Barabanki: सफेदाबाद स्थित हिन्द इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस (HIMS) में प्रबंधन को लेकर बड़ा विवाद सामने आया।
चेयरपर्सन डॉ. ऋचा मिश्रा और पूर्व अध्यक्ष डॉ. अमोद सचान को गेट पर रोका गया।
ट्रस्ट पर अवैध कब्जे, ट्रस्ट फंड में हेरफेर और फर्जीवाड़े के आरोप लगे। जानिए पूरा मामला।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 28 फरवरी 2026
जनपद के सफेदाबाद स्थित हिन्द इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस (HIMS) में शनिवार दोपहर प्रबंधन को लेकर विवाद खुलकर सामने आ गया। कॉलेज की चेयरपर्सन डॉ. ऋचा मिश्रा और पूर्व अध्यक्ष डॉ. अमोद कुमार सचान को मुख्य गेट पर सुरक्षा कर्मियों द्वारा रोक दिए जाने से परिसर में तनावपूर्ण स्थिति बन गई। दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक के बाद मामला मीडिया तक पहुंचा, जहां एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए गए।
गेट पर रोकने से बढ़ा विवाद, प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए आरोप
जानकारी के अनुसार, ट्रस्टी बृज किशोर सिंह के बाउंसरों और सुरक्षाकर्मियों ने डॉ. ऋचा मिश्रा और डॉ. अमोद सचान को कॉलेज परिसर में प्रवेश से रोका। काफी देर तक चली बहस और हंगामे के बाद वे अंदर पहुंचे और पत्रकारों से बातचीत की।

डॉ. ऋचा मिश्रा ने आरोप लगाया कि कॉलेज एक ट्रस्ट के अधीन संचालित होता है, जिसमें मूल रूप से सात सदस्य थे। उनके मुताबिक कुछ लोगों ने साजिश कर पुरानी कमेटी को अनधिकृत रूप से भंग कर खुद को अध्यक्ष और पदाधिकारी घोषित कर दिया।

“ट्रस्ट फंड पर कब्जे की साजिश” का आरोप
डॉ. ऋचा ने दावा किया कि वर्तमान में वह स्वयं, उनके पति डॉ. अमोद सचान और बहराइच के डॉ. बी.के. सिंह ही वैध ट्रस्टी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि दस्तावेजों में हेरफेर कर ट्रस्ट के फंड पर कब्जा करने की कोशिश की गई है। इस संबंध में एफआईआर दर्ज कराने और चार कर्मचारियों को बर्खास्त करने की बात भी कही गई।

डॉ. अमोद सचान बोले – “अपने ही संस्थान में प्रवेश से रोका गया”
डॉ. अमोद कुमार सचान ने कहा कि जो लोग खुद को वर्तमान प्रबंधन बता रहे हैं, वे अनधिकृत रूप से कॉलेज पर नियंत्रण स्थापित करना चाहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें योजनाबद्ध तरीके से बदनाम कर प्रबंधन से हटाने का प्रयास किया जा रहा है।

दूसरी ओर से भी दर्ज है एफआईआर
गौरतलब है कि बहराइच के रायपुर राजा निवासी बृज किशोर सिंह ने डॉ. अमोद सचान समेत अन्य लोगो के खिलाफ कैसरबाग कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई है।
बृज किशोर सिंह का दावा है कि वर्ष 2004 में समाजसेवा के उद्देश्य से ट्रस्ट की स्थापना की गई थी, जिसमें कई सदस्य शामिल थे। आरोप है कि बाद में ट्रस्ट डीड में कथित रूप से फर्जी बदलाव कर अन्य ट्रस्टियों के नाम हटाए गए और बैंक खातों के संचालन में अनियमितताएं की गईं।
बैंक खातों और ओवरड्राफ्ट पर विवाद
आरोप है कि बैंक ऑफ बड़ौदा और इंडियन ओवरसीज बैंक के अलावा एचडीएफसी बैंक में नए खाते खोले गए और करोड़ों रुपये की ओवरड्राफ्ट (OD) लिमिट व बैंक गारंटी हासिल की गई। इन आरोपों को लेकर दोनों पक्ष आमने-सामने हैं।

छात्रों और मरीजों में चर्चा तेज
कॉलेज परिसर में उपजे इस विवाद ने छात्रों, फैकल्टी और अस्पताल में इलाज करा रहे मरीजों के बीच भी असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है। फिलहाल मामला कानूनी प्रक्रिया में है और जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद














