Barabanki News: बाराबंकी के हैदरगढ़ क्षेत्र में मासूम अंशू की सर्पदंश से मौत के बाद भी स्कूलों की सफाई व्यवस्था नहीं सुधरी।
कंपोजिट विद्यालय बरगदहा में झाड़ियां और गंदगी के बीच पढ़ने को मजबूर बच्चे, शिक्षा विभाग पर उठे सवाल।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 30 जुलाई 2026
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के हैदरगढ़ तहसील क्षेत्र में प्राथमिक विद्यालय देवगरपुर में सर्पदंश से कक्षा 3 के सात वर्षीय छात्र अंशू की दर्दनाक मौत के बाद शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। घटना के बाद उम्मीद थी कि स्कूल परिसरों की साफ-सफाई और बच्चों की सुरक्षा को लेकर तत्काल व्यापक अभियान चलाया जाएगा, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।
क्षेत्र के कई सरकारी विद्यालयों में आज भी बड़ी-बड़ी झाड़ियां, उगी हुई घास, गंदगी और बदहाल परिसर देखने को मिल रहे हैं। ऐसे हालात में छात्र-छात्राएं जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सफाई कराई जाती तो शायद ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सकती थी।

कंपोजिट विद्यालय बरगदहा में मिली बदहाल व्यवस्था
मासूम अंशू की मौत के कुछ ही दिनों बाद कंपोजिट विद्यालय बरगदहा की स्थिति ने शिक्षा विभाग की तैयारियों की पोल खोल दी।
विद्यालय परिसर के निरीक्षण में पाया गया कि भवन के सामने स्थित हैंडपंप के आसपास घास और गंदगी का अंबार लगा हुआ है। वहीं विद्यालय के शौचालय के चारों ओर झाड़ियां और झंखाड़ फैले हुए हैं। परिसर की हालत देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि काफी समय से यहां नियमित सफाई नहीं कराई गई है।
विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों को इसी असुरक्षित वातावरण में शिक्षा ग्रहण करनी पड़ रही है, जहां किसी भी समय सांप, बिच्छू या अन्य विषैले जीव-जंतुओं का खतरा बना रहता है।

शिक्षिका बोलीं- कई बार अनुरोध किया, फिर भी नहीं हुई सफाई
विद्यालय की शिक्षिका संजूलता ने बताया कि विद्यालय परिसर की साफ-सफाई के लिए नगर पंचायत के सफाई कर्मियों से कई बार अनुरोध किया गया, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।
उन्होंने कहा कि लगातार शिकायतों के बावजूद विद्यालय परिसर की सफाई न होना बच्चों की सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है। यदि समय रहते सफाई नहीं कराई गई तो भविष्य में फिर किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।

शौचालय के पास सांप के डसने से गई थी मासूम अंशू की जान
गौरतलब है कि बीते सोमवार को सहावर गांव निवासी अशोक लोधी के सात वर्षीय पुत्र अंशू, जो कक्षा 3 का छात्र था, विद्यालय में शौचालय जाने के दौरान झाड़ियों में छिपे जहरीले सांप का शिकार हो गया था।
सर्पदंश के बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई और उपचार के लिए अस्पताल ले जाने पर चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस घटना ने पूरे जिले को झकझोर दिया था और स्कूल परिसरों की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े किए थे।

जिम्मेदारों की लापरवाही पर उठ रहे सवाल
अंशू की मौत के बाद भी यदि विद्यालयों की सफाई व्यवस्था में कोई सुधार नहीं होता है तो यह प्रशासनिक लापरवाही मानी जाएगी। अभिभावकों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना शिक्षा विभाग और स्थानीय निकायों की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
यदि परिसर में झाड़ियां और गंदगी बनी रहेंगी तो भविष्य में भी ऐसे हादसों की आशंका बनी रहेगी।
ईओ बोले- कल ही भेजी जाएगी सफाई टीम
जब इस संबंध में नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी (ईओ) इंद्रभान सिंह से बात की गई तो उन्होंने बताया कि मामला उनके संज्ञान में आया है।
उन्होंने कहा कि अगले ही दिन सफाई टीम भेजकर विद्यालय परिसर की साफ-सफाई कराई जाएगी, ताकि बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।
बीईओ से नहीं हो सका संपर्क
वहीं इस पूरे मामले पर खंड शिक्षा अधिकारी आराधना अवस्थी का पक्ष जानने के लिए उनके सीयूजी नंबर पर कई बार संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।
बच्चों की सुरक्षा के लिए स्थायी व्यवस्था जरूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल किसी हादसे के बाद सफाई अभियान चलाना पर्याप्त नहीं है। विद्यालयों में नियमित सफाई, झाड़ियों की कटाई, शौचालयों की देखरेख और परिसर का समय-समय पर निरीक्षण अनिवार्य किया जाना चाहिए। तभी सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद










