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15 छात्रों की मौत के बाद जागा प्रशासन! बाराबंकी में कोचिंग संस्थानों की जांच, अधिकारियों ने बताया “ऑल इज वेल”; जमीनी हकीकत पर उठे सवाल

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लखनऊ अग्निकांड में 15 छात्रों की मौत के बाद बाराबंकी में कोचिंग संस्थानों का औचक निरीक्षण किया गया।

प्रशासन ने किसी भी अनियमितता से इनकार किया, लेकिन जमीनी हकीकत और मीडिया रिपोर्ट्स कई सवाल खड़े कर रही हैं।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 23 जून 2026

लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांड में 15 छात्रों की दर्दनाक मौत के बाद प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इसी घटना के बाद लखनऊ से सटे बाराबंकी जिले में भी प्रशासन हरकत में आया और शहर में संचालित विभिन्न कोचिंग संस्थानों का औचक निरीक्षण किया गया। हालांकि निरीक्षण के बाद जारी सरकारी प्रेस नोट में किसी भी प्रकार की अनियमितता न मिलने का दावा किया गया, लेकिन स्थानीय स्तर पर सामने आ रही तस्वीरें और विभिन्न मीडिया संस्थानों की पड़ताल कई सवाल खड़े कर रही हैं।

ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या यह अभियान वास्तव में छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए चलाया गया या फिर लखनऊ हादसे के बाद महज औपचारिकता निभाने तक सीमित रहा।

ज्वाइंट मजिस्ट्रेट के नेतृत्व में कई कोचिंग संस्थानों का हुआ निरीक्षण

तहसील प्रशासन द्वारा जारी जानकारी के अनुसार सोमवार, 23 जून 2026 को ज्वाइंट मजिस्ट्रेट एवं उपजिलाधिकारी नवाबगंज गुंजिता अग्रवाल के नेतृत्व में नगर क्षेत्र के प्रमुख कोचिंग संस्थानों का औचक निरीक्षण किया गया।

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निरीक्षण टीम में पुलिस क्षेत्राधिकारी नगर संगम कुमार, तहसीलदार नवाबगंज भूपेंद्र विक्रम सिंह तथा मुख्य अग्निशमन अधिकारी (CFO) भी शामिल रहे।

टीम ने शहर में संचालित SKD Academy, Gurukul Academy और Mahendra Academy समेत कई संस्थानों का निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा की।

अग्निशमन व्यवस्था, इमरजेंसी एग्जिट और भवन सुरक्षा की हुई जांच

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने निम्न बिंदुओं पर विशेष रूप से जांच की—

  • विद्यार्थियों की सुरक्षा व्यवस्था
  • अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता और कार्यशीलता
  • भवन की संरचनात्मक सुरक्षा
  • आपातकालीन निकास (Emergency Exit)
  • विद्युत सुरक्षा व्यवस्था
  • आपदा की स्थिति में निकासी प्रबंधन

अधिकारियों ने संस्थान संचालकों को शासन द्वारा निर्धारित सुरक्षा मानकों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

प्रशासन का दावा—कहीं नहीं मिली कोई अनियमितता

सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि निरीक्षण के बाद जारी प्रेस नोट में किसी भी कोचिंग संस्थान में किसी प्रकार की कमी या अनियमितता मिलने का उल्लेख नहीं किया गया।

प्रेस नोट के अनुसार सभी संस्थानों को केवल सुरक्षा व्यवस्थाओं को अद्यतन रखने और निर्धारित मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

मीडिया की पड़ताल में सामने आई अलग तस्वीर

जहां प्रशासनिक रिपोर्ट में सब कुछ संतोषजनक बताया गया, वहीं विभिन्न न्यूज चैनलों और मीडिया संस्थानों द्वारा किए गए रियलिटी चेक में कई कोचिंग संस्थानों में सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर खामियां सामने आने की चर्चा है।

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बताया जा रहा है कि कई संस्थानों में पर्याप्त आपातकालीन निकास व्यवस्था नहीं है, जबकि कुछ जगहों पर अग्निशमन उपकरणों की स्थिति भी सवालों के घेरे में है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि प्रशासन द्वारा नहीं की गई है।

क्या निरीक्षण अभियान केवल खानापूर्ति था?

लखनऊ अग्निकांड जैसी भयावह घटना के बाद छात्रों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। ऐसे में जब निरीक्षण के बावजूद किसी भी संस्थान में कोई कमी नहीं मिलती, तो आम लोगों के बीच यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या जांच पूरी गंभीरता से की गई थी या फिर यह अभियान केवल औपचारिकता बनकर रह गया।

एसडीएम का नहीं उठा फ़ोन, नहीं मिल सका पक्ष 

लखनऊ जैसे बड़े शहर में सुरक्षा मानकों की अनदेखी के चलते 15 छात्रों की जान चली गई, ऐसे में यह सवाल स्वाभाविक रूप से उठता है कि क्या बाराबंकी के सभी कोचिंग संस्थान वास्तव में पूरी तरह सुरक्षित और मानकों के अनुरूप संचालित हो रहे हैं?

निरीक्षण के दौरान क्या किसी भी संस्थान में कोई अनियमितता नहीं मिली? इसकी विस्तृत जानकारी प्राप्त करने के लिए उपजिलाधिकारी नवाबगंज गुंजिता अग्रवाल के सीयूजी नंबर पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनके द्वारा कॉल रिसीव नहीं की गई। इसके चलते उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका।

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छात्रों की सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता

लखनऊ अग्निकांड के बाद प्रदेश भर में कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था चर्चा का विषय बनी हुई है। बाराबंकी में भी हजारों छात्र विभिन्न कोचिंग संस्थानों में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। ऐसे में अभिभावकों और छात्रों की मांग है कि प्रशासन केवल कागजी जांच तक सीमित न रहे बल्कि वास्तविक रूप से सुरक्षा मानकों का अनुपालन सुनिश्चित कराए ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सके।

रिपोर्ट – मंसूफ अहमद 

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