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Barabanki: बांसा शरीफ मेले में जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी, उलेमाओं ने दिया एकता और इंसानियत का संदेश

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Barabanki: बांसा शरीफ में आयोजित जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी कार्यक्रम में उलेमाओं ने एकता, प्रेम और सूफी संतों के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।

इस दौरान हजारों की तादाद में जायरीन और गणमान्य लोग मौजूद रहे।

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बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 26 मार्च 2026

जिले के मसौली थाना क्षेत्र अंतर्गत कस्बा बंसा शरीफ में स्थित हजरत सैय्यद शाह अब्दुल रज़्ज़ाक़ बाबा के आस्ताने पर चल रहे आठ दिवसीय सालाना मेले में जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी का कार्यक्रम अकीदत और शान-ओ-शौकत के साथ आयोजित किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में जायरीन मौजूद रहे और सूफी परंपरा के तहत दुआएं मांगी गईं।

उलेमाओं ने दिया अमन-चैन और इंसानियत का संदेश

“पीर-बुजुर्ग अल्लाह के करीब होते हैं”

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए हजरत अल्लामा मौलाना मोहम्मद शैफ शफीपुरी ने कहा कि पीर और बुजुर्ग अल्लाह के बेहद करीब होते हैं। उनके आस्तानों पर आकर इंसान को दिली सुकून मिलता है और उनकी शिक्षाओं पर चलकर जीवन को बेहतर बनाया जा सकता है।

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उन्होंने कहा कि बुजुर्गों ने अल्लाह के पैगाम को दुनिया भर में फैलाया और उनके वसीले से मांगी गई दुआएं जल्द कबूल होती हैं। इसलिए सभी लोगों को अल्लाह के बताए रास्ते पर चलना चाहिए।

तिलावत-ए-कुरान से हुई कार्यक्रम की शुरुआत

नातिया कलाम से गूंजा पूरा परिसर

कार्यक्रम की शुरुआत मौलाना अहमद अली द्वारा तिलावत-ए-कलाम-ए-पाक से की गई। इसके बाद कई शायरों ने नातिया कलाम पेश कर महफिल को रूहानी रंग में रंग दिया।

पूरा कार्यक्रम सूफी माहौल और धार्मिक आस्था से सराबोर रहा, जहां लोगों ने एकता, भाईचारे और प्रेम का संदेश ग्रहण किया।

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बड़ी संख्या में जायरीन और गणमान्य लोग रहे मौजूद

इस मौके पर सज्जादानशीन मोहम्मद उमर जिलानी, बबलू फैजाबादी, मेला कमेटी अध्यक्ष रिजवान संजय, उपाध्यक्ष कामिल अली, गुफरान खादिम, नियाज खादिम, अबरार खादिम, मोहम्मद एखलाक अंसारी, सलमान खादिम, शाकिब खादिम, मोहम्मद आरिफ समेत बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

मेला कमेटी द्वारा आयोजन की व्यवस्थाएं भी सुचारू रूप से संचालित की गईं।

सूफी परंपरा के जरिए एकता और भाईचारे का संदेश

कार्यक्रम के दौरान उलेमाओं ने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में आपसी प्रेम, सौहार्द और एकता को मजबूत करते हैं।

बांसा शरीफ का यह मेला गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल बनकर हर साल लोगों को जोड़ने का काम करता है।

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रिपोर्ट – नूर मोहम्मद

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