Barabanki News: जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह ने जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में दिए महत्वपूर्ण निर्देश।
बेसमेंट में संचालित अस्पतालों पर सीलिंग कार्रवाई, सभी अस्पतालों में इमरजेंसी एग्जिट अनिवार्य।
एम्बुलेंस व्यवस्था, सर्पदंश उपचार, एंटी वेनम किट और स्कूलों में बच्चों की आंखों की जांच के भी दिए निर्देश।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 21 जुलाई 2026
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुरक्षित, पारदर्शी एवं प्रभावी बनाने के उद्देश्य से जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह ने बड़ा फैसला लिया है। जिला स्वास्थ्य समिति की समीक्षा बैठक में उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि जनपद में बेसमेंट में संचालित किसी भी अस्पताल को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे अस्पतालों के विरुद्ध तत्काल सीलिंग की कार्रवाई की जाए और प्रत्येक चिकित्सालय में इमरजेंसी एग्जिट (Emergency Exit) की व्यवस्था अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाए।
कलेक्ट्रेट परिसर स्थित लोकसभागार में आयोजित जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में डीएम ने स्वास्थ्य विभाग सहित सभी संबंधित अधिकारियों को मरीजों की सुरक्षा, आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं में सुधार के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए।
बेसमेंट में चल रहे अस्पतालों पर डीएम का सख्त रुख
बैठक के दौरान जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह ने कहा कि किसी भी अस्पताल का संचालन बेसमेंट में नहीं होना चाहिए। ऐसे अस्पतालों की पहचान कर उनके विरुद्ध नियमानुसार सीलिंग की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि सभी निजी एवं सरकारी अस्पतालों में इमरजेंसी एग्जिट की समुचित व्यवस्था हो, ताकि किसी भी आपदा या आगजनी जैसी स्थिति में मरीजों और तीमारदारों की सुरक्षित निकासी सुनिश्चित की जा सके।
दुर्घटना पीड़ितों को तत्काल मिले प्राथमिक उपचार
जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देशित किया कि सड़क दुर्घटनाओं या अन्य हादसों में घायल लोगों को तत्काल प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया जाए।
उन्होंने कहा कि गंभीर स्थिति होने पर ही चिकित्सकीय परीक्षण और विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह के बाद मरीजों को उच्च चिकित्सा संस्थान रेफर किया जाए। बिना उचित चिकित्सकीय परामर्श के किसी भी मरीज को रेफर करने से बचा जाए।
सभी एम्बुलेंस में लाइफ सेविंग किट और दवाएं रहें उपलब्ध
बैठक में एम्बुलेंस सेवाओं की समीक्षा करते हुए डीएम ने निर्देश दिए कि जनपद की सभी एम्बुलेंसों में हर समय जीवन रक्षक उपकरण (Life Saving Kit) एवं आवश्यक दवाइयां उपलब्ध रहें।
उन्होंने कहा कि मरीज को एम्बुलेंस में दिए गए उपचार का पूरा रिकॉर्ड तैयार किया जाए तथा संबंधित एमओआईसी (Medical Officer In-Charge) प्रत्येक 15 दिन में एम्बुलेंसों का भौतिक सत्यापन कर उनकी कार्यक्षमता और संसाधनों की जांच करें।
सर्पदंश से होने वाली मौतें रोकने के लिए चलेगा जागरूकता अभियान
जिलाधिकारी ने सर्पदंश से होने वाली मौतों पर चिंता व्यक्त करते हुए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि—
- सर्पदंश होने पर पीड़ित को तुरंत नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया जाए।
- झाड़-फूंक जैसी अवैज्ञानिक पद्धतियों से बचा जाए।
- सभी सीएचसी में पर्याप्त मात्रा में एंटी वेनम किट उपलब्ध रखी जाए।
- निजी अस्पतालों के साथ भी बैठक कर आवश्यक समन्वय स्थापित किया जाए।
स्कूलों में बच्चों की आंखों की होगी जांच
बैठक में बेसिक शिक्षा विभाग एवं स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिया गया कि जनपद के सभी प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों की आंखों की जांच कराई जाए।
जिन बच्चों में दृष्टिदोष पाया जाए, उन्हें निःशुल्क चश्मे उपलब्ध कराए जाएं तथा विद्यालय और अभिभावकों के माध्यम से बच्चों को नियमित रूप से चश्मा पहनने के लिए प्रेरित किया जाए।
संचारी रोग नियंत्रण अभियान की भी हुई समीक्षा
जिलाधिकारी ने संचारी रोग नियंत्रण अभियान एवं दस्तक अभियान की प्रगति की समीक्षा करते हुए संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ अभियान को और प्रभावी ढंग से संचालित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि जनजागरूकता गतिविधियों में तेजी लाई जाए ताकि मौसमी एवं संक्रामक बीमारियों पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके।
सीएमओ ने दिया निर्देशों के पालन का भरोसा
बैठक के दौरान मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रंजन गौतम ने जिलाधिकारी को आश्वस्त किया कि बैठक में दिए गए सभी निर्देशों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित कराया जाएगा।
बैठक में डीडीओ भूषण कुमार, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारीगण, डिप्टी सीएमओ, जिला मलेरिया अधिकारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी, नगर निकायों के अधिशासी अधिकारी, शिक्षा विभाग के अधिकारी एवं अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद











