लखनऊ पुलिस ने इंटरनेशनल साइबर फ्रॉड कॉल सेंटर का बड़ा खुलासा करते हुए 119 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
गिरोह अमेरिका के नागरिकों को फर्जी कॉल कर Gift Card और Cryptocurrency के जरिए करोड़ों की ठगी करता था।
103 लैपटॉप, 177 मोबाइल और डिजिटल उपकरण बरामद।

लखनऊ, उत्तर प्रदेश | 03 जुलाई 2026
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कमिश्नरेट पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संचालित एक बड़े साइबर फ्रॉड कॉल सेंटर का पर्दाफाश करते हुए 119 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह अमेरिका (USA) समेत कई विदेशी नागरिकों को प्रतिष्ठित कंपनियों और सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बनकर कॉल करता था और Gift Card, Cryptocurrency तथा इंटरनेट कॉलिंग प्लेटफॉर्म के जरिए करोड़ों रुपये की साइबर ठगी को अंजाम देता था।
पुलिस ने कार्रवाई के दौरान 103 लैपटॉप, 177 कॉलिंग मोबाइल फोन, डिजिटल उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए हैं। मामले में कॉल सेंटर के ऑपरेशन मैनेजर ललित खैराजानी और विक्रम सिंह परमार सहित कई प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
समिट बिल्डिंग की 11वीं मंजिल पर चल रहा था फर्जी इंटरनेशनल कॉल सेंटर
कमिश्नरेट लखनऊ के पुलिस आयुक्त अमरेंद्र कुमार सेंगर के निर्देशन में साइबर क्राइम सेल और साइबर थाना की संयुक्त टीम ने विभूतिखंड स्थित समिट बिल्डिंग की 11वीं मंजिल पर छापा मारकर इस फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा किया।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने Solaris Solution नाम से कंपनी बनाकर इंटरनेशनल कॉल सेंटर की आड़ में साइबर ठगी का पूरा नेटवर्क खड़ा कर रखा था। यह कॉल सेंटर मुख्य रूप से शाम 7 बजे से रात 3 बजे तक संचालित होता था और विदेशी नागरिकों को निशाना बनाया जाता था।
अमेरिकी नागरिकों को फंसाकर Gift Card और Cryptocurrency में वसूली
जांच में सामने आया कि गिरोह विदेशी नागरिकों को बड़ी कंपनियों, टेक्निकल सपोर्ट एजेंसियों और सरकारी विभागों के नाम पर कॉल करता था।
इसके बाद उन्हें डराकर या लालच देकर Gift Card खरीदने, Cryptocurrency ट्रांसफर करने अथवा अन्य ऑनलाइन भुगतान करने के लिए मजबूर किया जाता था। पूरी ठगी इंटरनेट आधारित कॉलिंग प्लेटफॉर्म के जरिए संचालित होती थी।
ऑनलाइन रिफंड के नाम पर भी होती थी ठगी
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले लोगों को भी निशाना बनाता था।
जब कोई ग्राहक गूगल पर किसी कंपनी का Refund Customer Care Number खोजता था, तो जालसाज उससे संपर्क कर लेते थे। इसके बाद तकनीकी सहायता देने के बहाने बैंक संबंधी जानकारी और ओटीपी हासिल कर खाते से रकम निकाल लेते थे।
5 राउंड इंटरव्यू के बाद होती थी भर्ती, लाखों का इंसेंटिव
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस कॉल सेंटर में कर्मचारियों की भर्ती 5 चरणों वाले इंटरव्यू के बाद की जाती थी।
- कर्मचारियों को ₹34,000 से ₹40,000 मासिक वेतन दिया जाता था।
- सफल साइबर ठगी पर ठगी गई रकम का करीब 10 प्रतिशत इंसेंटिव भी मिलता था।
- कॉल सेंटर में बड़ी संख्या में युवतियां और पूर्वोत्तर (North-East) राज्यों के युवक-युवतियां भी कार्यरत थे।
गुजरात समेत कई राज्यों से जुड़े ऑपरेशन मैनेजर गिरफ्तार
पुलिस ने इस मामले में कई राज्यों के आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें गुजरात निवासी ललित खैराजानी और विक्रम सिंह परमार मुख्य ऑपरेशन मैनेजर बताए जा रहे हैं, जो वर्तमान में लखनऊ में रहकर पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहे थे।
इसके अलावा महाराष्ट्र, राजस्थान, झारखंड, नागालैंड, मणिपुर, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, अरुणाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों के आरोपी भी गिरफ्तार किए गए हैं।
पुलिस को मिली बड़ी सफलता, नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपी रडार पर
कमिश्नरेट लखनऊ पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान का हिस्सा है। बरामद डिजिटल उपकरणों और दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है।
पुलिस अब इस पूरे इंटरनेशनल नेटवर्क के मास्टरमाइंड, विदेशी कनेक्शन, वित्तीय लेन-देन और अन्य सहयोगियों की तलाश में जुटी है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही इस गिरोह से जुड़े अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी भी की जाएगी।
रिपोर्ट – नौमान माजिद












