Barabanki: सुबेहा थाना क्षेत्र में पॉक्सो एक्ट के मुकदमे में सुलह से इंकार करने पर पीड़िता से मारपीट और जान से मारने की धमकी का आरोप।
पीड़िता के भाइयों को बलात्कार के झूठे केस में फंसा कर जेल भेजने की धमकी
पीड़िता ने एसपी अर्पित विजयवर्गीय से कार्रवाई और सुरक्षा की मांग की।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 24 फरवरी 2026
जिले के सुबेहा थाना क्षेत्र में यौन उत्पीड़न एवं पॉक्सो एक्ट से जुड़े मामले में सुलह का बनाने और इंकार करने पर पीड़िता से मारपीट का गंभीर मामला सामने आया है। पीड़िता ने पुलिस अधीक्षक अर्पित विजयवर्गीय को शिकायती पत्र देकर कार्रवाई की मांग की है।
क्या है पूरा मामला ?
सुबेहा थाना क्षेत्र की रहने वाली पीड़िता ने अपने प्रार्थना पत्र में बताया कि वर्ष 2025 में उसने गांव के ही युवक शुभम तिवारी पुत्र राम कुमार तिवारी के ख़िलाफ़ यौन उत्पीड़न और पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराया था।
पीड़िता के अनुसार, 22 फरवरी 2026 की रात करीब 8 बजे गांव की ही रहने वाली शिवमती पत्नी पंकज विश्वकर्मा उसके घर पहुंची और कथित तौर पर शुभम तिवारी के ख़िलाफ़ दर्ज मुकदमे में सुलह का दबाव बनाने लगी।

सुलह से इंकार पर मारपीट
पीड़िता का आरोप है कि जब उसने सुलह से इंकार कर दिया, तो शिवमती आगबबूला हो गई और गाली-गलौज करते हुए उसे लात-घूंसो व थप्पड़ों से पीटने लगी।
शोर सुनकर जब आसपास के लोग मौके पर पहुंचने लगे, तो आरोपी महिला ने कथित रूप से जान से मरवाने और पीड़िता के भाइयों को झूठे मुकदमें में फंसाकर जेल भेजने की धमकी दी और वहां से चली गई।

परिवार में दहशत, सुरक्षा की मांग
पीड़िता का कहना है कि आरोपी महिला काफी बदमाश और दबंग प्रवृत्ति की है और निर्दोष लोगों के खिलाफ झूठी शिकायते कर ब्लैकमेल करने का काम करती है। आपराधिक प्रवृति के लोगों के साथ महिला का उठना बैठना भी है। परिवार को आशंका है कि यदि समय रहते कार्रवाई न हुई तो उनके साथ कोई भी अप्रिय घटना हो सकती है।
पीड़िता ने आरोपी शुभम तिवारी और शिवमती के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई तथा अपने व परिवार की सुरक्षा की मांग की है।
पुलिस अधीक्षक ने दिए जांच के निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक अर्पित विजयवर्गीय ने सुबेहा थाना पुलिस को जांच कर उचित एवं कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। अब सबकी नज़र पुलिस जांच और आगे की कार्रवाई पर टिकी है।
वही यौन उत्पीड़न और पॉक्सो एक्ट जैसे संवेदनशील मामले में दबाव और धमकी की यह घटना एक बार फिर जनपद की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है।
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद













