नई दिल्ली के कंस्टीट्यूशन क्लब में मुस्लिम प्रतिनिधित्व और परिसीमन पर राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित हुआ।
सलमान खुर्शीद, शाहनवाज आलम समेत कई वक्ताओं ने परिसीमन, सच्चर कमेटी और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व पर चर्चा की।
‘इंडिया अगेंस्ट अनफेयर डिलिमिटेशन’ मंच का गठन किया गया।

नई दिल्ली | 24 जून 2026
देश में प्रस्तावित परिसीमन (Delimitation) और मुस्लिम प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर मंगलवार को राजधानी नई दिल्ली स्थित कंस्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया। ‘हम भारत के लोग’ संगठन द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर से आए सामाजिक कार्यकर्ताओं, वरिष्ठ अधिवक्ताओं, पत्रकारों, राजनीतिक नेताओं और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सम्मेलन में परिसीमन प्रक्रिया, लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व, दक्षिण भारतीय राज्यों की राजनीतिक हिस्सेदारी तथा मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधित्व से जुड़े मुद्दों पर व्यापक चर्चा की गई।
कार्यक्रम के अंत में ‘इंडिया अगेंस्ट अनफेयर डिलिमिटेशन’ नामक एक राष्ट्रीय मंच के गठन की घोषणा की गई, जिसका उद्देश्य परिसीमन से जुड़े मुद्दों पर जनजागरण अभियान चलाना और विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधित्व से संबंधित चिंताओं को सामने लाना होगा।
परिसीमन पर सुप्रीम कोर्ट से राहत की उम्मीद: सलमान खुर्शीद
पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने कहा कि परिसीमन से जुड़े मामलों में न्यायिक समीक्षा की संभावनाएं पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं।
उन्होंने कहा कि संविधान में परिसीमन प्रक्रिया में अदालत के हस्तक्षेप को सीमित किया गया है, लेकिन इसके बावजूद असम में हुए परिसीमन के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा नोटिस जारी किया गया था। उन्होंने उम्मीद जताई कि यदि प्रभावी कानूनी प्रयास किए जाएं तो भविष्य में होने वाले परिसीमन पर भी न्यायालय से राहत मिल सकती है।
परिसीमन प्रक्रिया पर सतत निगरानी जरूरी
सलमान खुर्शीद ने कहा कि लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व को प्रभावित करने वाले किसी भी निर्णय पर नागरिक समाज और राजनीतिक दलों को सतर्क निगरानी रखनी होगी ताकि निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके।
लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए समाज को आगे आना होगा
वरिष्ठ पत्रकार अनिल चमड़िया ने कहा कि समाज को पूरी तरह सरकार और राजनीतिक दलों के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों और सामाजिक समावेशिता की रक्षा के लिए प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने सामाजिक संवाद और मेल-मिलाप की संस्कृति को मजबूत बनाने पर जोर दिया।
परिसीमन के मौजूदा प्रारूप पर उठे सवाल
वरिष्ठ अधिवक्ता शारिक अब्बासी ने परिसीमन के मौजूदा मसौदे में कई खामियों की ओर ध्यान दिलाया।
उन्होंने कहा कि उत्तर और दक्षिण भारत में सीटों के पुनर्वितरण को लेकर कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं, जिनका निष्पक्ष समाधान आवश्यक है।

सच्चर कमेटी की सिफारिशों को लागू करने की मांग
कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव शाहनवाज आलम ने कहा कि वर्ष 2006 की सच्चर कमेटी रिपोर्ट में मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में प्रतिनिधित्व संबंधी असंतुलन को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणियां की गई थीं।
उन्होंने कहा कि जब नया परिसीमन होने जा रहा है, तब उन राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी बनती है जिन्होंने पहले सच्चर कमेटी की सिफारिशों का समर्थन किया था कि वे इन्हें लागू कराने के लिए आगे आएं।
जनसांख्यिकीय संतुलन के नाम पर नए विवादों की आशंका
शाहनवाज आलम ने आरोप लगाया कि जनसंख्या संतुलन के मुद्दे को आधार बनाकर नई नीतियां लागू करने की तैयारी की जा रही है, जिसका विरोध लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों के आधार पर किया जाना चाहिए।
दक्षिण भारतीय राज्यों के प्रतिनिधित्व को लेकर चिंता
राज्यसभा सांसद अखिलेश प्रसाद ने कहा कि दक्षिण भारतीय राज्यों को जनसंख्या नियंत्रण जैसे सकारात्मक प्रयासों के बावजूद यदि संसदीय सीटों में कमी का सामना करना पड़ा तो इसका देश की एकता और संघीय ढांचे पर प्रभाव पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि प्रतिनिधित्व में संतुलन बनाए रखना लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक है।

राजनीतिक दलों को संगठनात्मक स्तर पर भी देना होगा प्रतिनिधित्व
वरिष्ठ पत्रकार मसीहुज्जमा अंसारी ने कहा कि राजनीतिक दलों को केवल चुनावी प्रतिनिधित्व की बात नहीं करनी चाहिए, बल्कि अपने संगठनात्मक ढांचे में भी विभिन्न समुदायों को उनकी आबादी के अनुरूप अवसर देने चाहिए।
सम्मेलन में पारित किए गए प्रमुख प्रस्ताव
सम्मेलन के दौरान कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए, जिनमें शामिल हैं—
- मुस्लिम बहुल सीटों को आरक्षित न किए जाने की मांग।
- दलित बहुल क्षेत्रों के प्रतिनिधित्व को संरक्षित रखने की मांग।
- दक्षिण भारतीय राज्यों की सीटों में कटौती का विरोध।
- सीमांचल और बंगाल के मुस्लिम बहुल क्षेत्रों को केंद्र शासित प्रदेश बनाने की किसी भी योजना का विरोध।
- सच्चर कमेटी और रंगनाथ मिश्रा आयोग की सिफारिशों के अनुरूप परिसीमन की मांग।
- सुप्रीम कोर्ट द्वारा परिसीमन की न्यायिक समीक्षा संबंधी 2024 के निर्णय को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग।
- मुस्लिम बहुल सीटों पर धर्मनिरपेक्ष दलों द्वारा उपयुक्त प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने का प्रस्ताव।
‘इंडिया अगेंस्ट अनफेयर डिलिमिटेशन’ मंच का गठन
सम्मेलन के समापन पर परिसीमन और प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर जागरूकता अभियान चलाने के लिए ‘इंडिया अगेंस्ट अनफेयर डिलिमिटेशन’ नामक राष्ट्रीय मंच के गठन की घोषणा की गई।
आयोजकों का कहना है कि यह मंच देशभर में परिसीमन से जुड़े मुद्दों पर संवाद, अध्ययन और जनजागरूकता अभियान चलाएगा।
रिपोर्ट – नौमान माजिद











