Barabanki: दयालगंज विद्यालय में मूक-बधिर बच्चों को इशारों की भाषा से शिक्षा दी जा रही है।
शिक्षक नीरज अग्निहोत्री और सहपाठियों के सहयोग से समावेशी शिक्षा की अनोखी मिसाल पेश की जा रही है।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 27 फरवरी 2026
बाराबंकी जिले के लोनी कटरा थाना क्षेत्र अंतर्गत त्रिवेदीगंज स्थित दयालगंज विद्यालय समावेशी शिक्षा की मिसाल बन रहा है। यहां मूक-बधिर बच्चे इशारों की भाषा के माध्यम से शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। शिक्षक और सहपाठियों के सहयोग से दिव्यांग बच्चे पढ़ाई में नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं।
शिक्षक नीरज अग्निहोत्री के मार्गदर्शन में अनोखी पहल
विद्यालय में अध्यापक Neeraj Agnihotri के मार्गदर्शन में तीसरी कक्षा की छात्राएं मान्या और आराध्या, मूक-बधिर छात्र-छात्राओं अंजली, नैती और रौनक को पढ़ाने में सक्रिय सहयोग कर रही हैं।
इशारों की भाषा से समझाने के बाद ये बच्चे अपना पढ़ना-लिखना सहजता से पूरा कर लेते हैं। मान्या और आराध्या इन बच्चों की ‘आवाज’ बनकर पाठ समझाती हैं और कक्षा में उनका आत्मविश्वास बढ़ाती हैं।

समावेशी शिक्षा की जीवंत मिसाल
दयालगंज विद्यालय में यह पहल दिखाती है कि यदि शिक्षक और सहपाठी सहयोगी हों तो कोई भी कमी बच्चों की प्रगति में बाधा नहीं बन सकती। यहां मूक-बधिर बच्चों को अलग-थलग नहीं रखा गया, बल्कि सामान्य कक्षा में शामिल कर उन्हें समान अवसर दिए जा रहे हैं।
“गुरु की करके वंदना बदल भाग्य के लेख” — यह कहावत यहां साकार होती दिखाई देती है। जिस तरह कुम्हार कच्ची मिट्टी को आकार देता है, उसी प्रकार शिक्षक भी छात्रों के व्यक्तित्व और भविष्य को गढ़ते हैं।

अभिभावकों को जागरूक करना था बड़ी चुनौती
अध्यापक Neeraj Agnihotri ने बताया कि शुरुआत में मूक-बधिर बच्चों के अभिभावकों को शिक्षा के लिए तैयार करना चुनौतीपूर्ण था। समाज में अक्सर दिव्यांगता को कमजोरी समझ लिया जाता है, लेकिन सही मार्गदर्शन और सकारात्मक वातावरण मिलने पर बच्चे हर बाधा पार कर सकते हैं।

सहयोग से बन रहा आत्मनिर्भर भविष्य
विद्यालय का यह प्रयास न केवल शिक्षा प्रदान कर रहा है, बल्कि बच्चों में आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता भी विकसित कर रहा है। शिक्षक और सहपाठियों के सहयोग से ये बच्चे यह साबित कर रहे हैं कि सीखने की इच्छा हो तो कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती।
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद











