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बाराबंकी में ज्वैलर्स से लाखों की ठगी: वन दरोगा की वर्दी पहन युवक ने खरीदे सोने के गहने, पोल खुलते ही भाग निकला आरोपी; मुकदमा दर्ज

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बाराबंकी के असंद्रा थाना क्षेत्र में खुद को वन दरोगा बताकर ज्वैलर्स से 1.77 लाख रुपये के गहने खरीदने वाले युवक की पोल खुल गई।

डीएफओ से पुष्टि के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया।

पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है।

कमरे से वन विभाग की वर्दी और अन्य दस्तावेज भी बरामद हुए हैं।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 17 जून 2026

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के असंद्रा थाना क्षेत्र में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां खुद को वन विभाग में तैनात वन दरोगा बताने वाले एक युवक की सच्चाई उस समय सामने आ गई, जब वह एक ज्वैलर्स की दुकान से उधार में खरीदे गए लाखों रुपये के गहनों का भुगतान करने से बचता रहा। पुलिस जांच में उसके वन दरोगा होने की पुष्टि नहीं हो सकी और भंडाफोड़ होते ही आरोपी मौके से फरार हो गया।

पीड़ित ज्वैलर्स की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है।

चार महीने से वन दरोगा बनकर रह रहा था युवक

नगर पंचायत सिद्धौर स्थित पिंटू ज्वेलर्स के स्वामी गुलाब चंद्र सोनी के अनुसार, अयोध्या जिले के गणेशपुर निवासी ललित यादव पुत्र रामगोपाल यादव उनकी दुकान के बगल स्थित एक किराए के मकान में पिछले करीब चार महीने से रह रहा था।

गुलाब चंद्र सोनी का कहना है कि ललित यादव खुद को हरख वन रेंज में तैनात वन दरोगा बताता था और अक्सर वन विभाग की वर्दी पहनकर आता-जाता था। इसी वजह से स्थानीय लोगों को भी उसके सरकारी कर्मचारी होने का विश्वास हो गया था।

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ज्वैलर्स को लगाई डेढ़ लाख की चपत

पीड़ित ज्वैलर्स के मुताबिक 15 अप्रैल 2026 को ललित यादव वन विभाग की वर्दी पहनकर उनकी दुकान पर पहुंचा। उसने करीब 1 लाख 77 हजार 900 रुपये के सोने-चांदी के आभूषण खरीदे।

आरोप है कि खरीदारी के दौरान उसने केवल 30 हजार रुपये नकद दिए और शेष 1 लाख 47 हजार 900 रुपये अपने कमरे से लाकर देने की बात कही। लेकिन इसके बाद वह लगातार अलग-अलग जगह ड्यूटी होने का बहाना बनाकर भुगतान टालता रहा।

यूपी-112 बुलाने पर खुलने लगी परतें

गुलाब चंद्र सोनी ने बताया कि मंगलवार को उन्हें सूचना मिली कि ललित यादव सिद्धौर स्थित अपने किराए के कमरे पर आया हुआ है। इसके बाद उन्होंने तत्काल यूपी-112 पर कॉल कर पुलिस को सूचना दी।

मौके पर पहुंची पुलिस ने जब उससे पूछताछ की तो उसने खुद को वन दरोगा ललित यादव बताया और अपनी बात साबित करने के लिए किसी कथित डीएफओ से फोन पर बातचीत भी कराई।

हालांकि पुलिस और शिकायतकर्ता को उसके जवाबों पर संदेह हुआ, जिसके बाद मामले की गहराई से जांच शुरू की गई।

पोल खुलते ही भाग निकला आरोपी

मामले में निर्णायक मोड़ तब आया जब बाराबंकी के प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) आकाश दीप बधावन से संपर्क कर जानकारी ली गई। डीएफओ ने हरख वन रेंज में ललित यादव नाम के किसी भी वन दरोगा की तैनाती से साफ इनकार कर दिया।

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बताया जा रहा है कि जैसे ही आरोपी को अपनी पोल खुलने का आभास हुआ, वह बाइक लेकर मौके से फरार हो गया। पुलिसकर्मी और स्थानीय लोग उसे पकड़ नहीं सके।

कमरे से मिली वन विभाग की वर्दी और दस्तावेज

घटना की सूचना मिलने पर हरख वन रेंज के रेंजर प्रदीप सिंह भी मौके पर पहुंचे और जांच की। जांच के दौरान आरोपी के किराए के कमरे की तलाशी ली गई।

तलाशी में कमरे से वन विभाग की वर्दी सहित कई दस्तावेज बरामद हुए। पुलिस ने बरामद सामान को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।

पिता ने भी बेटे के वन दरोगा होने से किया इंकार

कमरे से मिले आधार कार्ड और अन्य दस्तावेजों के आधार पर पुलिस ने आरोपी के परिजनों से संपर्क किया। मंगलवार शाम चौकी पहुंचे आरोपी के पिता रामगोपाल यादव ने भी अपने बेटे के वन दरोगा होने की बात से इनकार कर दिया।

उन्होंने पुलिस को बताया कि उनका बेटा वन विभाग में नौकरी नहीं करता है बल्कि वन रक्षक (फॉरेस्ट गार्ड) की भर्ती परीक्षा की तैयारी कर रहा है।

धोखाधड़ी, फर्जी पहचान और वर्दी के इस्तेमाल की जांच

पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि आरोपी ने वन विभाग की वर्दी कहां से हासिल की और क्या उसने अन्य लोगों को भी सरकारी अधिकारी बनकर ठगा है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि उसने फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर कहीं और धोखाधड़ी तो नहीं की।

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पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी की गिरफ्तारी के बाद ही पूरे मामले का खुलासा हो सकेगा।

क्षेत्र में चर्चा का विषय बना मामला

सिद्धौर और आसपास के क्षेत्रों में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोग हैरानी जता रहे हैं कि एक युवक महीनों तक वन विभाग का अधिकारी बनकर लोगों के बीच घूमता रहा और किसी को उसकी असलियत का पता नहीं चला।

फिलहाल पुलिस आरोपी की तलाश में जुटी है और मामले में आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है।

रिपोर्ट – मंसूफ अहमद 

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Author: Kamran Alvi

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