बाराबंकी में निजी अस्पतालों पर स्वास्थ्य विभाग का बड़ा एक्शन।
आश्वी हॉस्पिटल सील, नोबेल, कुमार और चौहान नर्सिंग होम को नोटिस।
अग्नि सुरक्षा और बेसमेंट में इलाज को लेकर प्रशासन की सख्ती।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 03 जुलाई 2026
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में बिना मानकों के संचालित निजी अस्पतालों के खिलाफ प्रशासन का अभियान लगातार तेज होता जा रहा है। अग्नि सुरक्षा नियमों और बेसमेंट में संचालित चिकित्सा सेवाओं को लेकर गठित टास्क फोर्स ने गुरुवार को शहर के कई निजी अस्पतालों का औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान गंभीर खामियां मिलने पर आश्वी हॉस्पिटल को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया, जबकि कई अन्य अस्पतालों को तीन दिन के भीतर कमियां दूर करने का नोटिस जारी किया गया है।
स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई के बाद जिले के निजी अस्पताल संचालकों में हड़कंप मच गया है।
सीएमओ के निर्देश पर टास्क फोर्स ने की कार्रवाई
मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) डॉ. रंजन गौतम के निर्देश पर गठित टास्क फोर्स ने जिले के विभिन्न निजी अस्पतालों का निरीक्षण किया। टीम में नोडल अधिकारी एसीएमओ डॉ. एल.बी. गुप्ता, चिकित्सा पंजीकरण के नोडल अधिकारी डॉ. संजय बाबू, उप मुख्य चिकित्साधिकारी तथा वरिष्ठ पटल सहायक चिकित्सा पंजीकरण जितेंद्र कुमार शुक्ला शामिल रहे।
निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा मानकों, आपातकालीन निकास व्यवस्था, बेसमेंट में संचालित चिकित्सा सेवाओं तथा पंजीकृत मेडिकल एवं पैरामेडिकल स्टाफ की उपलब्धता की जांच करना था।

आश्वी हॉस्पिटल तत्काल प्रभाव से किया गया सील
निरीक्षण के दौरान आश्वी हॉस्पिटल में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।
जांच में पाया गया कि अस्पताल में—
- अग्नि सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे।
- आपातकालीन निकास द्वार उपलब्ध नहीं था।
- पंजीकृत मेडिकल एवं पैरामेडिकल स्टाफ भी मौजूद नहीं था।
इन गंभीर कमियों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल को अग्रिम आदेशों तक तत्काल प्रभाव से सील कर दिया।
इन अस्पतालों को जारी हुआ नोटिस
नोबेल हॉस्पिटल
निरीक्षण के दौरान अस्पताल में—
- इमरजेंसी एग्जिट (आपातकालीन निकास)
- फायर अलर्ट अलार्म
- स्मोक एग्जॉस्ट सिस्टम
जैसी आवश्यक अग्नि सुरक्षा व्यवस्थाएं नहीं मिलीं। अस्पताल प्रबंधन को तीन दिन के भीतर सभी कमियां दूर करने का नोटिस दिया गया।
कुमार हॉस्पिटल
यहां भी अग्नि सुरक्षा मानकों में गंभीर कमी पाई गई। अस्पताल में आपातकालीन निकास, फायर अलर्ट अलार्म और स्मोक एग्जॉस्ट सिस्टम न होने पर तीन दिन का नोटिस जारी किया गया।

चौहान नर्सिंग होम पर भी बड़ी कार्रवाई की तैयारी
टास्क फोर्स ने चौहान नर्सिंग होम का निरीक्षण किया तो पाया कि अस्पताल बेसमेंट में संचालित हो रहा था।
निरीक्षण में यह भी सामने आया कि—
- अस्पताल में आपातकालीन निकास द्वार नहीं था।
- अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था।
- निरीक्षण के समय दो मरीज भर्ती मिले।
स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल को 3 जुलाई की शाम 4:30 बजे तक संचालन बंद करने का नोटिस जारी किया।
साथ ही स्पष्ट चेतावनी दी गई कि यदि आदेश का पालन नहीं किया गया तो 4 जुलाई 2026 को सुबह 10 बजे अस्पताल को सील करने के साथ उसका पंजीकरण निरस्त करने एवं अन्य विधिक कार्रवाई की जाएगी।
उमा हॉस्पिटल निरीक्षण के समय मिला बंद
उमा हॉस्पिटल एंड हेल्थकेयर सेंटर निरीक्षण के दौरान बंद मिला।
अस्पताल प्रबंधन ने विभागीय अधिकारियों को बताया कि सभी आवश्यक मानकों को पूरा करने के बाद दूसरे स्थान पर अस्पताल के संचालन के लिए पुनः आवेदन किया जाएगा।
गुरुवार को सुमन हॉस्पिटल पर हुई थी कार्रवाई
गौरतलब है कि इससे पहले बड़ेल स्थित सुमन हॉस्पिटल एंड ट्रामा सेंटर के बेसमेंट में संचालित चिकित्सा सेवाओं को भी स्वास्थ्य विभाग ने बंद कराते हुए बेसमेंट को सील कर दिया था।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि जिले में बिना मानकों के संचालित अस्पतालों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा और मरीजों की सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग का संदेश
स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि निजी अस्पतालों को अग्नि सुरक्षा, भवन सुरक्षा, पंजीकृत चिकित्सकीय स्टाफ और अन्य सभी निर्धारित मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले अस्पतालों के खिलाफ सीलिंग, पंजीकरण निरस्तीकरण और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद / उस्मान अली











