बाराबंकी की नवाबगंज तहसील में करोड़ों रुपये की सरकारी बंजर भूमि पर कब्जा कराने का गंभीर मामला सामने आया है।
ग्राम प्रधान ने तहसील अधिकारियों पर रसूखदारों को संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से निष्पक्ष जांच और सरकारी जमीन बचाने की मांग की।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 27 जून 2026
उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार लगातार सरकारी जमीनों को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए बुलडोजर अभियान चला रही है। लेकिन राजधानी लखनऊ से सटे बाराबंकी जिले में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि नवाबगंज तहसील के जिम्मेदार अधिकारी करोड़ों रुपये कीमत की ग्राम समाज की बंजर भूमि को बचाने के बजाय रसूखदारों को कब्जा दिलाने में जुटे हैं।
ग्राम पंचायत तीरगांव के प्रधान राम सुमिरन का आरोप है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर रहा। उल्टा राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध दिखाई दे रही है। अब ग्राम प्रधान ने सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हस्तक्षेप कर सरकारी भूमि बचाने की मांग की है।
करोड़ों की सरकारी बंजर भूमि पर कब्जे का आरोप
पूरा मामला नवाबगंज तहसील की ग्राम पंचायत तीरगांव से जुड़ा है। यहां गाटा संख्या 1709ज्ञ/35, रकबा 13.6830 हेक्टेयर राजस्व अभिलेखों में बंजर (ग्राम समाज) भूमि के रूप में दर्ज है।
ग्राम प्रधान राम सुमिरन के अनुसार यह जमीन ग्राम समाज की संपत्ति है और दशकों से ग्रामसभा के कब्जे में रही है। आरोप है कि लखनऊ निवासी जयकेश त्रिपाठी, होलियामऊ निवासी बेचनलाल पुत्र प्रभु तथा उनके सहयोगी इस सरकारी भूमि पर जबरन कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं।
प्रधान का कहना है कि उक्त लोग मुजतबा तारिक पुत्र मोहम्मद तारिक के वर्ष 2002 में कराए गए पुराने कब्जाविहीन बैनामों का सहारा लेकर ग्राम समाज की जमीन पर कब्जा करना चाहते हैं।

पहले भी हो चुकी थी कब्जे की कोशिश
ग्राम प्रधान के मुताबिक वर्ष 2002 में मुजतबा तारिक ने कई अलग-अलग भूमि के बैनामे कराए थे, लेकिन उन्हें कभी वास्तविक कब्जा नहीं मिला।
प्रधान का दावा है कि इससे पहले भी इन्हीं बैनामों के आधार पर सरकारी बंजर भूमि पर कब्जा करने की कोशिश की गई थी। उस समय तत्कालीन उपजिलाधिकारी नवाबगंज ने मौके पर पहुंचकर कब्जा रुकवाया था और सरकारी जमीन को सुरक्षित कराया था।
SCR में शामिल होने के बाद शुरू हुई नई कवायद
इसके बाद कई वर्षों तक सरकारी बंजर भूमि पर कब्जा करने का कोई प्रयास नहीं हुआ। लेकिन जैसे ही प्रस्तावित लखनऊ स्टेट कैपिटल रीजन (SCR) में ग्राम पंचायत तीरगांव को शामिल किए जाने की चर्चा तेज हुई और क्षेत्र की जमीनों की कीमतों में तेजी से उछाल आया, वैसे ही करोड़ों रुपये मूल्य की इस बेशकीमती सरकारी भूमि पर रसूखदारों की नजर फिर टिक गई।
ग्राम प्रधान का आरोप है कि इसी के बाद सुनियोजित तरीके से कब्जे की नई साजिश रची गई। इसके तहत 8 अप्रैल 2026 को जयकेश त्रिपाठी, बेचनलाल और उनके समर्थकों ने ग्राम समाज की बंजर भूमि पर अवैध कब्जे की नीयत से बोरिंग मशीन, पाइप और अन्य निर्माण सामग्री मौके पर पहुंचा दी तथा जमीन पर स्थायी कब्जे की तैयारी शुरू कर दी।
जब उन्होंने ग्राम प्रधान होने के नाते इसका विरोध किया तो आरोपियों ने दबंगई दिखाते हुए काम जारी रखा।
अगले दिन 9 अप्रैल 2026 को ग्राम प्रधान ने तत्कालीन एसडीएम आनंद तिवारी सहित अन्य अधिकारियों को लिखित शिकायत देकर बोरिंग रुकवाने की मांग की, लेकिन कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा और बोरिंग का कार्य लगातार चलता रहा।


शिकायत के बाद भी नहीं जागा प्रशासन
ग्राम प्रधान के अनुसार जब स्थानीय स्तर पर सुनवाई नहीं हुई तो उन्होंने मीडिया का सहारा लिया।
9 अप्रैल को एक वरिष्ठ पत्रकार ने बोरिंग का वीडियो और शिकायत पत्र एसडीएम तथा तहसीलदार के सीयूजी नंबर पर भेजकर सरकारी बंजर भूमि पर हो रहे कार्य को तत्काल रुकवाने का अनुरोध किया। इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।
अगले दिन 10 अप्रैल को दोबारा वीडियो भेजे गए और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर जिलाधिकारी बाराबंकी तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को टैग करते हुए शिकायत की गई।
इसके बाद देर रात तहसीलदार भूपेंद्र विक्रम सिंह ने राजस्व टीम को मौके पर भेजा, लेकिन तब तक बोरिंग पूरी हो चुकी थी। आरोप है कि मौके पर पहुंचे राजस्वकर्मियों ने बोरिंग हटवाने के बजाय केवल फोटो खिंचवाए और वापस लौट गए।
फिर शुरू हुआ कब्जा दिलाने का नया खेल
ग्राम प्रधान का आरोप है कि कुछ समय तक मामला शांत रहा, लेकिन बाद में एक बार फिर सरकारी भूमि पर कब्जा दिलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि मुजतबा तारिक द्वारा बिना धारा-24 का वाद दर्ज किए बिना ही राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई और भूमि की पैमाइश शुरू कर दी।
पैमाइश के दौरान मौके पर बची ज़मीन का कुल क्षेत्रफल लगभग 14 हेक्टेयर निकला।
प्रधान का आरोप है कि राजस्व टीम द्वारा 13.6830 हेक्टेयर सरकारी बंजर क्षेत्र को सुरक्षित करने के बजाय करीब 5 हेक्टेयर भूमि रसूखदारों को दिलाने की तैयारी शुरू कर दी गई।
नियमों को ताक पर रखने का आरोप
ग्राम प्रधान राम सुमिरन का कहना है कि नियमानुसार अधिकारियों की पहली जिम्मेदारी सरकारी भूमि को चिन्हित कर उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
उनका आरोप है कि राजस्व अधिकारी ऐसा करने के बजाय लगभग 25 वर्ष पुराने कब्जाविहीन बैनामों के आधार पर निजी व्यक्तियों को कब्जा दिलाने की कोशिश कर रहे हैं।
यदि ऐसा होता है तो ग्रामसभा की करोड़ों रुपये मूल्य की जमीन हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी।


डीएम से भी की शिकायत, नहीं हुई कार्रवाई
ग्राम प्रधान ने बताया कि 12 जून 2026 को उन्होंने स्वयं बाराबंकी पहुंचकर जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह तथा एसडीएम गुंजिता अग्रवाल को लिखित शिकायत दी।
इसके बावजूद अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
दूसरे हल्के के कानूनगो पर भी लगे आरोप
ग्राम प्रधान का आरोप है कि शुक्रवार को दूसरे हल्के के कानूनगो महेंद्र कुमार मिश्रा अपने मुंशी पंकज यादव के साथ मौके पर पहुंचे और सरकारी बंजर भूमि पर चूना डलवाकर रसूखदारों को कब्जा दिलाने की कार्रवाई शुरू कर दी।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरी प्रक्रिया की सूचना न तो ग्राम प्रधान को दी गई और न ही संबंधित हल्के के लेखपाल को।
प्रधान का कहना है कि जब उन्होंने तीरगांव के लेखपाल विवेक यादव और कानूनगो गोस्वामी नाथ सोनी से जानकारी ली तो उन्होंने भी इस कार्रवाई की जानकारी होने से इनकार कर दिया।

अगले ही दिन शुरू हो गई कब्ज़े की प्रक्रिया
ग्राम प्रधान ने बताया कि उसके अगले ही दिन शनिवार को जमीन पर कब्जे की प्रक्रिया शुरू हो गई। रसूखदारों ने कई ट्रैक्टरों के माध्यम से दशकों से ग्राम पंचायत के कब्जे वाली बंजर भूमि पर उगी झाड़ियों को साफ कराने का कार्य शुरू कर दिया। एसडीएम और तहसीलदार नवाबगंज के सीयूजी नंबरों पर इसकी वीडियो भी भेजी गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

ग्राम पंचायत को करोड़ों का नुकसान होने की आशंका
ग्राम प्रधान का कहना है कि यदि सरकारी बंजर भूमि पर अवैध कब्जा हो गया तो ग्राम पंचायत को करोड़ों रुपये की संपत्ति का नुकसान होगा।
उन्होंने कहा कि भविष्य में स्कूल, पंचायत भवन, खेल मैदान, सामुदायिक भवन, तालाब, सार्वजनिक पार्क और अन्य सरकारी योजनाओं के लिए भूमि उपलब्ध नहीं रहेगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लगाई गुहार
ग्राम प्रधान राम सुमिरन ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि गाटा संख्या 1709ज्ञ/35, रकबा 13.6830 हेक्टेयर की पूरी सरकारी बंजर भूमि की निष्पक्ष पैमाइश कराई जाए।
उन्होंने मांग की है कि पहले सरकारी भूमि को सुरक्षित कराया जाए और उसके बाद यदि किसी खातेदार का वैध अधिकार बनता हो तो नियमानुसार अलग से कार्रवाई की जाए।
नहीं उठा एसडीएम का फोन, डीएम ने दिया कार्रवाई का आश्वासन
मामले पर संबंधित राजस्व अधिकारियों का पक्ष जानने के लिए एसडीएम नवाबगंज गुंजिता अग्रवाल के सीयूजी नंबर पर कॉल की गई, लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुई। दोबारा प्रयास करने पर किसी कर्मचारी ने कॉल रिसीव कर बताया कि मैडम मीटिंग में है। इसके करीब एक घंटे बाद जब पुनः उनसे संपर्क करने का प्रयास किया गया तो घंटी जाने के बावजूद उनका फोन नहीं उठा।
वहीं डीएम बाराबंकी ईशान प्रताप सिंह से संपर्क करने पर उन्होंने बताया कि मामले की जांच कराकर बंजर भूमि को सुरक्षित कराया जाएगा। अब देखने वाली बात यह होगी कि डीएम बाराबंकी के आश्वासन के बाद करोड़ों की सरकारी जमीन सुरक्षित बच पाती है या नहीं?
ग्रामीणों में बढ़ रहा आक्रोश
ग्रामीणों का कहना है कि यदि सरकारी बंजर भूमि को ही सुरक्षित नहीं रखा जा सका तो शासन की अतिक्रमण हटाओ मुहिम का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों और अवैध कब्जे के प्रयास में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद











