बाराबंकी के खोया मंडी स्थित न्यू सहारा हॉस्पिटल पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं।
शिकायतकर्ता ने सीएमओ से अस्पताल की उच्चस्तरीय जांच कर लाइसेंस निरस्त करने की मांग की है।
आरोपों में डॉक्टरों की कमी, सुरक्षा मानकों की अनदेखी और मनमानी वसूली शामिल है।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 04 जुलाई 2026
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी शहर में खोया मंडी के पास स्थित न्यू सहारा हॉस्पिटल एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गया है। अस्पताल के खिलाफ गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए रामनगर निवासी अजय पांडेय ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) को शिकायती पत्र सौंपा है। शिकायतकर्ता ने अस्पताल की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने के साथ दोष सिद्ध होने पर उसका लाइसेंस निरस्त करने और जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
स्वास्थ्य मानकों की अनदेखी का आरोप
सीएमओ को दिए गए शिकायती पत्र में आरोप लगाया गया है कि अस्पताल का संचालन निर्धारित स्वास्थ्य एवं सुरक्षा मानकों के विपरीत किया जा रहा है। शिकायत के अनुसार अस्पताल जिस भवन में संचालित हो रहा है, उसकी संरचना पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। इसके अलावा भूतल पर व्यावसायिक दुकानें संचालित होने के कारण किसी भी आपात स्थिति में मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालना मुश्किल हो सकता है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियमित उपलब्धता नहीं रहती और अधिकांश समय मरीजों का इलाज प्रशिक्षित डॉक्टरों के बजाय स्टाफ के भरोसे किया जाता है।
नर्सिंग स्टाफ, सुरक्षा और सुविधाओं पर भी सवाल
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि अस्पताल में प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की भारी कमी है। एक नर्स के भरोसे कई मरीजों की देखभाल कराई जाती है, जिससे मरीजों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
इसके अलावा अस्पताल में निम्न सुविधाओं के अभाव का भी आरोप लगाया गया है—
- संक्रमण नियंत्रण की समुचित व्यवस्था नहीं।
- अग्निशमन सुरक्षा मानकों का पालन नहीं।
- जीवनरक्षक उपकरणों की पर्याप्त उपलब्धता नहीं।
- एम्बुलेंस सुविधा अपर्याप्त।
- पार्किंग का अभाव।
- शौचालय एवं पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं में भी कमियां।
मनमानी वसूली और कमीशन पर मरीज भेजने का भी आरोप
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि अस्पताल में मरीजों से मनमाने तरीके से इलाज के नाम पर मोटी रकम वसूली जाती है। साथ ही स्थानीय स्तर पर आशा बहुओं के माध्यम से कमीशन के आधार पर मरीज भेजे जाने की भी चर्चा है।
उन्होंने इस पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए अस्पताल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच कराने की मांग की है।
अस्पताल के पंजीकरण और संचालक की योग्यता की जांच की मांग
अजय पांडेय ने अपने प्रार्थना पत्र में यह भी मांग की है कि यह जांच कराई जाए कि—
- अस्पताल किसके नाम पर पंजीकृत है।
- वास्तविक संचालक कौन है।
- संचालक की शैक्षणिक एवं चिकित्सकीय योग्यता निर्धारित सरकारी मानकों के अनुरूप है या नहीं।
उन्होंने महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं, लखनऊ, जिलाधिकारी बाराबंकी तथा मुख्य चिकित्सा अधिकारी से अस्पताल की आकस्मिक और निष्पक्ष जांच कर दोष सिद्ध होने पर लाइसेंस निरस्त करने और संबंधित जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई करने की मांग की है।
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद












