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Barabanki: भीम आर्मी के झंडे का अपमान, विरोध करने पर युवक की बेरहमी से पिटाई; हंगामे के बाद दर्ज हुई FIR

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Barabanki: भीम आर्मी के झंडे का अपमान कर उससे जूते और गाड़ी साफ करने का मामला सामने आया।

विरोध करने पर युवक की पिटाई, FIR दर्ज न होने पर कार्यकर्ताओं का हंगामा।

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बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 26 मार्च 2026

जिले के नगर कोतवाली क्षेत्र में एक गंभीर और हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां भीम आर्मी के झंडे के अपमान का विरोध करने पर एक युवक की कथित तौर पर बेरहमी से पिटाई कर दी गई।

घटना के बाद पीड़ित ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन आरोप है कि शुरुआत में FIR दर्ज नहीं की गई, जिससे संगठन के कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश फैल गया।

झंडा उतारकर फाड़ने और उससे जूते साफ करने का आरोप

भीम आर्मी पदाधिकारी का आरोप

भीम आर्मी के जिला संरक्षक एडवोकेट शिव बरन सिंह के अनुसार, 25 मार्च 2026 को बाराबंकी स्थित भीम आर्मी जिला कार्यालय की छत पर लगे झंडे को अखिलेश कुमार वर्मा नामक युवक ने उतारकर फाड़ दिया।

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आरोप है कि उसने झंडे का अपमान करते हुए उससे अपनी गाड़ी और जूते साफ किए, जिससे संगठन के कार्यकर्ताओं में रोष फैल गया।

Barabanki: भीम आर्मी के झंडे का अपमान, विरोध करने पर युवक की बेरहमी से पिटाई; हंगामे के बाद दर्ज हुई FIR

विरोध करने पर युवक की पिटाई, गंभीर चोटें आईं

कई लोगों ने मिलकर किया हमला

बताया जा रहा है कि जब भीम आर्मी कार्यकर्ता दिवाकर ने इस कृत्य का विरोध किया तो आरोपी अखिलेश कुमार वर्मा और उनकी पत्नी मोनी वर्मा ने उसके साथ मारपीट शुरू कर दी।

आरोप है कि इसके बाद फोन कर करीब 9 लोगों को बुलाया गया, जो तीन मोटरसाइकिलों पर सवार होकर मौके पर पहुंचे और दिवाकर को बुरी तरह पीटा।
इस हमले में पीड़ित का सिर फट गया और शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें आईं।

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FIR दर्ज न होने पर भड़के कार्यकर्ता, कोतवाली का किया घेराव

पीड़ित के अनुसार, वह रात करीब ढाई बजे नगर कोतवाली पहुंचा, लेकिन उसकी FIR दर्ज नहीं की गई।

इस घटना की जानकारी मिलते ही भीम आर्मी के कार्यकर्ता आक्रोशित हो गए और नगर कोतवाली का घेराव कर विरोध प्रदर्शन किया।

कार्यकर्ताओं के दबाव के बाद पुलिस ने आखिरकार आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया और घायल का मेडिकल परीक्षण कराया।

पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल

इस घटना के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।

स्थानीय लोगों और संगठन के कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि समय पर FIR दर्ज कर ली जाती तो विवाद इतना नहीं बढ़ता।

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रिपोर्ट – मंसूफ अहमद / ललित राजवंशी

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