बाराबंकी सदर तहसील में अवैध प्लाटिंग के खिलाफ प्रशासन का अभियान लगातार जारी है।
एसडीएम गुंजिता अग्रवाल के निर्देश पर ग्राम गदिया में विकसित की जा रही स्मार्ट ग्रीन सिटी की अनधिकृत प्लाटिंग को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया।
इससे पहले भी कई अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई हो चुकी है।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 08 जून 2026
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले की सदर तहसील में अवैध प्लाटिंग और भू-माफियाओं के खिलाफ प्रशासन का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। आईएएस अधिकारी एवं संयुक्त मजिस्ट्रेट/उपजिलाधिकारी (SDM) गुंजिता अग्रवाल के नेतृत्व में बिना वैधानिक स्वीकृति और मानचित्र अनुमोदन के विकसित की जा रही कॉलोनियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर कार्रवाई जारी है।
ताजा कार्रवाई में तहसील प्रशासन ने ग्राम गदिया में विकसित की जा रही “स्मार्ट ग्रीन सिटी” नामक अनधिकृत प्लाटिंग परियोजना पर बुलडोजर चलाकर उसे ध्वस्त कर दिया। प्रशासन की इस कार्रवाई से अवैध प्लाटिंग के कारोबार से जुड़े बिल्डरों और भू-माफियाओं में हड़कंप मचा हुआ है।
ग्राम गदिया में चल रही थी बिना अनुमति की प्लाटिंग
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार ग्राम गदिया स्थित गाटा संख्या 2761/0.766, 2762/0.927, 2768/0.316, 2769/0.056, 2770/0.072, 2771/0.193, 2772/0.177 एवं 2773/0.253 पर स्मार्ट ग्रीन सिटी नामक परियोजना विकसित की जा रही थी।
जांच के दौरान पाया गया कि परियोजना के लिए आवश्यक मानचित्र स्वीकृति, भूमि उपयोग संबंधी अनुमतियां और अन्य वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया था। नियमों की अनदेखी करते हुए कॉलोनी विकसित करने का कार्य जारी था।
नोटिस के बाद भी नहीं माना विकासकर्ता, कोर्ट के आदेश पर हुई कार्रवाई
एसडीएम गुंजिता अग्रवाल ने बताया कि स्मार्ट ग्रीन सिटी के निदेशक को नियमानुसार कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। नोटिस के बावजूद संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया।
इसके बाद मामला न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां सुनवाई के उपरांत अनधिकृत प्लाटिंग को ध्वस्त करने का आदेश पारित किया गया।
प्रशासन का कहना है कि न्यायालय द्वारा आदेश जारी किए जाने के बावजूद निर्धारित समयावधि में अवैध निर्माण और प्लाटिंग को नहीं हटाया गया। इसके चलते प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए बुलडोजर कार्रवाई की।
पुलिस और राजस्व टीम की मौजूदगी में चला बुलडोजर
सोमवार को एसडीएम के निर्देश पर राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया था।
इसके बाद बुलडोजर की सहायता से पूरी अनधिकृत प्लाटिंग को ध्वस्त कर दिया गया। प्रशासन ने पूरे अभियान को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया।
उत्तर प्रदेश निर्माण कार्य विनियमन अधिनियम के तहत कार्रवाई
एसडीएम गुंजिता अग्रवाल ने बताया कि यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश निर्माण कार्य विनियमन अधिनियम, 1958 की धारा-10 के अंतर्गत की गई है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना स्वीकृत मानचित्र, भू-उपयोग परिवर्तन और अन्य आवश्यक अनुमतियों के विकसित की जाने वाली किसी भी कॉलोनी या प्लाटिंग को अवैध माना जाएगा।
उन्होंने कहा कि भविष्य में भी ऐसे मामलों में किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।
इससे पहले भी कई अवैध कॉलोनियों पर हो चुकी है कार्रवाई
गौरतलब है कि सदर तहसील में यह कोई पहली कार्रवाई नहीं है। इससे पहले भी एसडीएम गुंजिता अग्रवाल के निर्देश पर कई बड़ी अवैध प्लाटिंग परियोजनाओं पर बुलडोजर चल चुका है।
प्रशासन द्वारा जिन परियोजनाओं पर कार्रवाई की गई है, उनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—
समर्थ इंफ्रा और गोल्डमार इंफ्रा की अवैध प्लाटिंग
ग्राम खजूरगांव की गाटा संख्या 1391, 1392, 1269, 1352, 1441, 1446, 1348 एवं 1274 पर समर्थ इंफ्रा और गोल्डमार इंफ्रा द्वारा विकसित की जा रही अनधिकृत प्लाटिंग।
श्री कैप एसोसिएट प्राइवेट लिमिटेड की अवैध प्लाटिंग
ग्राम लक्षबर बजहा की गाटा संख्या 631, 653, 635 और 636 पर श्री कैप एसोसिएट प्राइवेट लिमिटेड द्वारा विकसित प्लाटिंग।
एम.एस. ग्रीन सिटी पर कार्रवाई
ग्राम सिपहिया की गाटा संख्या 1277 पर विकसित की जा रही एम.एस. ग्रीन सिटी की अनधिकृत परियोजना।
स्टालिन इंफ्रा डेवलपर्स की प्लाटिंग
ग्राम नानमऊ की गाटा संख्या 29, 35, 36, 39 एवं 41 पर विकसित की जा रही प्लाटिंग।
समृद्धि इंफ्राटेक का मामला
ग्राम बड़ेल में समृद्धि इंफ्राटेक द्वारा विकसित की जा रही अनियमित प्लाटिंग परियोजना।
भू-माफियाओं को स्पष्ट संदेश, जीरो टॉलरेंस नीति पर प्रशासन
लगातार हो रही इन कार्रवाइयों से साफ संकेत मिल रहा है कि सदर तहसील प्रशासन अवैध प्लाटिंग और भूमि संबंधी अनियमितताओं के मामलों में जीरो टॉलरेंस नीति पर काम कर रहा है।
एसडीएम गुंजिता अग्रवाल ने कहा कि भू-उपयोग नियमों के उल्लंघन, सरकारी भूमि पर कब्जे और बिना अनुमति कॉलोनी विकसित करने के मामलों को गंभीरता से लिया जा रहा है। प्रत्येक शिकायत और मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
आम नागरिकों ने सराहा प्रशासन का कदम
स्थानीय लोगों का कहना है कि अवैध प्लाटिंग पर हो रही कार्रवाई आम खरीदारों के हित में है। बिना स्वीकृति विकसित की जाने वाली कॉलोनियों में प्लॉट खरीदने वाले लोगों को भविष्य में कानूनी और प्रशासनिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
लोगों का मानना है कि प्रशासन की सख्ती से न केवल अवैध कॉलोनियों पर रोक लगेगी बल्कि सुनियोजित शहरी विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद











