Barabanki:
बाराबंकी के त्रिवेदीगंज पशु चिकित्सालय में मवेशियों के लिए आई लाखों रुपये की दवाएं समय पर वितरण न होने से एक्सपायर हो गईं। दवाओं को जलाने से प्रदूषण फैला और पशुपालन विभाग की लापरवाही उजागर हुई।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश।
जनपद बाराबंकी के त्रिवेदीगंज क्षेत्र से पशुपालन विभाग की गंभीर लापरवाही का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां स्थित पशु चिकित्सालय में मवेशियों के उपचार के लिए आई लाखों रुपए की दवाएं समय पर वितरित न होने के कारण एक्सपायर हो गई। इसके बाद अस्पताल कर्मचारियों द्वारा इन दवाओं को जला दिए जाने की बात सामने आई है, जिससे न केवल पर्यावरण प्रदूषण फैला बल्कि सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग का भी खुलासा हुआ है।
जानकारी के अनुसार, ये दवाएं पशुपालकों को वितरित की जानी थी, लेकिन लापरवाही के चलते वे अस्पताल में हो पड़ी रही और उनकी समय-सीमा समाप्त हो गई। इस लापरवाही पर पर्दा डालने के लिए कर्मचारियों द्वारा दवाओं को आग में जलाकर नष्ट कर दिया गया, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
डॉक्टर की अनुपस्थिति से पशुपालक परेशान
स्थानीय ग्रामीणों और पशुपालकों का आरोप है कि त्रिवेदीगंज पशु चिकित्सालय अक्सर समय से पहले बंद कर दिया जाता है। इसके साथ ही यह भी आरोप लगाए गए हैं कि पशु चिकित्साधिकारी इंदुबाला कई बार अस्पताल में अनुपस्थित रहती है, जिससे पशुपालकों को सरकारी इलाज और दवाओं का लाभ नहीं मिल पाता।
पखरपुर निवासी विनोद शुक्ला ने कहा,
“जब पशु अस्पताल में डॉक्टर ही मौजूद नहीं रहते, तो दवाओं का वितरण कौन करेगा? ऐसे में दवाओं का एक्सपायर होना स्वाभाविक है।”
विनोद शुक्ला के साथ ही रत्नाकर मिश्रा, अरविन्द वर्मा और कृष्ण रावत ने भी इस मामले में निष्पक्ष जांच और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
विभागीय जांच का आश्वासन
इस मामले में जब हमारे संवाददाता ने पशु चिकित्साधिकारी इंदुबाला से संपर्क करने का प्रयास किया, तो उनका फोन नहीं उठा। वही, जिला पशु चिकित्साधिकारी अतुल अवस्थी ने बताया कि प्रकरण की जांच कराई जाएगी और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला न केवल सरकारी धन की बर्बादी को उजागर करता है, बल्कि पशुपालकों की स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ हो रही अनदेखी की ओर भी इशारा करता है।
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद















