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Barabanki: वन विभाग का गज़ब कारनामा, जारी कर दिया हरे-भरे फलदार पेड़ों की कटान का परमिट, किसान नेताओ ने की जांच और कार्रवाई की मांग

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Barabanki: हैदरगढ़ क्षेत्र में परमिट की आड़ में आम, जामुन समेत हरे फलदार पेड़ों की कटान का आरोप।

बम्हरौली और बहरामपुर गांव में दर्जनों पेड़ काटे गए।

भारतीय किसान यूनियन ने उच्च अधिकारियों से जांच और कार्रवाई की मांग की।

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बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 27 फरवरी 2026

बाराबंकी जिले के हैदरगढ़ क्षेत्र में हरे-भरे फलदार पेड़ों की कटान को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। आरोप है कि परमिट की आड़ में आम, जामुन, महुआ और गूलर जैसे पेड़ों को काटा जा रहा है। इस मामले को लेकर भारतीय किसान यूनियन (राष्ट्रवादी) के जिलाध्यक्ष ने उच्च अधिकारियों से शिकायत कर जांच और कार्रवाई की मांग की है।

 

बम्हरौली और बहरामपुर गांव में कटे दर्जनों फलदार पेड़

जानकारी के अनुसार, हैदरगढ़ क्षेत्र के बम्हरौली और बहरामपुर गांवों में बौर और फल से लदे देसी आम के पेड़ों समेत आधा दर्जन से अधिक हरे-भरे पेड़ों को काट दिया गया। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि कई पेड़ों की लकड़ी ठेकेदार उठा ले गए हैं, जबकि कुछ स्थानों पर कटान अभी भी जारी है।

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ग्रामीणों का कहना है कि जिन पेड़ों को काटा गया, वे पूरी तरह हरे और फलदार थे। ऐसे समय में जब सरकार पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण अभियान चला रही है, उसी दौरान फलदार पेड़ों की कटाई सवाल खड़े कर रही है।

परमिट में ‘विकास कार्य में बाधा’ का हवाला

ठेकेदारों का दावा है कि उनके पास कटान का वैध परमिट है। हालांकि आरोप है कि परमिट में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि पेड़ सूखे थे या हरे। केवल यह उल्लेख किया गया कि पेड़ विकास कार्य में बाधा बन रहे थे।

ग्रामीणों और किसान नेताओं का आरोप है कि गलत कारण दर्शाकर परमिट जारी किए गए, जिसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

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किसान यूनियन ने उठाई आवाज

Bharatiya Kisan Union (राष्ट्रीयतावादी) के जिलाध्यक्ष विधि चंद यादव ने मामले पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने वन संरक्षक, लखनऊ को पत्र लिखकर अवैध कटान पर तत्काल रोक लगाने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

यादव का कहना है कि क्षेत्र में आम, जामुन, महुआ और गुलर जैसे पेड़ों की धड़ल्ले से कटाई हो रही है, जिससे पर्यावरण और किसानों को नुकसान पहुंच रहा है।

तेज रफ्तार वाहनों से लकड़ी ढुलाई, हादसे का खतरा

स्थानीय लोगों का आरोप है कि काटे गए पेड़ों की लकड़ी ट्रैक्टर-ट्रॉली और पिकअप वाहनों से तेज रफ्तार में ढोई जा रही है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बना हुआ है। ग्रामीणों ने प्रशासन से अवैध कटान पर तत्काल अंकुश लगाने और पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है।

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रिपोर्ट – मंसूफ अहमद

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Author: Kamran Alvi

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