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बाराबंकी में अतिक्रमण हटाने की मांग करना किसान नेता को पड़ा भारी! ‘बेलगाम सिस्टम’ ने शिकायतकर्ता को ही थमा दिया ₹1.68 लाख का नोटिस, मचा हडकंप

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बाराबंकी के रामनगर में सार्वजनिक रास्ते से अतिक्रमण हटाने की मांग करने वाले किसान नेता गुलजार हुसैन को ₹1.68 लाख का नोटिस थमा दिया गया।

पीड़ित ने लेखपाल पर फर्जी रिपोर्ट, साठगांठ और प्रशासनिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं तथा निष्पक्ष जांच की मांग की है।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 08 जुलाई 2026

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकारी जमीनों और सार्वजनिक रास्तों से अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए लगातार सख्त कार्रवाई के निर्देश देते रहे हैं। लेकिन राजधानी लखनऊ से सटे बाराबंकी जिले में सामने आया एक मामला प्रशासनिक कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

आरोप है कि सार्वजनिक रास्ते पर हुए अवैध कब्जे की शिकायत करना ही एक किसान नेता को भारी पड़ गया। शिकायत के बाद अतिक्रमण हटाने के बजाय शिकायतकर्ता को ही ₹1.68 लाख की क्षतिपूर्ति का नोटिस थमा दिया गया। पीड़ित का आरोप है कि राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत के चलते उसकी शिकायत दबा दी गई और उसे ही प्रताड़ित किया जा रहा है।

सार्वजनिक रास्ते से अतिक्रमण हटाने की मांग के बाद शुरू हुई कार्रवाई

रामनगर तहसील के गगियापुर गांव निवासी गुलजार हुसैन, जो भारतीय किसान यूनियन के ब्लॉक अध्यक्ष हैं, का कहना है कि गांव के गाटा संख्या 233, जो राजस्व अभिलेखों में सार्वजनिक रास्ता दर्ज है, पर गांव के ही शेख मुजीबुर्रहमान ने दो पिपरमिंट टंकियां रखकर अवैध कब्जा कर लिया है।

उनका कहना है कि इस कब्जे के कारण ग्रामीणों को वर्षों से आवागमन में भारी परेशानी हो रही है। इसी समस्या को लेकर जून 2025 में उन्होंने सैकड़ों ग्रामीणों के साथ तत्कालीन एसडीएम रामनगर गुंजिता अग्रवाल को ज्ञापन सौंपकर रास्ता खाली कराने की मांग की थी।

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शिकायतकर्ता को ही थमा दिया ₹1.68 लाख का नोटिस

गुलजार हुसैन का आरोप है कि जनहित में उठाई गई इस मांग के बाद कार्रवाई अतिक्रमणकारियों पर नहीं बल्कि उन्हीं पर शुरू कर दी गई।

उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्रीय लेखपाल विनीत कुमार की गलत आख्या के आधार पर उन्हें ही सार्वजनिक रास्ते की भूमि पर स्थित एक पुरानी मजार का कब्जेदार बताते हुए उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 की धारा 67(1) के तहत वाद दायर कर ₹1.68 लाख की क्षतिपूर्ति जमा करने का नोटिस भी जारी कर दिया गया।

पीड़ित का कहना है कि जिस मजार को आधार बनाकर नोटिस दिया गया है, वह करीब 200 वर्ष पुरानी है और उनके परिवार का उससे कभी कोई संबंध नहीं रहा। उनका दावा है कि यह मजार उनके पिता के जन्म से भी पहले से उसी स्थान पर मौजूद है।

डीएम से लेकर एसडीएम तक लगाई गुहार, फिर भी नहीं मिली राहत

किसान नेता का कहना है कि नोटिस मिलने के बाद उन्होंने तहसीलदार विपुल सिंह, उप जिलाधिकारी आनंद तिवारी, जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह सहित कई अधिकारियों को प्रार्थना पत्र देकर निष्पक्ष जांच की मांग की।

उन्होंने आईजीआरएस पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई, लेकिन हर बार जांच उसी लेखपाल को सौंप दी गई जिसने उनके खिलाफ रिपोर्ट तैयार कर नोटिस जारी किया था।

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गुलजार हुसैन का आरोप है कि संबंधित लेखपाल ने अवैध कब्जे के आरोपी से साठगांठ कर गलत रिपोर्ट लगाई और उनकी सभी शिकायतों का निस्तारण भी उसी रिपोर्ट के आधार पर करा दिया गया।

निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग

पीड़ित किसान नेता ने बताया कि उन्होंने एक बार फिर जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर पूरे मामले की जांच किसी दूसरे क्षेत्र के राजस्व अधिकारियों से कराने की मांग की है।

उन्होंने दोषी लेखपाल और अन्य संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए सार्वजनिक रास्ते से अवैध अतिक्रमण हटाने की भी मांग की है।

अब यह मामला प्रशासनिक निष्पक्षता और शिकायतकर्ताओं की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर रहा है।

शिकायतकर्ताओं पर कार्रवाई को लेकर पहले भी उठते रहे हैं सवाल

जनपद बाराबंकी में यह पहला मामला नहीं है, जब सरकारी या सार्वजनिक भूमि पर कथित अवैध अतिक्रमण की शिकायत करने वाले व्यक्ति को ही कार्रवाई का सामना करना पड़ा हो। इससे पहले भी नवाबगंज तहसील की ग्राम पंचायत पाटमऊ में सरकारी तालाबों पर कथित अवैध कब्जे की शिकायत करने वाले एक शिकायतकर्ता के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने का मामला सुर्खियों में रहा था।

ऐसे मामलों को लेकर लगातार यह सवाल उठते रहे हैं कि कहीं शिकायतकर्ताओं और व्हिसलब्लोअर्स की आवाज़ दबाने के लिए प्रशासनिक कार्रवाई का इस्तेमाल तो नहीं किया जा रहा। हालांकि प्रशासन की ओर से ऐसे आरोपों से इनकार किया जाता रहा है, लेकिन अब किसान नेता गुलजार हुसैन का मामला सामने आने के बाद एक बार फिर राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक निष्पक्षता को लेकर जनपद में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।

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प्रशासन का पक्ष

इस मामले में समाचार लिखे जाने तक संबंधित राजस्व अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि प्रशासन की ओर से कोई पक्ष प्राप्त होता है तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

रिपोर्ट – मंसूफ अहमद 

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Author: Kamran Alvi

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