बाराबंकी के संयुक्त चिकित्सालय में टॉर्च की रोशनी में इलाज: 10 घंटे बिजली गुल रहने से मरीज बेहाल, स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
ट्रांसफार्मर के केबल में फॉल्ट से अस्पताल में छाया अंधेरा
भीषण गर्मी में हाथ के पंखे से रात काटते रहे मरीज और तीमारदार
100 बेड के अस्पताल में नहीं मिली वैकल्पिक बिजली व्यवस्था, अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 28 मई 2026
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में स्वास्थ्य विभाग की बदहाल व्यवस्था एक बार फिर उजागर हो गई। सिरौलीगौसपुर तहसील क्षेत्र स्थित संयुक्त चिकित्सालय सिरौलीगौसपुर में बिजली संकट के चलते मरीजों को टॉर्च की रोशनी में इलाज कराने को मजबूर होना पड़ा। अस्पताल का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें अस्पताल परिसर और वार्डों में फैला अंधेरा साफ देखा जा सकता है।
बताया जा रहा है कि बीती रात अस्पताल में करीब 10 घंटे तक बिजली आपूर्ति बाधित रही। भीषण गर्मी और उमस के बीच भर्ती मरीजों तथा उनके तीमारदारों को पूरी रात भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। मरीज हाथ के पंखे झलते रहे, जबकि कई वार्डों में मोबाइल टॉर्च और इमरजेंसी लाइट के सहारे इलाज किया गया।
ट्रांसफार्मर के केबल में फॉल्ट से पैदा हुआ संकट
जानकारी के अनुसार अस्पताल परिसर में लगे ट्रांसफार्मर से निकले केबल में फॉल्ट आने के कारण बिजली व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई। बिजली गुल होने के बाद अस्पताल के अधिकांश वार्ड अंधेरे में डूब गए। गर्मी से मरीजों की हालत बिगड़ने लगी, लेकिन अस्पताल प्रशासन के पास बिजली की कोई प्रभावी वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी।
स्थानीय लोगों और तीमारदारों का आरोप है कि 100 बेड वाले इस सरकारी अस्पताल में जनरेटर और बैकअप व्यवस्था की पर्याप्त सुविधा नहीं होने के कारण मरीजों को गंभीर संकट का सामना करना पड़ा।
टॉर्च की रोशनी में चलता रहा उपचार
वायरल वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि अस्पताल कर्मी मोबाइल टॉर्च और इमरजेंसी लाइट के सहारे मरीजों का उपचार कर रहे हैं। कई मरीजों के परिजन हाथ से पंखा झलते नजर आए। बिजली न होने के कारण मरीजों को दवाइयों, जांच और अन्य आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं में भी परेशानी हुई।
भीषण गर्मी में अस्पताल की यह स्थिति स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों और व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
मौके पर नहीं पहुंचे जिम्मेदार अधिकारी
स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिजली संकट की सूचना मिलने के बावजूद बिजली विभाग के एसडीओ और अधिशासी अभियंता मौके पर नहीं पहुंचे। इससे लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिली। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते अधिकारी सक्रिय होते तो मरीजों को इतनी परेशानी नहीं झेलनी पड़ती।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
संयुक्त चिकित्सालय सिरौलीगौसपुर क्षेत्र का प्रमुख सरकारी अस्पताल माना जाता है, जहां आसपास के ग्रामीण इलाकों से बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में बिजली जैसी बुनियादी सुविधा का घंटों बाधित रहना स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही को उजागर करता है।
स्थानीय नागरिकों और मरीजों के परिजनों ने अस्पताल में स्थायी बिजली बैकअप व्यवस्था सुनिश्चित करने और पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद
















