बाराबंकी के वेदांश हॉस्पिटल पर हादसे में घायल बुजुर्ग के तीन टांके लगाने के बाद 22 हजार रुपये वसूलने का आरोप। 9,600 ऑनलाइन भुगतान और 12 हजार के बिल ने स्वास्थ्य विभाग की निगरानी पर सवाल खड़े किए।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 02 अक्टूबर 2026
बाराबंकी शहर में निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर पूजा की एक रील में किए गए दावों के मुताबिक, सड़क हादसे में घायल 60 वर्षीय बुजुर्ग के सिर में महज तीन टांके लगाने और प्राथमिक उपचार के बाद कथित तौर पर 22 हजार रुपये वसूल लिए गए।
मामला शहर के पल्हरी चौराहे के पास जैदपुर रोड स्थित शिवाजी पुरम कॉलोनी के वेदांश हॉस्पिटल एंड सर्जिकल सेंटर से जुड़ा बताया जा रहा है।
पूजा ने अपनी रील में आरोप लगाया है कि 21 सितंबर की सुबह आवास विकास कॉलोनी निवासी राजकुमार श्रीवास्तव (60) मॉर्निंग वॉक पर निकले थे। इसी दौरान उनका एक्सीडेंट हो गया और सिर के पिछले हिस्से में चोट लग गई। हादसा करने वाला युवक उन्हें उपचार के लिए वेदांश हॉस्पिटल लेकर पहुंचा।

पहले 9,600 रुपये ऑनलाइन, फिर 12 हजार का अलग बिल
आरोप है कि अस्पताल में डॉक्टर और स्टाफ ने घायल के सिर में तीन टांके लगाए और ग्लूकोज चढ़ाया। इसके बाद इलाज के खर्च के नाम पर हादसे में शामिल युवक से दो बार में ऑनलाइन 9,600 रुपये ले लिए गए।
मामला यहीं खत्म नहीं हुआ।
जब घायल बुजुर्ग के परिजन अस्पताल पहुंचे तो आरोप के मुताबिक उन्हें 12 हजार रुपये का अलग बिल थमा दिया गया और यह रकम भी वसूल ली गई।
यानी परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों के अनुसार, तीन टांकों और उपचार के लिए कुल 22 हजार रुपये की रकम ली गई।

12 हजार के बिल में 4,700 रुपये पैथोलॉजी के!
मामले को और गंभीर बनाने वाली बात बिल में दर्ज अलग-अलग शुल्क बताए जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर सामने आए दावे के मुताबिक 12 हजार रुपये के बिल में—
- रजिस्ट्रेशन के नाम पर 500 रुपये
- बेड चार्ज के नाम पर 2,000 रुपये
- डॉक्टर कंसल्टेशन के नाम पर 1,000 रुपये
- दवाइयों के नाम पर 3,372 रुपये
- पैथोलॉजी चार्ज के नाम पर 4,700 रुपये
दर्ज किए गए।
अब सवाल यह है कि आखिर ऐसे कौन से उपचार और जांच किए गए, जिनके लिए इन मदों में इतनी रकम ली गई? क्या सभी जांच वास्तव में कराई गई थीं? क्या मरीज या उसके परिजनों को जांच और उपचार की पूरी जानकारी दी गई थी? इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।
घाव साफ किए बिना टांके लगाने का भी आरोप
मामला सिर्फ कथित वसूली तक सीमित नहीं है। पूजा ने आरोप लगाया है कि घायल बुजुर्ग के सिर का घाव कथित तौर पर ठीक से साफ किए बिना ही टांके लगा दिए गए।
अगर यह आरोप जांच में सही पाया जाता है तो यह मरीज की सुरक्षा और उपचार की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।
हालांकि, इस आरोप की पुष्टि के लिए मेडिकल रिकॉर्ड, उपचार संबंधी दस्तावेज और चिकित्सकीय जांच महत्वपूर्ण होंगे।
9,600 रुपये लेने से पहले इनकार, पुलिस तक पहुंचा मामला तो लौटाई रकम!
इस प्रकरण में एक और दावा सामने आया है जिसने सवालों को और बढ़ा दिया है।
पूजा के मुताबिक, अस्पताल संचालक ने शुरुआत में हादसा करने वाले युवक से 9,600 रुपये ऑनलाइन लेने की बात से इनकार किया। आरोप है कि मामला पुलिस तक पहुंचने के बाद 25 सितंबर की शाम 9,600 रुपये युवक को वापस कर दिए गए।
अब सवाल यह है कि यदि अस्पताल ने यह रकम ली ही नहीं थी तो उसे वापस क्यों किया गया? और यदि रकम इलाज के खर्च के तौर पर ली गई थी तो बाद में उसे वापस करने की वजह क्या थी?
इन सवालों का जवाब संबंधित अस्पताल संचालक और पुलिस की जांच से ही स्पष्ट हो सकता है।

गली-मोहल्लों में खुले अस्पतालों की निगरानी पर बड़ा सवाल
यह मामला सामने आने के बाद बाराबंकी में संचालित निजी अस्पतालों की निगरानी और उनके खिलाफ स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
आम आदमी जब सड़क हादसे या किसी आपात स्थिति में अस्पताल पहुंचता है तो उस समय उसके पास इलाज कराने के अलावा दूसरा विकल्प नहीं होता। ऐसे में इलाज, जांच, दवाइयों, बेड और अन्य सेवाओं के नाम पर कितना शुल्क लिया जा रहा है, इसकी पारदर्शिता बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
सवाल यह भी है कि जिले में निजी अस्पतालों के पंजीकरण, चिकित्सकीय सुविधाओं, डॉक्टरों की उपलब्धता, बिलिंग व्यवस्था और मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही सेवाओं की नियमित जांच कितनी प्रभावी तरीके से हो रही है।
स्वास्थ्य विभाग की निगरानी पर उठे सवाल
मामला सामने आने के बाद अब निगाहें स्वास्थ्य विभाग पर हैं। क्या विभाग इस प्रकरण का स्वतः संज्ञान लेकर अस्पताल के दस्तावेज, मरीज की मेडिकल फाइल, बिल, जांच रिपोर्ट और उपचार प्रक्रिया की जांच करेगा?
क्या जिले के अन्य निजी अस्पतालों की भी इसी तरह जांच होगी?
इन सवालों का जवाब स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई से ही मिलेगा।
CMO से भी जवाब की उम्मीद, क्या होगी जांच?
इस मामले में अब लोगों की नजर ज्वाइनिंग के समय शाही वेलकम कराकर चर्चा में आए जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रंजन गौतम पर है। सवाल यह है कि सोशल मीडिया पर सामने आए इन गंभीर आरोपों का स्वास्थ्य विभाग संज्ञान लेगा या मामला सिर्फ सोशल मीडिया की चर्चा बनकर रह जाएगा।
यदि विभाग जांच करता है तो यह स्पष्ट हो सकता है कि अस्पताल में वास्तव में कौन-कौन सी सेवाएं दी गईं, कौन-कौन सी जांच कराई गईं, मरीज से कितना शुल्क लिया गया और अस्पताल की बिलिंग प्रक्रिया नियमों के अनुरूप थी या नहीं।
अस्पताल का पक्ष सामने आना बाकी
इस पूरे मामले में वेदांश हॉस्पिटल एंड सर्जिकल सेंटर के संचालक या संबंधित चिकित्सक का विस्तृत आधिकारिक पक्ष अभी सामने नहीं आया है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी मामले में जांच या कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।
अब असली सवाल यही है—तीन टांकों और कथित प्राथमिक उपचार के लिए 22 हजार रुपये की वसूली के पीछे पूरा सच क्या है? और क्या स्वास्थ्य विभाग इस मामले की निष्पक्ष जांच कराकर जनता के सामने तथ्य रखेगा?
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद
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