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बाराबंकी जिला अस्पताल की डायलिसिस यूनिट पर CMO का औचक छापा: ड्यूटी से गायब मिले डॉक्टर, व्यवस्थाओं पर उठे सवाल

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बाराबंकी जिला अस्पताल की डायलिसिस यूनिट पर CMO डॉ. रंजन गौतम का औचक निरीक्षण।

ड्यूटी से गायब मिले डॉक्टर पर जताई नाराजगी। मरीजों से ली सुविधाओं की जानकारी, मेडिकल परीक्षण को लेकर जारी किए सख्त निर्देश।

 

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 18 जून 2026

बाराबंकी के रफी अहमद किदवई मेमोरियल जिला चिकित्सालय में संचालित डायलिसिस यूनिट का गुरुवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. रंजन गौतम ने औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान डायलिसिस यूनिट में तैनात चिकित्सक के अनुपस्थित मिलने पर सीएमओ ने कड़ी नाराजगी जताई और तत्काल स्पष्टीकरण तलब करने के निर्देश दिए। अचानक हुए निरीक्षण से अस्पताल प्रशासन और डायलिसिस यूनिट के कर्मचारियों में हड़कंप मच गया।

शिकायतों के बाद CMO ने किया औचक निरीक्षण

जानकारी के अनुसार जिला अस्पताल में डायलिसिस यूनिट का संचालन निजी एजेंसी संजीवनी प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है। पिछले कुछ समय से मरीजों और उनके तीमारदारों द्वारा शिकायत की जा रही थी कि डायलिसिस प्रक्रिया के दौरान डॉक्टर नियमित रूप से मौजूद नहीं रहते और अधिकांश कार्य नर्सिंग स्टाफ के भरोसे संचालित होता है। इन्हीं शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए सीएमओ डॉ. रंजन गौतम ने औचक निरीक्षण किया।

डायलिसिस यूनिट में नहीं मिले चिकित्सक

निरीक्षण के दौरान सीएमओ ने सबसे पहले अस्पताल की ओपीडी व्यवस्था का जायजा लिया। इसके बाद वह मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) डॉ. जे.पी. मौर्य के साथ एक्स-रे विभाग के निकट स्थित डायलिसिस सेंटर पहुंचे।

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डायलिसिस यूनिट में पहुंचकर उन्होंने नर्सिंग स्टाफ से व्यवस्थाओं और चिकित्सकीय निगरानी के बारे में जानकारी ली। पूछताछ में स्टाफ ने बताया कि ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक सुबह आए थे, लेकिन बाद में चले गए। निरीक्षण के दौरान यूनिट के चिकित्सक डॉ. एन.एस. यादव मौके पर उपस्थित नहीं मिले।

इस पर सीएमओ ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए निर्देश दिया कि चिकित्सक के आते ही तत्काल उनसे संपर्क कराया जाए और उन्हें सीएमओ कार्यालय में उपस्थित होने के लिए कहा जाए। उन्होंने कहा कि डायलिसिस जैसी संवेदनशील चिकित्सा प्रक्रिया के दौरान डॉक्टर की मौजूदगी बेहद आवश्यक है, क्योंकि किसी मरीज की हालत बिगड़ने पर तत्काल चिकित्सकीय हस्तक्षेप जरूरी होता है।

मरीजों से पूछे इलाज और सुविधाओं के हालात

निरीक्षण के दौरान सीएमओ ने डायलिसिस करा रहे मरीजों और उनके परिजनों से भी बातचीत की। उन्होंने उपचार व्यवस्था, उपलब्ध सुविधाओं, स्टाफ के व्यवहार और किसी प्रकार की अवैध वसूली के संबंध में जानकारी ली।

मरीजों से पूछा गया कि उन्हें डायलिसिस के दौरान किसी तरह की परेशानी तो नहीं होती और क्या किसी कर्मचारी द्वारा अतिरिक्त धनराशि की मांग की जाती है। मरीजों ने अपनी समस्याओं और अनुभवों से अधिकारियों को अवगत कराया।

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प्रतिदिन 24 मरीजों की होती है डायलिसिस

डायलिसिस यूनिट के नर्सिंग स्टाफ ने बताया कि केंद्र में कुल आठ डायलिसिस मशीनें स्थापित हैं। यहां प्रतिदिन तीन शिफ्टों में लगभग 24 मरीजों की डायलिसिस की जाती है। बाराबंकी सहित आसपास के जनपदों से बड़ी संख्या में किडनी रोगी उपचार के लिए इस केंद्र पर पहुंचते हैं।

सरकारी अस्पताल में डायलिसिस सुविधा उपलब्ध होने से आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को बड़ी राहत मिल रही है। निजी अस्पतालों और डायलिसिस केंद्रों पर एक बार की डायलिसिस के लिए तीन से पांच हजार रुपये तक खर्च करना पड़ता है, जबकि जिला अस्पताल में यह सुविधा पात्र मरीजों को निशुल्क अथवा अत्यंत कम खर्च पर उपलब्ध कराई जा रही है।

मेडिकल परीक्षण को लेकर जारी किए सख्त निर्देश

निरीक्षण के दौरान सीएमओ डॉ. रंजन गौतम ने अस्पताल में होने वाले मेडिको-लीगल मामलों और मेडिकल परीक्षण व्यवस्था की भी समीक्षा की।

उन्होंने सीएमएस डॉ. जे.पी. मौर्य को निर्देशित किया कि बिना पुलिस अथवा संबंधित थाना-कोतवाली से प्राप्त अधिकृत पत्र के किसी भी व्यक्ति का प्राइवेट मेडिकल परीक्षण नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि केवल एफिडेविट या निजी आवेदन के आधार पर मेडिकल परीक्षण करना नियमों के अनुरूप नहीं है।

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सीएमओ ने अस्पताल परिसर में इस संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश और चेतावनी बोर्ड लगाने के निर्देश भी दिए, ताकि आम लोगों और चिकित्सकों को नियमों की जानकारी हो सके।

स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की उम्मीद

सीएमओ के निरीक्षण के बाद जिला अस्पताल की डायलिसिस यूनिट की व्यवस्थाओं और चिकित्सकीय निगरानी को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। मरीजों और उनके परिजनों को उम्मीद है कि इस कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा और डायलिसिस जैसे महत्वपूर्ण उपचार के दौरान चिकित्सकों की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।

रिपोर्ट – मंसूफ अहमद / उस्मान अली 

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Author: Kamran Alvi

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