज में एक नाबालिग किशोरी के साथ छेड़छाड़ और उसके बाद शिकायत करने पर उसकी मां की बेरहमी से पिटाई का मामला प्रकाश में आया है।

नाबालिग से छेड़छाड़, विरोध करने पर परिजनों ने पीटा

पीड़िता के अनुसार, उसकी 16 वर्षीय बेटी के साथ उस समय छेड़छाड़ की गई जब वह शाम को घर लौट रही थी। आरोप है कि मोहल्ले के ही कुछ युवकों ने रास्ता रोककर उसका हाथ पकड़ लिया और अभद्रता की कोशिश की।

किसी तरह खुद को बचाकर घर पहुंची किशोरी ने जब पूरी घटना अपनी मां को बताई, तो मां तुरंत शिकायत लेकर आरोपियों के घर पहुंची। लेकिन वहां न्याय मिलने के बजाय हालात और बिगड़ गए।

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आरोप है कि आरोपियों के परिजनों ने ही महिला को बेरहमी से पीट दिया, जिससे उसे गंभीर चोटें आईं और शरीर के कई हिस्सों में टांके लगाने पड़े।

48 घंटे बाद भी FIR नहीं, उल्टा दबाव के आरोप

घटना के बाद पीड़िता ने नगर कोतवाली में लिखित शिकायत दी, लेकिन आरोप है कि 48 घंटे बीत जाने के बावजूद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

सबसे गंभीर आरोप यह है कि पुलिस कार्रवाई करने के बजाय पीड़ित परिवार पर ही समझौते का दबाव बना रही है। इससे पीड़ित परिवार खुद को असुरक्षित और न्याय से वंचित महसूस कर रहा है।

रात 1 बजे बयान लेने पहुंची पुलिस, उठे सवाल

मामले में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई—पीड़िता का आरोप है कि पुलिस रात करीब 1 बजे उनके घर बयान लेने पहुंची।

इस घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं:

  • क्या यह सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है?
  • या फिर पीड़ित परिवार पर दबाव बनाने की कोशिश?
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इससे परिवार में भय और असुरक्षा का माहौल और गहरा गया है।

स्थानीय दबंग का संरक्षण, कार्रवाई में देरी का कारण?

पीड़िता ने आरोप लगाया है कि आरोपियों को एक स्थानीय दबंग का संरक्षण प्राप्त है, जो हाल ही में जमानत पर जेल से बाहर आया है।

इसी कारण पूरे मामले में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हो पा रही है और पुलिस भी प्रभाव में नजर आ रही है।

एसपी से शिकायत के बाद जगी उम्मीद

आखिरकार पीड़िता ने पुलिस अधीक्षक से मिलकर अपनी पूरी आपबीती सुनाई। एसपी स्तर से मामले में प्राथमिकी दर्ज कर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है।

इससे पीड़ित परिवार को न्याय की एक नई उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन सवाल अब भी कायम है कि स्थानीय स्तर पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

पुलिस का पक्ष—जांच जारी, सभी आरोप सही नहीं

वहीं, इस मामले में क्षेत्राधिकारी (सीओ सिटी) का कहना है कि:

  • मामले की जांच की जा रही है
  • पीड़िता के सभी आरोप सही नहीं हैं

हालांकि, रात में बयान लेने के सवाल पर उन्होंने अनभिज्ञता जताई।

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बड़ा सवाल—क्या मिलेगा न्याय या दबाव में दब जाएगा मामला?

यह घटना केवल एक परिवार की पीड़ा नहीं, बल्कि उस सिस्टम का आईना है जहां न्याय मांगने वाला ही दबाव में आ जाता है।

छेड़छाड़ जैसे गंभीर मामलों में भी अगर समय रहते कार्रवाई नहीं होती, तो यह:

कानून व्यवस्था पर सवाल है

और “मिशन शक्ति” जैसे अभियानों की विश्वसनीयता पर सीधा प्रहार

अब सबसे बड़ा सवाल यही है—

  • क्या पुलिस अधीक्षक का आश्वासन जमीनी हकीकत में बदलेगा?
  • या फिर यह मामला भी प्रभाव और दबाव के बीच फाइलों में सिमट जाएगा?
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद / उस्मान

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