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बाराबंकी में 64 वर्ष पुराने अतिक्रमण पर चला बुलडोजर: तालाब की भूमि पर बने 36 अवैध मकान ध्वस्त, हाईवे पर लगा लंबा जाम

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बाराबंकी के अनवारी कस्बे में प्रशासन ने सरकारी तालाब की भूमि से 36 अवैध मकान ध्वस्त कर कब्जा मुक्त कराया।

स्थानीय लोगों के अनुसार 1962 की चकबंदी के बाद से जमीन पर कब्जा था।

कार्रवाई के दौरान लखनऊ-महमूदाबाद हाईवे पर एक किलोमीटर से अधिक लंबा जाम लग गया।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 05 जून 2026

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में सरकारी भूमि और तालाबों को अतिक्रमण मुक्त कराने के अभियान के तहत शुक्रवार को फतेहपुर तहसील क्षेत्र के अनवारी कस्बे में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की। राजस्व अभिलेखों में तालाब के रूप में दर्ज सरकारी भूमि पर वर्षों से किए गए अवैध कब्जों को हटाते हुए प्रशासन ने करीब 36 अवैध मकानों को ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई उपजिलाधिकारी कार्तिकेय सिंह और क्षेत्राधिकारी जगतराम कन्नौजिया के नेतृत्व में भारी पुलिस बल की मौजूदगी में संपन्न हुई।

चार जेसीबी और पोकलैंड मशीनों की मदद से चलाए गए इस अभियान के दौरान तालाब की भूमि को कब्जा मुक्त कराया गया। प्रशासनिक कार्रवाई के बाद क्षेत्र में सरकारी भूमि पर कब्जा किए बैठे अन्य लोगों में भी हड़कंप की स्थिति देखी गई।

बाराबंकी के अनवारी कस्बे में सरकारी तालाब की भूमि पर बने अवैध निर्माणों को जेसीबी मशीन से ध्वस्त करती प्रशासनिक टीम।

तालाब की जमीन पर दशकों से था अवैध कब्जा

प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम अनवारी की गाटा संख्या 1056 राजस्व अभिलेखों में तालाब के रूप में दर्ज है। आरोप है कि वर्षों के दौरान दर्जनों लोगों ने इस सरकारी भूमि पर कब्जा कर पक्के मकान और अन्य निर्माण कर लिए थे।

प्रशासन द्वारा कई बार संबंधित लोगों को नोटिस जारी कर भूमि खाली करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद कब्जेदारों ने जमीन खाली नहीं की। वर्ष 2022 में मामला तहसीलदार न्यायालय पहुंचा, जहां धारा 67 के तहत बेदखली का आदेश पारित किया गया। प्रशासन का कहना है कि न्यायालय के आदेश के बाद भी कब्जा नहीं हटाया गया, जिसके चलते ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करनी पड़ी।

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भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में चला अभियान

शुक्रवार सुबह प्रशासनिक टीम पूरी तैयारी के साथ मौके पर पहुंची। अभियान का नेतृत्व उपजिलाधिकारी कार्तिकेय सिंह ने किया। उनके साथ नायब तहसीलदार अन्नू सिंह, लेखपाल क्षितिज तिवारी, प्रिंस शर्मा, सर्वेश यादव और राकेश सहित राजस्व विभाग की टीम मौजूद रही।

सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए कुर्सी थाना प्रभारी कृष्णकांत सिंह के नेतृत्व में भारी पुलिस बल भी तैनात किया गया था। प्रशासन की निगरानी में जेसीबी और पोकलैंड मशीनों ने अवैध निर्माणों को ध्वस्त कर तालाब की भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया।

बाराबंकी के अनवारी कस्बे में सरकारी तालाब की भूमि पर बने अवैध निर्माणों को जेसीबी मशीन से ध्वस्त करती प्रशासनिक टीम।

एसडीएम बोले- सरकारी भूमि पर कब्जा किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं

कार्रवाई के दौरान उपजिलाधिकारी कार्तिकेय सिंह ने स्पष्ट कहा कि सरकारी भूमि, तालाब और सार्वजनिक उपयोग की जमीनों पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप तालाबों और सार्वजनिक भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने का अभियान लगातार जारी रहेगा तथा भविष्य में भी ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी।

कार्रवाई के बाद क्षेत्र में मचा हड़कंप

प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद उन लोगों में चिंता बढ़ गई है जिन्होंने सरकारी भूमि पर कब्जा कर निर्माण कर रखा है। स्थानीय स्तर पर यह कार्रवाई पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।

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राजस्व विभाग के अधिकारियों का मानना है कि इस अभियान से सरकारी भूमि को सुरक्षित रखने और सार्वजनिक संसाधनों को संरक्षित करने में मदद मिलेगी।

बाराबंकी के अनवारी कस्बे में सरकारी तालाब की भूमि पर बने अवैध निर्माणों को जेसीबी मशीन से ध्वस्त करती प्रशासनिक टीम।

1962 की चकबंदी के बाद शुरू हुआ अतिक्रमण, दशकों तक नहीं हुई प्रभावी कार्रवाई

अनवारी कस्बे में सरकारी तालाब की भूमि पर हुई ध्वस्तीकरण कार्रवाई के बाद एक बड़ा सवाल भी चर्चा का विषय बन गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार ग्राम अनवारी में वर्ष 1962 की चकबंदी के बाद तालाब की जमीन पर धीरे-धीरे अतिक्रमण की शुरुआत हुई थी। ग्रामीणों का कहना है कि शुरुआत में कुछ लोगों ने अस्थायी झोपड़ियां डालकर कब्जा किया, जो समय के साथ पक्के मकानों और दुकानों में तब्दील हो गया।

स्थानीय नागरिकों का दावा है कि करीब छह दशकों से अधिक समय तक सरकारी भूमि पर निर्माण कार्य जारी रहे, लेकिन संबंधित विभागों द्वारा कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। धीरे-धीरे यह क्षेत्र एक आबादी वाले मोहल्ले का स्वरूप लेता गया और दर्जनों परिवार यहां रहने लगे।

स्थानीय लोगों ने उठाए सवाल, प्रशासनिक जवाबदेही पर भी चर्चा

ग्रामीणों का कहना है कि यदि राजस्व अभिलेखों में यह भूमि तालाब के रूप में दर्ज थी, तो निर्माण कार्यों को शुरुआती दौर में ही रोका जा सकता था। लोगों के अनुसार वर्षों तक चले इस अतिक्रमण के लिए केवल कब्जेदार ही नहीं, बल्कि निगरानी व्यवस्था और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठते हैं।

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हालांकि प्रशासन का कहना है कि तहसीलदार न्यायालय द्वारा उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 67 के तहत पारित बेदखली आदेश के अनुपालन में कार्रवाई की गई है और सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराना प्रशासन की कानूनी जिम्मेदारी है।

कार्रवाई के दौरान हाईवे पर लगा लंबा जाम

शुक्रवार को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान लखनऊ-महमूदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात भी प्रभावित रहा। स्थानीय लोगों के अनुसार मौके पर भारी संख्या में लोगों की भीड़ जमा हो गई थी, जबकि प्रशासनिक वाहन और मशीनें भी सड़क के आसपास मौजूद थीं।

इसके चलते हाईवे पर एक किलोमीटर से अधिक लंबा जाम लग गया और दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें दिखाई दीं। कई राहगीरों, व्यापारियों और यात्रियों को काफी देर तक जाम में फंसे रहना पड़ा। हालांकि पुलिस ने बाद में यातायात व्यवस्था संभालकर आवागमन को सामान्य कराया।

रिपोर्ट – अनूप सिंह 

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Author: Kamran Alvi

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