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Barabanki: धार्मिक झंडा लगाने पर धारदार हथियार से जानलेवा हमला, कोर्ट ने आरोपी को सुनाई 7 साल की सजा; जुर्माना भी लगाया

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Barabanki: धार्मिक झंडा लगाने पर धारदार हथियार से जानलेवा हमला करने के मामले में अदालत ने आरोपी को 7 साल की सजा सुनाई है।

जिला एवं सत्र न्यायालय ने दोषी पर 7 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।

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बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 10 अप्रैल 2026

बाराबंकी में जान से मारने के प्रयास के एक गंभीर मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए 7 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है।

यह फैसला जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रतिमा श्रीवास्तव की अदालत ने सुनाया। इसके साथ ही दोषी पर ₹7,000 का अर्थदंड भी लगाया गया है।

धारदार हंसिया से किया था हमला

मामला कोतवाली देवा क्षेत्र के मोहल्ला कटरा का है। पीड़ित पक्ष की ओर से चन्दन सिंह पुत्र रामप्रसाद ने पुलिस को दी गई तहरीर में बताया कि 2 मार्च 2025 को उसका भाई कल्याण सिंह मजदूरों के लिए समोसे लेने जा रहा था।

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इसी दौरान मदरसे के पास बैठे नूरीनगर निवासी शोएब पुत्र खालिक ने उस पर धारदार हंसिया से हमला कर दिया।

हमले में कल्याण सिंह के गले और ठुड्डी के पास गंभीर चोटें आईं, जिससे उसकी हालत नाजुक हो गई।

घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया था।

पुलिस कार्रवाई और कोर्ट में पेश हुआ चार्जशीट

घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

तत्कालीन विवेचक द्वारा जांच पूरी कर आरोपी के खिलाफ जानलेवा हमले सहित अन्य धाराओं में आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया।

गवाहों के बयान और बहस के बाद आया फैसला

न्यायालय में सुनवाई के दौरान गवाहों के बयान और दोनों पक्षों की दलीलों को विस्तार से सुना गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए 7 वर्ष के कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई।

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रंजिश को बताया गया हमले की वजह

सुनवाई के दौरान घायल कल्याण सिंह ने बताया कि वह बजरंग दल से जुड़ा है और अपने घर पर धार्मिक ध्वज व संगठन के झंडे लगाता था।

उसके अनुसार, आरोपी शोएब इसका विरोध करता था और इसी रंजिश के चलते उसने जानलेवा हमला किया।

कोर्ट का संदेश—गंभीर अपराधों पर सख्ती

अदालत के इस फैसले को गंभीर अपराधों के खिलाफ सख्त रुख के रूप में देखा जा रहा है। इससे साफ संदेश जाता है कि जानलेवा हमलों जैसे मामलों में दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

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रिपोर्ट – मंसूफ अहमद

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Author: Kamran Alvi

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