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Barabanki: सरकारी सड़क पर ‘गड्ढों की राज’, जान जोखिम में डालकर नुकीली गिट्टियों के बीच स्कूल जाते हैं बच्चे; आख़िर कब जागेंगे जिम्मेदार?

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Barabanki News: बाराबंकी के हैदरगढ़ में अमरवल-किरसिया से अमित का पुरवा तक 2 किमी सड़क बदहाल है।

गड्ढों और नुकीली गिट्टियों के बीच स्कूली बच्चों का आवागमन जारी है।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 18 अगस्त 2026

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के हैदरगढ़ विकासखंड क्षेत्र में करीब दो किलोमीटर लंबी सड़क की बदहाली ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अमरवल-किरसिया संपर्क मार्ग से अमित का पुरवा तक जाने वाली सड़क जगह-जगह टूट चुकी है। सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे हैं, डामर और गिट्टी की परत उखड़ चुकी है और कई जगह नुकीली गिट्टियां बाहर निकल आई हैं। बरसात के दिनों में गड्ढों में पानी भरने से यह रास्ता और भी खतरनाक हो गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की मरम्मत को लेकर कई बार शिकायत की जा चुकी है। विभागीय स्तर पर नाप-जोख और प्रस्ताव की प्रक्रिया भी पूरी होने की बात कही गई, लेकिन बजट के इंतजार में सड़क की मरम्मत अब तक शुरू नहीं हो सकी है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि इसी बदहाल रास्ते से आसपास के गांवों के बच्चे रोजाना स्कूल जाने को मजबूर हैं।

अमरवल-किरसिया से अमित का पुरवा तक सड़क बदहाल

विकास खंड हैदरगढ़ क्षेत्र के अंतर्गत अमरवल-किरसिया संपर्क मार्ग से अमित का पुरवा तक करीब दो किलोमीटर सड़क लंबे समय से खराब हालत में है। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस सड़क का निर्माण उस समय मंडी समिति की ओर से कराया गया था, जब राजनाथ सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे।

समय बीतने के साथ सड़क की हालत लगातार खराब होती गई। वर्तमान में कई स्थानों पर सड़क की ऊपरी परत पूरी तरह उखड़ चुकी है। डामर और गिट्टी गायब होने के कारण सड़क पर बड़े-बड़े पत्थर और नुकीली गिट्टियां दिखाई दे रही हैं।

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बारिश होने पर इन गड्ढों में पानी भर जाता है और राहगीरों के लिए यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि पानी के नीचे कितना गहरा गड्ढा है।

कई गांवों को जोड़ता है यह संपर्क मार्ग

यह सड़क सिर्फ एक गांव तक सीमित नहीं है, बल्कि कुड़वा, अहीरगांव, अमित का पुरवा, लूसा का पुरवा और शिवा का पुरवा समेत कई गांवों को जोड़ती है।

ग्रामीणों के लिए यह मार्ग रोजमर्रा के आवागमन का महत्वपूर्ण साधन है। खराब सड़क के कारण बाइक, साइकिल और पैदल चलने वालों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है।

बरसात में स्थिति और खराब हो जाने से ग्रामीणों को आवागमन के दौरान दुर्घटना का खतरा बना रहता है।

शिकायत के बाद नाप-जोख और प्रस्ताव, फिर भी सड़क का इंतजार

प्रधान प्रतिनिधि अनिल सिंह के मुताबिक, सड़क की बदहाली को लेकर कई बार संबंधित अधिकारियों से शिकायत की गई। शिकायत के बाद जेई द्वारा मौके पर सड़क की नाप-जोख कर स्टेटमेंट तैयार किया गया और सड़क की मरम्मत का प्रस्ताव भी भेजे जाने की बात कही गई।

ग्रामीणों के अनुसार, उन्हें बताया गया कि बजट उपलब्ध होने के बाद सड़क निर्माण/मरम्मत का कार्य कराया जाएगा। लेकिन इसके बाद भी धरातल पर काम शुरू नहीं हुआ।

ग्रामीणों का सवाल है कि जब सड़क की हालत विभाग के संज्ञान में है और प्रस्ताव भी तैयार हो चुका है, तो फिर मरम्मत के लिए बजट कब आएगा और ग्रामीणों को कब राहत मिलेगी?

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स्कूली बच्चों के लिए सबसे बड़ा खतरा

सड़क की बदहाली का सबसे गंभीर असर स्कूली बच्चों पर पड़ रहा है।

ग्रामीण शत्रोहन सिंह, पप्पू सिंह, देवीबक्स सिंह, कुंवर बहादुर सिंह, खेलावन पाल और सत्यनाम गौतम ने बताया कि कुड़वा, रतौली और अमित का पुरवा में उच्च प्राथमिक विद्यालय नहीं है। ऐसे में इन गांवों के बच्चे पढ़ाई के लिए अहीरगांव स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय जाते हैं।

बच्चों को स्कूल जाने के लिए इसी जर्जर सड़क से होकर गुजरना पड़ता है।

सड़क पर जगह-जगह बने गड्ढे और बाहर निकली नुकीली गिट्टियां साइकिल से जाने वाले बच्चों के लिए खासा खतरा बनी हुई हैं। ग्रामीणों का दावा है कि कई बच्चे साइकिल से गुजरते समय गिरकर चोटिल भी हो चुके हैं।

बारिश में बढ़ जाता है हादसे का खतरा

बरसात के दौरान सड़क के गड्ढों में पानी भर जाने से समस्या और गंभीर हो जाती है। पानी से भरे गड्ढों की गहराई दिखाई नहीं देती, जिससे बाइक और साइकिल सवारों के गिरने का खतरा बना रहता है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सड़क की मरम्मत नहीं कराई गई तो बारिश के मौसम में किसी बड़ी दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता।

ग्रामीणों ने प्रशासन से की तत्काल कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन से सड़क का स्थलीय निरीक्षण कराकर जल्द से जल्द बजट जारी करने और मरम्मत कार्य शुरू कराने की मांग की है।

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ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की मरम्मत होने से कुड़वा, अहीरगांव, अमित का पुरवा, लूसा का पुरवा और शिवा का पुरवा सहित आसपास के कई गांवों के लोगों को राहत मिलेगी। सबसे बड़ी राहत उन स्कूली बच्चों को मिलेगी, जिन्हें रोजाना इसी रास्ते से होकर विद्यालय जाना पड़ता है।

अब सवाल सड़क पर नहीं, कार्रवाई पर है

सड़क की नाप-जोख हो चुकी है, प्रस्ताव भेजे जाने की बात भी सामने आ रही है और ग्रामीण लगातार शिकायत कर रहे हैं। इसके बावजूद सड़क पर गड्ढे जस के तस हैं।

ग्रामीणों की मांग अब सिर्फ आश्वासन की नहीं, बल्कि सड़क पर काम शुरू होने की है।

रिपोर्ट – मंसूफ अहमद 

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Author: Kamran Alvi

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