बाराबंकी के बदोसराय में स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की बड़ी कार्रवाई।
6 से अधिक अवैध अस्पताल और डायग्नोस्टिक सेंटर सील, OT में एक्सपायरी दवाएं मिलीं, डिग्रीधारी डॉक्टर नहीं मिले।
तैफी डायग्नोस्टिक सेंटर संचालक पुलिस हिरासत में।
बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 27 जून 2026
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन ने अवैध रूप से संचालित निजी अस्पतालों एवं डायग्नोस्टिक सेंटरों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए बदोसराय कस्बे में छह से अधिक मानकविहीन अस्पतालों और जांच केंद्रों को सील कर दिया। संयुक्त छापेमारी के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। कई अस्पताल बेसमेंट में संचालित मिले, जहां न तो पर्याप्त वेंटिलेशन था और न ही आपातकालीन निकास (Emergency Exit) की व्यवस्था। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि कुछ ऑपरेशन थिएटरों (OT) में एक्सपायरी दवाएं भी बरामद हुईं।
स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई से क्षेत्र में हड़कंप मच गया। कार्रवाई की भनक लगते ही कई अस्पताल संचालक अपने संस्थान बंद कर मौके से फरार हो गए।
बेसमेंट में चल रहे थे अस्पताल, सुरक्षा मानकों की खुली धज्जियां
उप जिलाधिकारी और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने बदोसराय कस्बे में संचालित निजी अस्पतालों और डायग्नोस्टिक सेंटरों का औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान अधिकांश अस्पताल बेसमेंट में संचालित पाए गए, जहां मरीजों की सुरक्षा के लिए आवश्यक मानकों का पूरी तरह अभाव था।
निरीक्षण में सामने आया कि कई अस्पतालों में पर्याप्त वेंटिलेशन नहीं था, आपातकालीन निकासी की कोई व्यवस्था नहीं थी और अग्नि सुरक्षा मानकों का भी पालन नहीं किया जा रहा था। ऐसी स्थिति में किसी भी आपदा के दौरान मरीजों की जान जोखिम में पड़ सकती थी।
ऑपरेशन थिएटर में मिली एक्सपायरी दवाएं, नहीं मिले डिग्रीधारी डॉक्टर
संयुक्त टीम की जांच में कई अस्पतालों के ऑपरेशन थिएटर (OT) से एक्सपायरी दवाएं बरामद हुईं। इसके अलावा सबसे गंभीर तथ्य यह सामने आया कि निरीक्षण के दौरान किसी भी अस्पताल या डायग्नोस्टिक सेंटर में डिग्रीधारी चिकित्सक मौजूद नहीं मिले।
प्रारंभिक जांच में पता चला कि अधिकांश संस्थान झोलाछाप डॉक्टरों के भरोसे संचालित किए जा रहे थे, जहां मरीजों का इलाज बिना निर्धारित मानकों और विशेषज्ञ चिकित्सकों के किया जा रहा था।
तैफी डायग्नोस्टिक सेंटर पर पहले भी लग चुके हैं गंभीर आरोप
कार्रवाई के दौरान तैफी डायग्नोस्टिक सेंटर भी प्रशासन के निशाने पर रहा। अधिकारियों के अनुसार इस सेंटर के खिलाफ लंबे समय से गलत रिपोर्ट देने की शिकायतें मिल रही थीं।
हाल ही में सेंटर संचालक पर बदोसराय निवासी जितेंद्र गुप्ता के साथ मारपीट करने का भी आरोप लगा था। जितेंद्र गुप्ता अपने बेटे की मेडिकल रिपोर्ट लेने पहुंचे थे, जहां उनके साथ कथित रूप से अभद्रता और मारपीट की गई थी।
प्रशासन ने मामले को गंभीर मानते हुए सेंटर संचालक को पुलिस हिरासत में भेजकर आवश्यक कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
कार्रवाई से मचा हड़कंप, कई संचालक अस्पताल छोड़कर फरार
स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई की सूचना मिलते ही बदोसराय क्षेत्र के कई निजी अस्पताल संचालकों में अफरा-तफरी मच गई। कई लोगों ने अपने अस्पतालों के शटर गिरा दिए और मौके से फरार हो गए।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बिना पंजीकरण, बिना मानकों और बिना योग्य चिकित्सकों के संचालित अस्पतालों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा।
मरीजों की सुरक्षा से समझौता नहीं, आगे भी चलेगा अभियान
प्रशासन का कहना है कि मरीजों के जीवन से खिलवाड़ करने वाले किसी भी अस्पताल या डायग्नोस्टिक सेंटर को बख्शा नहीं जाएगा। जिन संस्थानों में गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं, उनके खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि इलाज कराने से पहले अस्पताल और चिकित्सक की वैधता की जानकारी अवश्य करें तथा किसी भी संदिग्ध अस्पताल की सूचना प्रशासन को दें।
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद












